






मेरे प्यारे शहरवासियों,
अजनबी मुल्क और अजनबी लोगों के बीच आकर अपने मुल्क की एहमियत जहन में बार बार उठती है। घर परिवार की याद का एहसास लौट आने को आवाज देता है। परंतु यहां परदेस सऊदी अरब में ना कोई फलसफा सुनने वाला है ना ही कोई सुकून देने वाला है। मुझे फख्र है अपने मुल्क की मिट्टी पर क्योंकि वहां से आए हम सभी 25 जने यहां के माहौल में गर्दिश (खराब समय) आते हुए महसूस कर रहें है। एक एक पल गैरत(आत्म सम्मान) पर चोट करने वाला है। अश्क(आंसू) पी कर बदन(शरीर) को बायहिस(सुन्न) कर बेबसी के साथ सहन कर रहें है। रूपए कमाने गए और फंस गए है। पैसों के लिए लोगों का बयाबन (जंगलीपन) भी देखी वहीं हम देश के 25 जनें एक साथ फंसे है तो एक दूसरे के लिए मोहब्बत भी देखी। एक अय्यार (चालाक) आदमी ने हमें भेज तो दिया परंतु हम जो झेल रहें है उससे वह भी सुकुन तो नहीं पा सकेगा। फकत(अकेले) छोटा भाई घर पर है जो किसी को जानता भी नहीं है। अम्मी का इख्तियार (शक्ति) नहीं कि वे कहीं आ जा सकें और मदद मांग सकें। राजनीति में सक्रिय अनेक लोगों को नवाजिश (दयालुता) के साथ मैसेज करवाए परंतु कहीं से मदद होती नजर नहीं आ रही है। मुझे फिर भी उम्मीद है कोई कासिद (दूत) बनकर हमारे लोग हमारी आवाम हमारी मदद की रिवायत (परंपरा) को निभाएंगे। अब तो मुझे बहुत हसरत (तड़प) है मुल्क लौट आने की और अपनी अम्मी, भाई, बहन को देखने और उनसे मिलने की। आपकी मदद का हम बेसब्री और शिद्दत से इंतजार करेंगे।
इसी उम्मीद में आपका सलीम पुत्र जमालद्दीन चुनगर
9828873806
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