May 20, 2026
00

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 दिसंबर 2021। शनिवार को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर स्थानीय भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री को याद किया व इसे सुशासन दिवस के रूप में मनाया। मंडल अध्यक्ष महावीर अड़ावलिया की अगुवाई में कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय में एकत्र हुए व अटल अमर रहें के नारे भी लगाए। अड़ावलिया ने देश हित में सर्वस्व समर्पण के लिए अटल के अटल निश्चयों की चर्चा युवा कार्यकर्ताओं से की। इस दौरान पालिकाध्यक्ष मानमल शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष रामगोपाल सुथार, पूर्व प्रधान छैलूसिंह शेखावत, पूर्व जिला परिषद सदस्य हेमनाथ जाखड़, शहर महामंत्री महेश राजोतिया, पार्षद रजत आसोपा, गोपाल प्रजापत, शिक्षा प्रकोष्ठ जिला संयोजक सुरेन्द्र चुरा, युवा मोर्चा जिलाउपाध्यक्ष भवानी प्रकाश तावनियां, महेंद्र राजपूत, मण्डल मंत्री नन्दू नाई, जगदीश आसोपा, संजय प्रजापत सहित कई भाजपाइयों ने भाग लिया व अटल से प्ररेणा लेकर सेवा व समर्पण कार्य करने का संकल्प भी लिया।

उपनेता प्रतिपक्ष का स्वागत किया।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के आगमन पर श्रीकरणी हेरिटेज में भाजपा के तोलाराम जाखड़ की अगुवाई में कई पार्षदों व भाजपाइयों ने राठौड़ का स्वागत किया। यहां राठौड़ को फूलमालाएं पहना कर साफा बंधवाया गया। इस दौरान यहां पार्षद जगदीश गुर्जर, अरूण पारीक, मघराज वाल्मीकि, रामसिंह जागीरदार, बिग्गा सरपंच जसवीर सारण, पूर्व सरपंच रतन सिंह, पार्षद रोशन छिंपा, झंझेऊ सरपंच भागीरथ सिंह, मंडल अध्यक्ष विक्रमसिंह सत्तासर, सांवरमल सोनी, संतोष कुमार बिनायकिया, अनमोल मोदी, रामुनाथ जाखड़, विमल शर्मा, गौरीशंकर माली, ओमप्रकाश राणा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
स्वागत के दो समारोह, क्षेत्र में बने चर्चा का विषय।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भाजपा में दो फाड़ नहीं कई फाड़ होने की चर्चाएं क्षेत्र में लगातार चल रही है और शनिवार को उपनेता प्रतिपक्ष के स्वागत कार्यक्रमों ने इसे बल दिया है। राजेन्द्र राठौड़ का दो स्थानों पर स्वागत किया गया व दोनों के द्वारा भाजपा का झंडा लिए जाने की घोषणा हुई और इसने विरोध को साक्षात प्रकट कर दिया। इससे श्रीडूंगरगढ़ शहर सहित गांवो में भी चर्चाओं को बल मिल गया है। हालांकि संगठन में ही नहीं पालिका में भी दो फाड़ में नजर आ रही है। भाजपा के लिए संघर्ष कठिन होता नजर आ रहा है। पार्टी के शुभचिंतक इसे संगठन के लिए शुभ नहीं मान रहें है और पार्टी में ऊपर से लेकर जनता के बीच तक इसे गलत मैसेज मान रहें है। कई चिंतकों ने एक दूसरे को फोन कर इसे रोकने पर चर्चा भी की है। हालांकि कई सक्रिय नाम दोनों ही कार्यक्रमों में नजर नहीं आए और इसे अधिक तूल न देने की नीति भी अपनाई।  (कपिला स्वामी)