May 20, 2026
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यूपी विधान सभा चुनाव अंतिम चरण तक पहुंच गया है। प्रचार थम गया। कल पीएम ने अपने संसदीय क्षेत्र में मेगा रोड शो किया। मंदिरों में दर्शन किये, आरती की, चाय पर चर्चा की। अखिलेश ने भी यहां रोड शो किया। ममता दीदी को लाये। राहुल और प्रियंका ने भी यहां डेरा डाला है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किये और रोड शो किया। साफ लग रहा है कि वाराणसी में इस बार चुनावी मुकाबला कांटे का है। पूरे यूपी की तरह किसी तरह की कोई लहर नहीं चल रही। हां, कई जगहों पर अंडर करंट जरूर है।
पहले तीन चरण में सपा रालोद गठबंधन हावी रहा। अगर रुख वही मतगणना में रहा तो उसके घाटे की भरपाई भाजपा के लिए परेशानी का सबब है। क्योंकि पिछले चुनाव में उन चरणों में भाजपा को बम्फर सीटें मिली थी, वो तस्वीर अब बदली सी दिखती है। बचे चार चरणों में भी सपा गठबंधन कमजोर है, ये तो माना नहीं जा सकता। इसी कारण राजनीति के जानकार इस बार यूपी में कांटे की टक्कर मान रहे हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दूसरी परेशानी अब तक के छह चरणों में मतदान प्रतिशत कम रहना है। पिछले चुनाव में 2 से 5 फीसदी मतदान बढ़ा था और भाजपा को रिकॉर्ड सीटें मिली थी। कम मतदान चुनाव परिणामों पर असर जरूर डालेगा। पहले तीन चरण में किसान आंदोलन बड़ा फैक्टर था, उसका असर भी दिख रहा था। बचे चार चरणों में जातीय संतुलन पर ही दोनों तरफ से जोर रहा।
अति पिछड़ा वर्ग पिछले चुनाव की तरह भाजपा के पक्ष में पूरा नहीं था इस बार। ओम राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़ अखिलेश का साथ कर लिया। ये गठजोड़ भाजपा को घाटा देगा, ये तय है। कितना देगा, ये चुनाव परिणाम से पता चलेगा। मुस्लिम मतदाता ने इस बार चुप रहकर वोट किया है, जिससे ये माना जा रहा है कि उसके मतों का विभाजन कम हुआ है।
ब्राह्मण मतदाता भी पिछली बार की तरह इस बार एक तरफ जाता नहीं दिख रहा। कांग्रेस ने इस मतदाता के साथ महिला मतदाताओं को टारगेट किया था, जो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बना है।
पाकिस्तान, जिन्ना, राम मंदिर, आतंकवाद आदि मुद्दे खड़े करने के प्रयास हुए, मगर वे लंबा चल नहीं पाये। इसी कारण इस बार किसी भी तरह की लहर नहीं दिखी। इसका अर्थ ये भी नहीं कि भाजपा बेहद कमजोर है, उसका अपना वोट बैंक है और उसके लिए बड़े नेताओं ने पसीना भी खूब बहाया है। मगर ये भी सच है कि अपने पक्ष में लहर नहीं बना सके। इसी कारण इस बार यूपी में कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
भाजपा ने इसीलिए अंदरखाने छोटे दलों या किसी बड़े दल से गठजोड़ करने का काम भी आरम्भ किया है। अखिलेश भी इस काम में पीछे नहीं है, उनके रणनीतिकार अनेक संभावित विधायकों के संपर्क में है। सभी जानते हैं कि यूपी विधान सभा का चुनाव अगले लोक सभा चुनाव का सेमीफाइनल है। भाजपा ने इसी कारण यहां ज्यादा जोर लगाया है। मतदाता ने इस बार संभावित परिणामों को लेकर संशय पैदा किया है, ये साफ दिख रहा है। इसीलिए असली तस्वीर तो मतगणना के दिन 10 मार्च को ही स्पष्ट होगी। पूरा देश यूपी चुनाव परिणामों पर नजरें टिकाए है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार