






भीड़ और विषय के लिहाज से देखा जाये तो कांग्रेस की जयपुर में हुई महंगाई विरोधी रैली काफी सफल थी। राजस्थान सहित समीप के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आये। उनमें जोश था,मगर कांग्रेस इसका कितना राजनीतिक फायदा उठा सकेगी, ये अब भी स्पष्ट नहीं है। क्योंकि कि इस रैली ने कई सवाल भी खड़े कर दिये, जिनके जवाबों में ही पार्टी नेता उलझे हुए हैं।
सोनिया गांधी ने रैली में भाषण नहीं दिया, राहुल गांधी को ही प्रमुखता दी गई। जो इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले संगठन चुनाव में वे ही पार्टी की कमान संभालेंगे।
अब बात राहुल के भाषण की। हिन्दू और हिंदुत्व में भेद की बात कह उन्होंने एक नई बहस खड़ी कर दी। भाजपा को हमलावर होने का मौका दे दिया। विचार और व्यक्ति में भेद की उनकी गूढ़ बात आम आदमी के लिए अजब थी। इसी का लाभ अब भाजपा उठा रही है और कांग्रेस पर तीखे हमले कर रही है। कांग्रेस विरोधी दलों का ये धर्म है, मगर जिस तरह से कांग्रेस नेताओं को हमले के बचाव में आना चाहिए, आ नहीं पाये। इस वजह से सवाल खड़े हुए हैं।
रैली में समय पर पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी नहीं पहुंच पाये, मगर राहुल बारबार अपने संबोधन में उनको इंगित कर रहे थे। ये अजीबोगरीब स्थिति थी, किसी भी नेता ने राहुल को उनके न होने की सूचना तक नहीं दी। बताते हैं इस भूल पर सोनिया गांधी ने के सी वेणुगोपाल और अजय माकन से बात भी की है।
राजस्थान कांग्रेस के दो पक्ष भी रैली में साफ साफ नजर आ गये। आलाकमान एक तरफ मुख्यमंत्री गहलोत के इंतजाम से प्रभावित था, वहीं सचिन पायलट को अग्रिम पंक्ति में स्थान देकर उनके महत्त्व का भी संदेश दिया। राहुल गांधी ने संबोधन में उनका नाम लिया। उनको बोलने का अवसर मिला। भीड़ में उनके समर्थन में नारे भी लगे। दो ध्रुव साफ है, ये स्पष्ट हुआ।
पेट्रोल, डीजल और बिजली तो राजस्थान में ज्यादा महंगी है, इस बात को ध्यान देना जरूरी था। केंद्र सरकार पर महंगाई पर हमलावर होना वाजिब है। क्योंकि जनता त्रस्त है मगर राजस्थान पर भी ध्यान जरुरी था। मुख्यमंत्री की रैली में कोई लुभावन घोषणा होती तो भाजपा और केंद्र सरकार पर कड़ा राजनीतिक हमला हो सकता था।
इस रैली ने हालांकि इस बात को जरूर प्रमाणित किया कि देश की जनता महंगाई से त्रस्त है और इसी को आने वाले पांच राज्यों के चुनाव में मुद्दा बनाया जाना जरूरी है। जनता ये चाहती है। रैली की भीड़ ने ये भी साबित किया कि विपक्ष की कांग्रेस के बिना कल्पना बैमानी है। रैली कांग्रेस की राजनीति की सूरत में बदलाव तो लायेगी, मगर उसका असर क्या होगा ये समय तय करेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार




