May 20, 2026
26jan

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आजादी के 75 साल बाद राजनीति का शिकार होंगे, ये गांधीवाद को मानने वालों ने सोचा भी नहीं था। देश के पहले सत्याग्रही, स्वतंत्रता आंदोलन के अगुवा गांधी के नाम पर भी बहस छिड़ेगी, ये कल्पना भी नहीं थी। दरअसल गांधी पर राजनीतिक बहस आरम्भ हुई है पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बहुमत हासिल करते ही सबसे पहले सरकारी कार्यालयों से गांधी की तस्वीर को गायब किया। गायब इसलिए कि हर चित्र में केवल अंबेडकर और भगत सिंह की ही तस्वीरें दिखने लगी। ये 75 साल की परंपरा को बदलने वाला काम था तो सबकी नजर इस बात पर पड़ी। गांधी से भाजपा का पहले ज्यादा वास्ता नहीं रहा था मगर नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के बाद गांधीवाद की कई बातों पर राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किये। स्वच्छ भारत अभियान उसका उदाहरण है।
कुल मिलाकर पीएम ने और किसी तस्वीर को भले ही हटाया हो मगर गांधी की तस्वीर को नहीं हटाया। गांधी के समय मे भी गांधी के विचारों से कई नेताओं की असहमति थी, मगर उन्होंने गांधी के अवदान को कम करने का काम नहीं किया। गांधीवाद दुनिया में प्रचलित विचार है और व्यक्ति नहीं है, उस पर कुछ करना तर्क संगत नहीं।
गांधी के अहिंसा, सत्याग्रह के सिद्धांत का अनेक देशों ने अवलम्बन किया है। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल जब राजनीति में नहीं थे तब अन्ना के साथ उन्होंने भ्र्ष्टाचार के खिलाफ दिल्ली में आंदोलन किया। तरीका गांधीवाद का ही था, सत्याग्रह। धरना, आमरण अनशन। वो भी गांधी के विचारों की तरह की इन सब का ध्येय राजनीति नहीं है। ये दीगर बात है कि राजनीति न करने की घोषणा कर सत्याग्रह करने वाले केजरीवाल ने राजनीतिक दल आप बनाया। दिल्ली में शासन हासिल किया। जिस गांधी के विचारों से राजनीतिक सफलता हासिल की अब पंजाब में उसी गांधी की तस्वीर पर अलग रुख अपना लिया। शायद आज की राजनीति यही है।
अंबेडकर, भगत सिंह हर देशवासी की पसन्द है। एक ने देश को संविधान दिया तो दूसरे ने मातृभूमि को आजाद कराने के लिए प्राणों की आहुति दी। इसीलिए देश की आंखों के वे तारे हैं। मगर इनके साथ गांधी हो तो हर देशवासी को सुकून मिलता है, मगर राजनीति ने गांधी को मानने वालों का सुकून छिन लिया।
गांधी और गांधीवाद को उनके जीवित रहते और बाद में भी अनेक बार ओझल करने की कोशिश की गई, पर सफलता नहीं मिली। व्यक्ति को भुलाया जा सकता है, विचार को नहीं। अहिंसा, सत्याग्रह, समता, सत्य, सादगी और मानवीयता ही तो गांधीवाद है, उसे कैसे भूलेगा आदमी। गांधीवाद से असहमति हो सकती है मगर उसका विरोध व्यावहारिक नहीं। आप ने गांधी को राजनीति का विषय बनाया है, आप के मुखिया केजरीवाल को अपने इस निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए। गांधी का गांधीवाद था, है और रहेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार