






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 मार्च 2025। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 10-Mar-2025
☀ Sri Dungargarh, India
☀ आज का पंचांग
🔅 तिथि एकादशी 07:47 AM
🔅 नक्षत्र पुष्य 00:52 AM
🔅 करण विष्टि, बव 07:47 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग शोभन 01:55 PM
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:49 AM
🔅 चन्द्रोदय 03:05 PM
🔅 चन्द्र राशि कर्क
🔅 चन्द्र वास उत्तर
🔅 सूर्यास्त 06:39 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:10 AM
🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 काली सम्वत 5125
🔅 दिन काल 11:49:28
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत फाल्गुन
🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:20 PM 01:08 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 01:08 PM 01:55 PM
🔅 कंटक 09:11 AM 09:59 AM
🔅 यमघण्ट 12:20 PM 01:08 PM
🔅 राहु काल 08:18 AM 09:47 AM
🔅 कुलिक 03:30 PM 04:17 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 10:46 AM 11:33 AM
🔅 यमगण्ड 11:15 AM 12:44 PM
🔅 गुलिक काल 02:13 PM 03:41 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ
📜 चोघडिया 📜
🔅 अमृत 06:48 AM – 08:17 AM
🔅 काल 08:17 AM – 09:46 AM
🔅 शुभ 09:46 AM – 11:15 AM
🔅 रोग 11:15 AM – 12:44 PM
🔅 उद्वेग 12:44 PM – 02:13 PM
🔅 चल 02:13 PM – 03:41 PM
🔅 लाभ 03:41 PM – 05:10 PM
🔅 अमृत 05:10 PM – 06:39 PM
🔅 चल 06:39 PM – 08:10 PM
🔅 रोग 08:10 PM – 09:41 PM
🔅 काल 09:41 PM – 11:13 PM
🔅 लाभ 11:13 PM – 00:44 AM
🔅 उद्वेग 00:44 AM – 02:15 AM
🔅 शुभ 02:15 AM – 03:46 AM
🔅 अमृत 03:46 AM – 05:17 AM
🔅 चल 05:17 AM – 06:48 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 05:36 AM समाप्त: 07:14 AM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:14 AM समाप्त: 08:30 AM
🔅 मेष चर
शुरू: 08:30 AM समाप्त: 10:06 AM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:06 AM समाप्त: 12:02 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 12:02 PM समाप्त: 02:17 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 02:17 PM समाप्त: 04:37 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 04:37 PM समाप्त: 06:55 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:55 PM समाप्त: 09:11 PM
🔅 तुला चर
शुरू: 09:11 PM समाप्त: 11:30 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 11:30 PM समाप्त: 01:49 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:49 AM समाप्त: 03:53 AM
🔅 मकर चर
शुरू: 03:53 AM समाप्त: 05:36 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🌼 आमलकी एकादशी व्रत
शास्त्रों में आंवला को अमृत फल माना गया है, श्रेष्ठ स्थान दिया गया है । मान्यता है कि भगवान श्री विष्णु जी ने जब सृष्टि की रचना के लिए भगवान ब्रह्मा जी को जन्म दिया उसी समय उन्होंने आंवले के वृक्ष को भी उत्पन्न किया था।
आंवला विष्णु जी को अत्यंत प्रिय है, भगवान श्री हरि विष्णु जी ने आंवले को आदि वृक्ष के रूप में बताया है ।
शास्त्रों में कहा गया है जो प्राणी विष्णु जी की पूर्ण कृपा, समस्त सुखो और अंत में स्वर्ग और मोक्ष की कामना रखते हैं उन्हें फाल्गुन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी का व्रत अवश्य ही रखा चाहिए। इस एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा से समस्त पापो का नाश होता है, सुख – समृद्धि, परम सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है ।
आमलकी एकादशी को रंग भरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है वर्ष की समस्त एकादशियों में यही ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान श्री विष्णु जी के साथ साथ भगवान भोलेनाथ जी की भी पूजा की जाती है। रंग भरी एकादशी के दिन तीर्थ नगरी वाराणसी में भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026



