






यूपी विधान सभा चुनाव के चौथे चरण में भी कल पहले तीन चरणों की तरह ही मतदान का प्रतिशत घटा। घटे मतदान का असर चुनाव परिणामों पर पड़ना स्वाभाविक है क्योंकि एक प्रतिशत कम मतदान पूरे परिणाम उलट देता है। लगातार घटे मतदान प्रतिशत ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है।
कल चौथे चरण में 2017 के चुनाव की तुलना में कम मतदान से भाजपा का चिंतित होना वाजिब है। क्योंकि पिछली बार बढे 5 फीसदी मतदान के कारण भाजपा ने 59 सीटों में से 50 के करीब सीटें जीत ली थी। राजनीतिक विश्लेषकों का आंकलन है कि कम मतदान एंटी इनकंबेंसी को दर्शाता है और सत्ताधारी दल को नुकसान होता है। इस ट्रेंड का खेल चौथे चरण में भी होगा, ये तो तय सा ही लगता है।
लखनऊ, लखीमपुर खीरी, रायबरेली आदि के अपने समीकरण है, जो भाजपा के सामने कड़ी परेशानी वाले थे। लखनऊ में रीता बहुगुणा के बेटे को टिकट न देने और मतदान के दिन उनकी अखिलेश के साथ मिलने की फोटो ट्वीट होने के बड़े राजनीतिक मायने है। राजनीति के जानकार मानते हैं कि भाजपा के लिए अंदरखाने चौथे चरण में सब कुछ ठीक नहीं रहा।
रायबरेली में प्रियंका ने अधिक समय दिया और अपनी परंपरागत सीट पर जोर लगाया। यहां से पिछली बार के जीते दो कांग्रेसी विधायक चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गये, जिनमें अदिति सिंह भी शामिल थी। इसी कारण यहां प्रियंका ने प्रतिक्रिया स्वरूप ज्यादा जोर लगाया, जो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बना है।
लखीमपुर खीरी तो पिछले चुनाव में भाजपा का गढ़ था मगर इस बार स्थिति उलट है। किसानों को रौंदने की घटना का व्यापक असर है ये तो भाजपा उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान ही महसूस हो गया। यहां सपा रालोद गठबंधन ने ज्यादा जोर भी लगाया। किसान यूनियन तो सक्रिय रही ही।
मगर सपा गठबंधन के लिए भी इस चरण में बसपा एक समस्या थी, जो भाजपा के लिए राहत की बात थी। भाजपा इस टकराहट से सफल होने की उम्मीद लगाए हुए है। मतदाता की चुप्पी ने जरूर सभी दलों को सांसत में डाला हुआ है।
अब तक के चार चरणों मे आधी से अधिक सीटों पर मतदान हो गया। पांचवें चरण के लिए सभी दलों ने अपने को झोंक दिया है। मगर चौथे चरण की तरह भाजपा अब भी आतंकवाद व दबंगई को मुद्दा बनाने में लगी है तो सपा गठबंधन आवारा सांड, किसान, महंगाई को मुद्दा बना रहा है। मगर पांचवें चरण में भी युवा अपना मुद्दा बेरोजगारी बता रहा है, जो वाजिब भी है। युवाओं का ये मुद्दा भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है, इसीलिए उसके नेताओं ने आतंकवाद के जरिये वोटों के ध्रुवीकरण पर जोर देना शुरू किया है। पांचवें चरण में भी सपा रालोद व भाजपा के मध्य कड़ा मुकाबला होता दिख रहा है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



