






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 जनवरी 2022। क्षेत्र में ही नहीं पूरे देश की राजनीति में किसान अभी केन्द्र में है और हर कोई नेता किसान के साथ होने का दावा करता है। हमारे कृषि प्रधान क्षेत्र में किसान केवल वोटर ही नहीं वरन सदैव ये गेम चेंजर साबित हुए है। आज क्षेत्र के किसान यूरिया संकट का सामना कर रहें है और ऐसे में कोई इनके कष्ट को साझा करता नजर नहीं आ रहा है। इस कड़कड़ाती ठंड में यूरिया की उम्मीद में किसान मीलों चलकर आते है और शाम तक निराश होकर लौट जाते है। शनिवार को नववर्ष की पहली सुबह भी समितियों के बाहर सुबह 4 बजे किसान आकर खड़े हुए थे और यूरिया की गाड़ी नहीं आने पर उदास अपने खेतों की ओर लौट गए थे। सोमवार सुबह चार बजे से ये धरती पुत्र पुनः यहां खड़े है और यूरिया की उम्मीद लगाए अपनी बारी का इंतजार कर रहें है। हालांकि कई नेताओं ने सरकार से लिखकर यूरिया आपूर्ति की मांग की है। यहां लाइन में लगे किसान तोलियासर से बाबूलाल सुथार, सातलेरा से रामकरण जाखड़, बेनिसर से जिज्ञासु सिद्ध, रिड़ी से सोहन जाखड़, ऊपनी से हीरालाल गोदारा को उम्मीद भी नहीं है कि इस लंबी लाइन में उनकी बारी तक यूरिया मिल सकेगी। महिला किसान कुंतासर से आई निरमा जांगू, लखासर से लक्ष्मी तंवर, श्रीडूंगरगढ़ से लीला ओड, जैसलसर से पूजा बेनीवाल सहित अनेक महिलाएं लाइन में लगी है। ये किसान परेशान है और सवाल कर रहें है कि रबी की फसलों की बुवाई को लेकर हो देरी से होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा.? क्षेत्र में किसान के साथ खड़े होने वाले नेता यूरिया के लिए लगातार प्रयास करते नजर क्यों नहीं आ रहें है.? यहां तक की महिला किसान भी यूरिया की जरूरत के चलते खेत से समिति की राह लेने को मजबूर है। आज बालाजी सोसायटी घुमचक्कर में रामरतन गोदारा ने बताया कि दो दो थैले मिल रहे है। कृषि मंडी में जय किसान विकास सेवा समिति सहकारी सोसायटी में चार थैले मिल रहें है।
अक्टूबर-नवंबर में होनी थी बुवाई।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यूरिया की किल्लत के कारण बुवाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। रबी की फसल गेहूं, सरसों, चना की बुवाई अक्टूबर नवंबर माह में की जाती है और इस बार जनवरी आ गई है। किसान इससे चितिंत है और नेताओं से सुनवाई की मांग कर रहें है।










