May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 सितबंर 2021। दृश्य 1- कस्बे में 10 सितबंर 2021 का एक फोटो क्षेत्र में वायरल हो रहा है जिसमें एक महिला मुख्य बाजार में बने गढ्ढें में गिर गई तथा एक युवक ने उन्हें सहारा देकर बाहर निकाला। मामला ये हुआ कि महिला गांधी पार्क के पास स्थित बैंक में आई और तभी बरसात आ गई है। बरसात थमने पर महिला बाहर निकली तब तक बाजार में पानी भर गया था। महिला के हाथ में बैंक के कागजात व अन्य जरूरी कागजात थे जो नाले में गिरने से रुपयों पैसों सहित भीग गए। महिला श्रीडूंगरगढ़ के लचर सिस्टम का सत्यानाश होने की बात कहते हुए अपने घर को चली गई।
दृश्य 2- कस्बे में 3 सितम्बर को आई बरसात में मुख्य बाजार में पानी भर गया और यहां ग्रामीण अंचल से खरीदारी करने आई एक युवती बच्चे सहित इसी नाले में गिर गई। आस पास के दुकानदारों ने मदद कर बच्चे व महिला को निकाला और पालिका तक ये चर्चा भी पहुंचाई। महिला के साथ आई अधेड़ महिलाओं ने लचर सिस्टम का सत्यानाश होने की बात कहते हुए खरी खोटी कही और अपने गांव को रवाना हो गई।
दृश्य 3- इसी गढ्ढे में एक ऑटो टैक्सी के फंस जाने से टैक्सी चालक का ऑटो क्षतिग्रस्त होने के साथ उसकी कमर में दर्दनाक पीड़ा हुई जिसके कारण वह कई दिन काम पर नहीं जा सका। ऑटो चालक का आर्थिक नुकसान हुआ और उसने भी लचर सिस्टम का सत्यानाश होने की बात कहते हुए गालियां निकाली।

ये दृश्य अब श्रीडूंगरगढ़ बाजार में आम हो गए है। इस खढ्ढें के अलावा यहां चार पांच बड़ें खढ्ढें ओर भी है तथा पूरे बाजार में सड़कें बुरी तरह से टूटी पड़ी है। गांधी पार्क के पास इस गढ्ढे के अलावा मुख्य बाजार में लक्की मोबाईल के पास एक बड़ा खढ्ढा है, उससे थोड़ा आगे ही सुरंग सा नाला निकाला हुआ है, मस्जिद के पास, आगे घूमचक्कर की ओर पीली टंकी के पास, इन गढ्ढों सहित बड़ी नालियां मुहं बाए खड़ी है टूटी सड़कों के साथ और इनकी सुध लेने वाली पालिका उसके इंजीनियर, अधिकारी की जनचेतना का प्रमाण दे रहें है। बनी हुई सड़कों पर सड़क निर्माण करवा कर बजट उठाने का काम पालिका बखूबी करना जानती है परन्तु कस्बे के बाजार से गुजरना दूभर हो गया है इसकी सुनवाई करने का समय मुश्किल ही मिल पाए। इनकी शिकायतें लगातार नागरिक, गांवो से आने वाले ग्रामीण कर रहें है परन्तु कानों में रूई ठोंस कर बैठा पालिका प्रशासन से सुनवाई की आस करना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा ही है। करोड़ो का बजट खर्च होने के बावजुद यहां संसाधनों का रोना तो आप सुन सकते है परन्तु कार्य सुचारू होने की उम्मीद नहीं कर सकते है। याद रहें भ्रष्टाचार में राजस्थान की विधानसभा तक श्रीडूंगरगढ़ की पालिका ने अपना नाम किया है परन्तु आज भी सुधार के नाम पर नतीजे ढाक के तीन पात ही है। आज बाजार में चारों ओर चर्चा है सब्र की। यहां मुख्य बाजार में दुकानदारों, खरीददारों, नागरिकों का विशाल सब्र आखिर कब तक ठहरें पानी सा बंधा रहेगा। और यक्ष प्रश्न ये भी है कि कस्बे के हालात बदतर होते जा रहें है परन्तु अपने परिवारों के लिए कमाई करने वाला आम नागरिक घर परिवार की जरूरतों से जूझे या लचर सत्यानाशी सिस्टम से।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बाजार में बने गढ्ढे में गिरी महिला के सभी जरूरी कागजात भीग गए, महिला को युवक ने निकाल लिया और गढ्ढे में गिर गया श्रीडूंगरगढ़ का लचर सिस्टम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आए दिन हादसों का सबब बना ये गढ्ढा ढकवाने के लिए नागरिक कर रहें है लगातार संघर्ष, और हर घटना के बाद यही गूंज रहा है कि सत्यानाश हो इस लचर सिस्टम का।