May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 8 मार्च 2025। महिला दिवस पर जाने संविधान में महिला सुरक्षा व सम्मान के लिए किए गए विशेष प्रावधानों को एडवोकेट अनिल धायल के साथ। इन कानूनों की जानकारी से महिला अपने खिलाफ होने वाले किसी भी अपराध को रोक सकती है और अपराध घटित हो जाने पर अपराधी को सजा भी दिला सकती है।
हेल्पलाइन नंबर..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। महिलाओं को किसी भी तरह की समस्या होने पर राजस्थान के हेल्प लाइन नंबर 181, 1091, 112 पर कॉल कर सकती है। साथ ही अपने नजदीकी पुलिस थाने के नंबर पर भी फोन करने पर पुलिस द्वारा तत्परता से महिला को सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। श्रीडूंगरगढ़ पुलिस थाने के नबंर 01565 222121 पर कॉल कर मदद मांग सकती है।
राजकॉप सिटीजन ऐप….
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। राजस्थान पुलिस ने आपातकालीन स्थितियों में महिलाओं को चंद मिनटों में पुलिस सुरक्षा सुलभ कराने के लिए राजकॉप सिटीजन ऐप विकसित किया है। इस ऐप में ‘मदद चाहिए (Need Help)’ फ़ीचर पर जाकर मदद ली जा सकती है।
महिला हेल्प डेस्क…..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। प्रति थाने में महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है। महिला हेल्प डेस्क पर महिला पुलिस अधिकारी और अन्य जवानों को विशेष ट्रेनिंग के साथ महिला अपराधों के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए पीड़ित की मदद करने की बात कही गई है।
महिला आयोग की स्थापना…
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भारत में महिलाओं के लिए कानूनी और संवैधानिक संशोधन करके महिलाओं के लिए समान और न्यायपूर्ण आजीविका स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन किया गया था। महिलाओं के खिलाफ हिंसा राष्ट्रों, समाजों, संस्कृतियों और वर्गों में मानवाधिकारों का एक मौलिक उल्लंघन है और इस मौलिक अधिकार के उल्लंघन को रोकने के लिए; इस आयोग का गठन किया गया था।
घरेलू हिंसा के विरुद्ध सुरक्षा का अधिकार…
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भारतीय संविधान की धारा 498 महिलाओं को मौखिक, वित्तीय, भावनात्मक और यौन शोषण के साथ-साथ घरेलू हिंसा के अन्य रूपों से सुरक्षा प्रदान करती है। अपराधियों को जमानत की संभावना के बिना आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है।
मैटरनिटी लाभ अधिनियम, 1861..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यह अधिनियम महिलाओं के रोजगार और कानून द्वारा अनिवार्य मातृत्व लाभ को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत हर कामकाजी महिला को छह महीने के लिए मैटरनिटी लीव मिलती है। इस दौरान महिलाएं पूरी सैलरी पाने की हकदार होती हैं। यह कानून हर सरकारी और गैर सरकारी कंपनी पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि एक महिला कर्मचारी जिसने एक कंपनी में प्रेग्नेंसी से पहले 12 महीनों के दौरान कम से कम 80 दिनों तक काम किया है, वह मैटरनिटी बेनेफिट पाने की हकदार है। जिसमें मैटरनिटी लीव, नर्सिंग ब्रेक, चिकित्सा भत्ता आदि शामिल हैं।
निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार….
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम महिला बलात्कार की पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता है। यह धारा महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करने पर कानूनी सहायता और प्रतिनिधित्व तक पहुँच की गारंटी देती है।
रात में गिरफ्तार न किये जाने का अधिकार..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गंभीर परिस्थितियों में और केवल प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही कोई पुलिस अधिकारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किसी महिला को गिरफ्तार कर सकता है। आम तौर पर पुलिस को रात के समय महिलाओं को गिरफ्तार करने की अनुमति नहीं होती है।

कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ उत्पीड़न…
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अगर किसी महिला के साथ उसके ऑफिस में या किसी भी कार्यस्थल पर शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न किया जाता है, तो उत्पीड़न करने वाले आरोपी के खिलाफ महिला शिकायत दर्ज कर सकती है। यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाली शारीरिक उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न से सुरक्षा मिलती है। आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है।

भारतीय संस्कृति व समाज मे महिला के खिलाफ जिन अपराधों मे सबसे गंभीर अपराध माना गया है उनमे बलात्कार सबसे प्रमुख है।
नये कानूनों मे सात ऐसी स्थितियों के बारे मे बताया गया है जब किसी महिला के साथ प्राकृतिक या अप्रकृतिक रूप से स्थापित किये गए सेक्सुअल रिलेशन को ब्लातसंग ( रेप )माना जायेगा.
1. किसी महिला कि इच्छा के विरुद्ध
2. उस महिला कि सम्मति के बिना
3. महिला को मृत्यु या नुकसान करने का डर दिखा कर ली गई अनुमति
4. ज़ब पुरुष जानता है कि वह महिला का पति नहीं है लेकिन महिला इस विश्वास पर अनुमति या सम्मति देती है कि महिला को लगता है कि यह पुरुष उससे विवाह कर लेगा
5. महिला कि मानसिक अवस्था सही ना होने, नशे मे होने, चित्त वीकृति कि दशा, किसी पुरुष या अन्य व्यक्ति द्वारा कोई नशीला पदार्थ दिए जाने के बाद महिला द्वारा दी गई सम्मति व ऐसी स्थिति जब महिला प्रकृति ओर परिणामो को समझने मे असमर्थ हो
6. नाबालिग या 18 वर्ष से कम आयु कि अवस्था मे महिला द्वारा दी गई अनुमति
7. जब महिला सम्मति को समझने मे असमर्थ हो
नोट – सम्मति का अर्थ स्पस्ट स्वैछिक सहमति को माना गया है
ब्लात्संग (रेप ) के लिए दंड….
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सामान्य पुरुष को रेप करने के अपराध मे दोषी साबित होने पर कठिन कारावास जो कम से कम 10 वर्ष का होगा समेत आजीवन कारावास व जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।
कुछ विशेष मामलों मे दंड…
1. सोलह वर्ष से कम आयु कि महिला से रेप karne पर कम से कम 20 साल से लेकर पुरे जीवन कठिन कारावास व जुर्माने कि सजा होंगी। यह जुर्माना पीड़िता को मिलेगा
2. बारह वर्ष से कम आयु कि महिला से रेप करने पर भी 20 साल से अधिक व जीवन भर तक कठिन कारावास के साथ महिला के चिकित्साकीय खर्चे व पुनरवास का जुर्माना देना होगा जो पीड़िता को मिलेगा।
पीड़िता कि मृत्यु या विक्रत दशा के लिए सजा…..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रेप के दौरान महिला को ऐसी छति पहुंचाय जिससे महिला कि मृत्यु हो जाये या जिसके करण उस महिला कि दशा सतत विक्रतशील हो जाये तब कम से कम 20 वर्ष का कठिन कारावास व जीवन भर जेल के साथ मृत्यु दंड कि सजा भी मिल सकेगी।
पीड़िता की पहचान उजागर करने पर सजा का प्रावधान…
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। किसी रेप पीड़िता या महिला अपराध से पीड़ित किसी महिला कि पहचान उजागर करने, मुद्रीत करने या प्रकाशित करने पर 2वर्ष के कारावास व जुर्माने कि सजा हो सकेगी।
पॉक्सो एक्ट कानून..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पॉक्सो यानी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट। पॉक्सो एक्ट में बच्चों के लिए कानून बनाए गए हैं। यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। इस कानून को 2012 में लाया गया था। इसके तहत बच्चों के साथ होने वाला यौन शोषण एक अपराध है। यह कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों, दोनों पर लागू होता है।
महिलाओं का भरण पोषण से सबंधित कानून…
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क़ानून मे भरण पोषण के आदेश के अंतर्गत पत्नी, नाबालिग बच्चे, अविवाहित पुत्री, वृद्ध माता-पिता और विधवा बहू, जिनका कोई अपना भरण-पोषण का सहारा नहीं है, उनको भरण-पोषण में भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है।
भरण-पोषण निम्नलिखित कानूनों के अन्तर्गत प्राप्त किया जा सकता है –
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) (धारा 144)
हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण कानून, 1950 (धारा 18-23)
हिन्दू विवाह कानून, 1955 (धारा 24 और 25)
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण कानून, 2005

एडवोकेट अनिल धायल 9660801700