






(विशाल स्वामी)
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जून 2025। श्रीडूंगरगढ़ में ट्रोमा सेंटर व उपजिला अस्पताल का निर्माण दो पक्षों के बीच अड़ंगा अड़ाने से लेकर बनाने, नहीं बनाने की राजनीति में उलझा हुआ नजर आ रहा है। वहीं श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स पूरी प्रामाणिकता के साथ अभी तक हुए पूरे घटनाक्रम का तथ्यात्मक व तारीख वाइज विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा है। ट्रोमा अब क्षेत्रवासियों को मेंटल ट्रोमा दे रहा है, पढें जोर आजमाईश की पूरी इनसाइड स्टोरी, विदित रहे कि इस खबर में प्रकाशित समस्त तथ्यों के सभी दस्तावेज टाइम्स के पास उपलब्ध भी है।
राजस्थान में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले रेड जॉन में रतनगढ़ से बीकानेर तक की नेशनल हाईवे एक नबंर पर है। लंबे समय से यहां पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में दम तोड़ने वाले आम नागरिकों के लिए सरकारें, प्रशासन, नेता व आमजन चिंतित भी रहे। लंबे समय से यहां दुर्घटनाएं रोकने के लिए विभिन्न योजनाएं भी बनी लेकिन दुर्घटनाओं में कमी नहीं आई। ऐसे में दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या कम करने एवं घायलों को त्वरित उपचार मिलने के लिए श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की मांग भी लंबे समय से लगातार उठ रही है। ऐसे में गत सरकार के अंतिम वर्ष में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पूरे राज्यभर में अनेकों जनकल्याणकारी घोषणाओं के क्रम में तत्कालीन विधायक गिरधारीलाल महिया के प्रयासों से 10 फरवरी 2023 को श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर खोलने एवं उसके कुछ दिनों बाद पूरक बजट में श्रीडूंगरगढ़ सामुदायिक चिकित्सालय को उपजिला चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की घोषणा भी की गई। ट्रॉमा सेंटर की घोषणा के बाद तत्कालीन विधायक गिरधारीलाल महिया द्वारा दानदाता के रूप में बाहेती परिवार एवं कांग्रेस विधायक प्रत्याशी मंगलाराम गोदारा द्वारा दानदाता के रूप में चांडक परिवार को आगे किया गया। लेकिन ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय दोनों की घोषणा होने पर दोनों परिवार जो कि आपस में निजी रिश्तेदार है, ने आपस में ग्रुप करते हुए ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय दोनों का निर्माण करवाने की सहमति दी। ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय की लागत सरकार द्वारा 25 करोड़ रुपए आंकी गई थी एवं पीपीपी मोड पर दानदाताओं को 40 प्रतिशत रूपए याने के 10 करोड़ रुपए ही देने थे। क्षेत्र के दानदाता चुन्नीलाल सोमाणी परिवार द्वारा बीकानेर में भी बनाए गए ट्रॉमा सेंटर का निर्माण इसी पीपीपी मोड में किया हुआ है। इसी तर्ज पर श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय बनना था। लेकिन सरकारी सिस्टम में पीपीपी मोड़ पर बनने वाले प्रोजेक्ट में दानदाता परिवार से 40 प्रतिशत रुपए सार्वजनिक निर्माण विभाग में जमा लेकर 60 प्रतिशत रुपए सरकार द्वारा दिए जाने एवं निर्माण सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा किए जाने की लंबी कवायद को देखते हुए यह सामने आया कि निर्माण वित्तिय वर्ष 2023-24 में नहीं शुरू हो सकेगा एवं फाईल नई सरकार के आने के बाद ही आगे बढ़ पाएगी। ऐसे में त्वरित निर्माण करवाने के लिए युद्ध स्तर पर किया गया व दानदाता परिवार ने भी सम्पूर्ण 25 करोड़ का निर्माण अपने द्वारा करवा दिए जाने का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया। इसके बाद नेशनल हाईवे पर विवादित भूमि चयन करने, उसका पट्टा नगरपालिका द्वारा जारी करवाने, नक्शे बनाने, नक्शानुसार 500 रुपए का नोटेरी किया हुआ शपथ पत्र देने, भूतल एवं प्रथम तल में कुल 10651.37 स्कायर मीटर (114646 स्कायर फीट) का सम्पूर्ण निर्माण स्वीकृत करवाने की लंबी कवायद चली एवं अंतत: 4 अक्टूबर 2023 को निर्माण करने की स्वीकृति जारी कर दी गई। इसके तुरंत बाद ही 5 अक्टूबर को दानदाता परिवार द्वारा शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया एवं मौके पर कीकर कटाई, भूमि समतलीकरण का कार्य भी शुरू किया गया। समारोह के बाद भवन की भविष्य में मजबूती के लिए जयपुर से विशेष मशीनें मंगवा कर मिट्टी की कई प्रकार की जांचें भी करवाई गई एवं जांचों की रिपोर्ट आने तक विधानसभा चुनाव भी सर पर आ गए थे। पढ़ें अब आगे की कहानी, तारीकों एवं घटनाओं की जुबानी।
मांगा सहयोग, मिला आश्वासन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दिसम्बर 2023 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत विजयी हुए। 8 दिसम्बर 2023 को दानदाता परिवार उनसे मुलाकात की और भवन निर्माण संबधी जिम्मेदारी शपथ पत्र में लिए जाने की जानकारी देते हुए क्षेत्र में पूर्व में दानदाताओं द्वारा किए गए निर्माणों में किए गए सरकारी सहयोग की तर्ज पर चारदीवारी एवं मिट्टी भराव विधायक कोष व नगरपालिका फंड से करवाने का आग्रह किया। विधायक द्वारा ट्रॉमा निर्माण में हर संभव साथ देने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन बात ठंडे बस्ते में चली गई। इस बीच ही लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लग गई। 4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव का परिणाम जारी हुआ एवं दानदाता परिवार ने विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता रामगोपाल सुथार का साथ लेते हुए 10 जून को जिला कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी बात रखी। इस पर कलेक्टर ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के फंड से भर्ती एवं चारदीवारी करवा देने का आश्वासन भी दिया।
गए थे नमाज बख्शवाने, रोजे गले पड़ गए।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। “गए थे नमाज बख्शवाने, रोजे गले पड़ गए” छोटे काम से बचने का प्रयास करने वाले के ऊपर अतिरिक्त काम की जिम्मेदारी आ जाने की स्थिति में कही गई यह कहावत श्रीडूंगरगढ़ ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय का निर्माण करवाने वाले दानदाताओं पर सटीक साबित हुई जब उन्होनें भवन निर्माण से पूर्व मिट्टी भराई एवं चारदीवारी का कार्य सरकारी पैसों से करवाने का प्रयास किया। 10 जून 2024 को जिला कलेक्टर द्वारा डीएफएफटी फंड से मिट्टी भराई एवं चारदीवारी करवाने के आश्वासन के कुछ दिनों में ही कलेक्टर का रूख बदल गया और भामाशाह को 2 जूलाई को को प्रशासन द्वारा पत्र दिया जाता है कि एवं 1 जुलाई को कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के निर्णय अनुसार दानदाता परिवार को निर्माण करवाना है तो बेसमेंट का निर्माण भी करवाना होगा अन्यथा नहीं बनाने का पत्र दे देने को कहा जाता है। इसके बाद भामाशाह द्वारा अपने स्तर पर विभागीय अधिकारियों को कन्वेंस करने का प्रयास किया गया, लेकिन स्थानीय स्तर पर बात नहीं बनी। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर बनवाने के प्रयासों में जुटे लोगों ने जयपुर में अपनी तिकड़में भिड़ाई व 21 अक्टूबर को दानदाता द्वारा भवन निर्माण के साथ मिट्टी भरवाई एवं चारदीवारी भी अपने स्तर पर करवा लेने की बात कहते हुए पुराने नक्शे, पुरानी स्वीकृति के आधार पर निर्माण शुरू करवाने की अनुमति देने का पत्र दिया। इस पत्र के प्रतिउत्तर में 25 अक्टूबर को चिकित्सा विभाग के निदेशक द्वारा बीकानेर सीएमएचओ को 3 अक्टूबर 2023 को हुए एमओयू के अनुसार भवन निर्माण करवाने एवं समस्त लागत दानदाता से होना सुनिश्चित करने को कहा गया। इस पत्र का प्रतिलिपि में विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड अध्यक्ष रामगोपाल सुथार को भी शामिल किया गया एवं इसके बाद क्षेत्रवासियों को लगा कि मिट्टी भरवाई एवं चारदीवारी में लगने वाले करीब 1 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय करने के साथ ही दानदाता द्वारा निर्माण करवाया जा सकेगा। लेकिन मामला यहां फिर से उलझ जाता है एवं जयपुर से आए एमओयू करवाने के आदेश के विपरीत बीकानेर सीएमएचओ द्वारा 5 नवम्बर 2024 को निदेशक जयपुर को रिर्वट लेटर भेजा गया। जिसमें 10 जून 2024 को श्रीडूंगरगढ़ के गणमान्य नागरिकों एवं जनप्रतिनिधि की बैठक का उल्लेख करते हुए ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में भूमिगत रिचार्ज का प्रावधान रखते हुए अंडरग्राऊंड पार्किंग, प्रयोगशाला, स्टोर आदि का निर्माण करवाने की शर्त पर ही एमओयू करवाने संबधी निर्देश मांगे जाते है।
2025 की शुरूआत में जगी उम्मीद, जयपुर से आई टीम रास्ते में बदले विचार।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। फरवरी 2023 से दिसम्बर 2024 तक करीब दो वर्षों का इंतजार करने वाले क्षेत्रवासियों को वर्ष 2025 की शुरूआत में ट्रॉमा सेंटर निर्माण शुरू हो जाने की उम्मीद तब जगी जब बीकानेर सीएमएचओ ने 5 फरवरी 2025 को दानदाता को पत्र देकर पूर्व स्वीकृति अनुसार मिट्टी भरवाई एवं चारदीवारी के साथ निर्माण करवा सकने अन्यथा मना कर देने संबधी पत्र दिया गया। 5 फरवरी को दिए गए इस पत्र के जवाब में 6 फरवरी को ही दानदाता परिवार द्वारा मिट्टी भराई, चारदीवारी एवं पूर्व स्वीकृत नक्शे अनुसार निर्माण करवा देने का प्रतिउत्तर दिया गया। इसके बाद एमओयू करने के लिए छह जनों की कमेटी बनती है एवं इस कमेटी को एक और तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुशंषा अनुसार भूजल रिचार्ज सिस्टम, भूमिगत पार्किंग निर्माण आदि के साथ ही निर्माण करवाने एवं दूसरी और दानदाता द्वारा मिट्टी भराई एवं चारदीवारी के साथ पूर्व में दिए गए नक्शे अनुसार ही निर्माण करवाने की विवादास्पद स्थिति को समाप्त करने की जिम्मेदारी दी जाती है। कमेटी में पांच जने चिकित्सा विभाग से एवं एक जना दानदाता परिवार से होता है एवं 7 फरवरी को करणी हैरीटेज प्रांगण में उनकी बैठक होती है। कमेटी को 7,8 व 9 फरवरी को दोनो पक्षों को सुनने, निर्माण स्थल का जायजा लेने एवं रिपोर्ट चिकित्सा विभाग के निदेशक को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन रास्ते में ही विचार बदल जाते है एवं दानदाता को डबल लेयर बेसमेंट पार्किंग बनाने, 100 बैड के उपजिला चिकित्सालय का निर्माण लेकिन भविष्य में 150 बैड तक विस्तारित करने के लिए 150 बैड के निर्माण का फांउडेशन बनाने, डाक्टर्स क्वार्टस, नर्सिंग क्वार्टस, मोर्चरी, जनरेटर सेट, लाँड्री स्टेशन, एसटीपी बीएमडब्यू डिस्पोजल आदि का निर्माण करवाने को कहा गया एवं इसके बाद भी अन्य और शर्तें भी एमओयू में सम्मिलित किए जा सकने का प्रावधान भी रखा गया। दानदाता को इन सभी के निर्माण सहित नया नक्शा 21 फरवरी तक प्रस्तुत करने को कहा गया एवं 21 फरवरी या 21 दिनों में नक्शा नहीं देने पर विभाग द्वारा नक्शा देने की बात तय की गई।
बैठक के बाद तेज हुआ संघर्ष, यूं चले दांव-पेंच।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 7 फरवरी को हुई बैठक के बाद ट्रॉमा सेंटर बनाने एवं नहीं बनाने देने के दांव-पेंच और तेज तो गए। उस बैठक में दानदाता परिवार की ओर से आर्किटेक्ट शामिल नहीं हुए थे एवं आर्किटेक्ट ने 10 फरवरी को चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक देवेन्द्र चौधरी से मुलाकात की। इसके बाद उनके बताए अनुसार संशोधन कर नए नक्शे लेकर आर्किटेक्ट 21 फरवरी को शाम करीब 5 बजे बीकानेर में संयुक्त निदेशक कार्यालय पहुंचे लेकिन उससे पहले ही संयुक्त निदेशक बीकानेर द्वारा निदेशक जयपुर को पत्र भेज कर नक्शे नहीं आने एवं दानदाता के निर्माण कार्य में रूचि प्रतीत नहीं होने बात कही गई। साथ ही राजकोष से श्रीडूंगरगढ़ ट्रॉमा सेंटर एवं उपजिला चिकित्सालय बनाने के लिए बजट आंवटन की अनुशंषा की गई। 21 फरवरी को शुक्रवार था एवं इसके बाद 22, 23 को अवकाश रहा। 24 फरवरी को सुबह दानदाता के आर्किटेक्चर ने पुन: संयुक्त निदेशक कार्यालय पहुंचे। 7 फरवरी व 10 फरवरी 2024 की बैठकों में दी गई समस्त शर्तों की शामिल करते हुए अपने नक्शे पेश कर दिए। इन नक्शों में नियमानुसार 81 कार पार्किंग की जगह 200 कार पार्किंग की शर्त देने एवं उस शर्त पर 240 कार पार्किंग देने, भूमिगत पार्किंग के साथ अन्य सभी निर्माण शर्तें शामिल कर लिए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद संयुक्त निदेशक द्वारा निदेशक जयपुर को दूसरा पत्र दिया गया एवं नक्शों को जयपुर भेजते हुए एमओयू लिए लिखा गया।
नई शर्तों में बढ़ा 7 करोड़ का व्यय, सहमत हुए दानदाता, लगाए जयपुर चक्कर, की कई बैठकें।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 24 फरवरी 2025 को सभी नई निर्माण शर्तों को मानते हुए दानदाता ने नया नक्शा पेश किया एवं यह नक्शा जयपुर भेजा गया। नई शर्तों में करीब 7 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार भी दानदाता पर आया और दानदाता ने इसके लिए लिखित में सरकार को अपनी सहमति भी दे दी। लेकिन इसके बाद मामले को होल्ड कर दिया गया। राज्य सरकार के अनुसार अब ट्रॉमा सेंटर का निर्माण 49 करोड़ रुपए की लागत से होगा एवं दानदाता यह लगाने के लिए तैयार है व निर्माण शुरू करवाने के लिए एमओयू करने की मांग कर रहा है। इस संबध में 24 फरवरी से 8 अप्रैल तक दानदाता के आर्किटेक्ट एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के मध्य कई बैठकें हुई व 8 अप्रैल को फाईनली दानदाता को 17 अप्रेल को एमओयू करने के लिए स्वयं उपस्थित होने के लिए बुलाया गया। चिकित्सा विभाग के 13 बड़े अधिकारियों की टीम दानदाता के साथ एमओयू करने के लिए गठित की जाती है। 17 अप्रैल को दोनों दानदाता परिवारों से सदस्य कोलकाता से जयपुर पहुंचतें है लेकिन एमओयू से ठीक पहले एक और अड़चन डाल दी जाती है। चिकित्सा विभाग के 13 अधिकारियों में से 12 द्वारा नक्शे पर हस्ताक्षर कर अनुमोदन कर दिया जाता है लेकिन 1 अधिकारी ने कमरों का साईज बड़ा करने, एक कमरे अटैच लैट-बाथ बनाने, थ्री फेस टयूबवैल बनाने, बिजली कनेक्शन लेने जैसी छोटी-छोटी नई शर्तें और डाल दी जाती है। दानदाता परिवार के सदस्यों द्वारा एमओयू के लिए ही कोलकाता से आने की बात कहते हुए ये आब्जेक्शन निर्माण के दौरान दूर कर देने का भरोसा भी दिलवाया जाता है लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद दानदाता परिवार के आर्किटेक्ट ने ये छोटे छोटे आब्जेक्शन दूर करते हुए 24 अप्रैल को जयपुर निदेशक को एक ओर नया नक्शा पेश कर दिया जाता है।
मई में हुए नक्शे अनुमोदित, अब जून में मांगी गारंटी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। दानदाता द्वारा ट्रॉमा सेंटर का निर्माण करवाने से मना करवाने के लिए चिकित्सा विभाग द्वारा लगातार दो वर्षों तक नित नई शर्तें लगाई गई, उन सभी को मान लेने के बाद 24 अप्रैल 2025 को दानदाता परिवार द्वारा फाईनल नक्शा पेश कर दिया गया। इस नक्शे में भी और अधिक नई शर्तें नहीं जोड़ पाने की स्थिति में चिकित्सा विभाग द्वारा 6 मई 2025 को दानदाता परिवार को पत्र देकर 13 मई को जयपुर पहुंचने एवं एमओयू करने के लिए फिर से बुलाया जाता है। दानदाता द्वारा स्वंय बार-बार जयपुर पहुंचने में असर्मथता जताते हुए अपने आर्किटेक्ट को बैठक के लिए अधिकृत किया। 13 मई को हुई बैठक में सभी 13 बड़ें अधिकारियों द्वारा नक्शों का अनुमोदन कर दिया जाता है एवं अब एमओयू होना ही शेष रह जाता है। लेकिन सरकार के पलड़े की और से अब भी कोई सक्रियता नहीं रखी गई व 13 अप्रैल से अब तक मामला नक्शे अनुमोदित होने के आगे नहीं बढ़ा है। वहीं दूसरी और स्थानीय स्तर पर राजनैतिक हलकों में भी मामला खासा खींच गया है। एक और जहां विपक्षी दल ट्रॉमा निर्माण में देरी के लिए विधायक का निजी आर्थिक स्वार्थ के आरोप लगाए गए है वहीं दूसरी और क्षेत्रीय विधायक ने दानदाताओं द्वारा सरकार को दिए गए शपथ पत्र, नक्शे के अनुसार निर्माण करवा पाने पर संशय जताते हुए 50 करोड़ की गांरटी भी अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मांगी गई।
मामले में सीएम और पूर्व सीएम की भी दखल, आखिर में हुए एमओयू के आदेश, पर अभी भी आदेश हुए हवा में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस पूरे प्रकरण में वर्तमान सीएम भजनलाल शर्मा एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की दखल भी हुई है। मुख्यमंत्री भजनलाल के पास इस प्रकरण को विधायक पक्ष द्वारा पहुंचाया गया है एवं जल्द से जल्द ट्रॉमा का निर्माण राजकोष से करवाने की मांग की गई है। वहीं गत 22 मई 2025 को बीकानेर से जयपुर जाते हुए श्रीडूंगरगढ़ रूकी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से आंदोलनकारियों ने मुलाकात कर केवल एमओयू के अभाव में कार्य लटके होने की शिकायत की। राजे ने मौके पर से ही कार्यकर्ताओं के सामने चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह से फोन पर वार्ता भी थी एवं 22 मई को ही वसुंधरा राजे के चिकित्सा मंत्री से वार्ता करने के दो घंटे में ही चिकित्सा विभाग द्वारा जयपुर से बीकानेर सीएमएचओ को दानदाता के साथ एमओयू करने के आदेश जारी कर दिए जाते है। जयपुर द्वारा एमओयू की शर्तें व पूरा परफार्मा भी बना कर भेजा जाता है। परंतु इन आदेशों की पालना किए जाने से पहले ही यह आदेश हवा में हो गए है। गत 22 मई को निदेशक चिकित्सा विभाग द्वारा जारी इस आदेश की पालना अभी तक बीकानेर सीएमएचओ द्वारा नहीं की गई है। अब एक और जहां दानदाता परिवार द्वारा चिकित्सा विभाग से हर रोज एमओयू करने के लिए मांग की जा रही है वहीं दूसरी और चिकित्सा विभाग द्वारा हर दिन आज-कल कह कर मामला और लंबा खींचा जा रहा है।
उपरोक्त सभी दस्तावेज श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के पास प्रमाणित प्रतिलिपियों के माध्यम से उपलब्ध है।



