






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जून 2025। अपने मन को वश में रखने वाला ही सफल व्यक्ति बन सकता है। दीक्षा एक परम विजय यात्रा है। जो इस विजय की साधना यात्रा में संलग्न होता है उसके लिए साधु जीवन जरूरी है। उसे मन को मुट्ठी में रखना होता है। ये प्रेरणा साध्वी प्रमिला कुमारी जी ने आड़सर के जैन भवन में दर्शनार्थ मुमुक्षु मोहक बेताला के अभिनंदन कार्यक्रम में उपस्थित जैन समाज के बंधुओं को दी। उन्होंने जीवन के प्रति सदैव सकारात्मक चिंतन करने की बात कही। साध्वी जी ने मुमुक्ष मोहक को आत्मनिष्ठ, सत्यनिष्ठ, गुरूनिष्ठ, संघनिष्ठ व मर्यादा निष्ठ होने का पंचामृत दिया। छोटी खाटू निवासी व भुवनेश्वर, उड़ीसा प्रवासी मात्र 18 वर्षीय मोहक बेताला अपने परिवार की सात्विक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दीक्षा ले रहें है। मोहक गुरूवार को आड़सर पहुंचे और अपनी मासी महाराज विज्ञाप्रभाजी सहित सभी साध्वी वृदों के दर्शन किए। मोहक के पिता विवेक बेताला ने बताया कि मुमुक्षु मोहक 10वीं की परीक्षा पास की है। 4 फरवरी 2025 को आचार्य महाश्रमण जी ने भुज में दीक्षा का आदेश दिया व आचार्य ही 3 सितंबर 2025 को कोबा, अहमदाबाद में दीक्षा देंगे। मोहक ने बताया कि उन्हें दीक्षा की प्रेरणा मुख्य मुनि महावीर कुमार से मिली है। वहीं उन्होंने बताया कि उनके पितृपक्षीय व मातृपक्षीय परिवारों में अनेक दीक्षित संत है। अभिनंदन कार्यक्रम का प्रारंभ साध्वियों द्वारा मंगलाचरण से किया गया। मोहक की बहन झलक ने उनका पूरा परिचय दिया। कार्यक्रम में आस्थाश्री जी, कन्यामंडल, महिला मंडल आड़सर, अणुव्रत समिति मोमासर के मंत्री राकेश संचेती, अशोक बरड़िया, मोहक की माता विज्ञा बेताला, अशोक सिंघी ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी विज्ञप्रभा जी ने किया। कार्यक्रम में मोमासर के धनराज पटावरी, बछराज बाफना, छोटूलाल सेठिया, काळीचरण पांडिया, प्रेम पटावरी व आडसर से बाबूलाल छाजेड्, नरेंद्र आरी, सुशील छाजेड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहें। राकेश संचेती ने बताया कि मुमुक्षु मोहक ने बुधवार को सरदारशहर में महाराज के दर्शन किए व गुरूवार को श्रीडूंगरगढ़ व आड़सर में दर्शन किए है। वहीं कल वे लाडनू पहुंचकर संघ निष्ठ साधु साध्वियों के दर्शन करेंगे।






