May 20, 2026
WhatsApp Image 2024-04-13 at 20.07.08

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 अप्रैल 2024। शनिवार को श्रीडूंगरगढ़ में भाजपा द्वारा किसान सम्मेलन आयोजित किया गया। कहने को तो यह किसान सम्मेलन था लेकिन इसके पीछे छिपा हुआ संदेश सीधा सीधा क्षेत्र के जाट वोटों को साधने का था। गत विधानसभा चुनावों में श्रीडूंगरगढ़ में माकपा एवं कांग्रेस के दोनों जाट प्रत्याशियों के बीच बराबरी का कड़ा मुकाबला रहा था। वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत दोनों नेताओं द्वारा एक होकर व इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी गोविंदराम मेघवाल के लिए वोट मांग जा रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ में जाट वोटों के धुव्रीकरण का अंदेशा लगाया जा रहा है एवं भाजपा का यह किसान सम्मेलन इसी धुव्रीकरण को रोकने का अस्त्र माना जा रहा है। पढ़ें इस सम्मेलन की कुछ अनकही और अनसुनी चर्चाएं।
चर्चा में रहे मिर्धा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शनिवार को हुए किसान सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा सोशल मीडिया पर अपने विवादित एवं हास्यापद बयानों के कारण ट्रेंड व ट्रोल होने वाले पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा की थी। भाजपा ने भी अपने प्रचार में इस सम्मेलन में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के पौत्र जयंत चौधरी के साथ साथ रिछपाल मिर्धा को भी इस सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होना बताया था। मौके पर भी मिर्धा के टोटके सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इन लोगों में ऐसे लोग भी शामिल थे जो विरोधी विचारधारा के होने के बाद भी केवल मिर्धा को रूबरू सुनने के लिए आए थे। लेकिन मिर्धा के नहीं आने से इन लोगों को खासी निराशा हुई। अनकही, अनसुनी यही है कि इस सम्मेलन में मिर्धा के आने के जितनी चर्चा थी उतनी ही चर्चा मिर्धा के नहीं आने की भी रही।
जाट नेताओं की मंच से दूरी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के किसानों में देश के किसान नेता रहें चौधरी चरणसिंह, कुंभाराम आर्य, देवीलाल चौटाला, दौलतराम सारण आदि का खासा क्रेज एवं सम्मान आज भी है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में किसान एवं जाट वोटों के धुव्रीकरण को रोकने के लिए भाजपा का दिवंगत चरणसिंह के पौत्र से भाजपा को सर्मथन की अपील करवाना एक हद तक सफल तो रहा परंतु मंच पर जाट नेताओं की दूरी भी खासी चर्चाओं में रही है। हालांकि मंच पर भाजपा नेताओं के रूप में कई जाट मौजूद रहें लेकिन अपने-अपने गांवों में जनप्रतिनिधि के रूप में चयनित होकर वोटों पर पकड़ वाले जाट नेताओं की दूरी चर्चाओं में है। यहां गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ खुलकर नजर आने वाले बिग्गा सरपंच जसवीर सारण हो या लिखमीसर दिखणादा के सरपंच प्रतिनिधि धूड़ाराम डेलू हो, या फिर इस लोकसभा चुनाव में भाजपा का दामन पकड़ने वाले बाना के पूर्व सरपंच भंवरलाल बाना, कितासर भाटियान के सरपंच प्रतिनिधि भंवरलाल पूनियां व बाडेला के पूर्व सरपंच तोलाराम ज्याणी आदि को मंच, माईक एवं लाईमलाईट से दूरी ही नसीब हुई। आज विश्व जाट दिवस भी है और वर्तमान में सरपंचाई करने वाले किसी भी जाट का मंच पर नहीं होना चर्चा में रहा है। सम्मेलन से पहले यह माना जा रहा था कि इस सम्मेलन में जाट नेताओं को महत्व देकर सक्रिय किया जाएगा। लेकिन मंच से उनकी दूरी की चर्चा अनकही अनसुनी ही रह गई और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बन गई है।
छिपी हुई मौजूदगी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गत चुनावों में जो जाट नेता अुर्जनराम मेघवाल के साथ खुल कर आए थे इस बार वे अपना छिपा हुआ सर्मथन देते नजर आ रहें है। गत विधानसभा चुनाव में संघ से जुड़े किसान संगठन के नेता के रूप में भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी रखने वाले किसान नेता की शनिवार को छिपी हुई मौजूदगी रही। अर्जुनराम मेघवाल के खास माने जाने वाले महर्षि दयानंद सरस्वती छात्रावास विकास समिति से जुड़े जाट नेता भी सीधे तौर पर तो शनिवार को अपनी मौजूदगी नहीं दिखाई परंतु उनकी छिपी हुई मौजूदगी चर्चा में रही है। इस सम्मेलन में सामान्यतया भाजपा से दूरी रखने वाले क्षेत्र के जाट नेताओं की केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल एवं राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी से नजदीकी बढ़ाने/दिखाने के लिए यह छिपी हुई मौजूदगी अनकही, अनसुनी के केंद्र में चर्चा का विषय बन गई है।