May 21, 2026
5-june

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 जून 2025। श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀ 05-Jun-2025
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि दशमी 02:18 AM
🔅 नक्षत्र हस्त पूर्ण रात्रि
🔅 करण तैतिल, गर 01:05 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग सिद्धि 09:12 AM
🔅 वार गुरूवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:36 AM
🔅 चन्द्रोदय 02:22 PM
🔅 चन्द्र राशि कन्या
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 07:27 PM
🔅 चन्द्रास्त 02:11 AM
🔅 ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 13:50:47
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत ज्येष्ठ
🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:04 PM 01:00 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:13 AM 11:09 AM
🔅 कंटक 03:46 PM 04:41 PM
🔅 यमघण्ट 06:32 AM 07:27 AM
🔅 राहु काल 02:16 PM 04:00 PM
🔅 कुलिक 10:13 AM 11:09 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 05:37 PM 06:32 PM
🔅 यमगण्ड 05:36 AM 07:20 AM
🔅 गुलिक काल 09:04 AM 10:48 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 शुभ 05:36 AM – 07:20 AM
🔅 रोग 07:20 AM – 09:04 AM
🔅 उद्वेग 09:04 AM – 10:48 AM
🔅 चल 10:48 AM – 12:32 PM
🔅 लाभ 12:32 PM – 02:16 PM
🔅 अमृत 02:16 PM – 04:00 PM
🔅 काल 04:00 PM – 05:44 PM
🔅 शुभ 05:44 PM – 07:28 PM
🔅 अमृत 07:28 PM – 08:44 PM
🔅 चल 08:44 PM – 10:00 PM
🔅 रोग 10:00 PM – 11:16 PM
🔅 काल 11:16 PM – 00:32 AM
🔅 लाभ 00:32 AM – 01:48 AM
🔅 उद्वेग 01:48 AM – 03:04 AM
🔅 शुभ 03:04 AM – 04:20 AM
🔅 अमृत 04:20 AM – 05:36 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 04:24 AM समाप्त: 06:19 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:19 AM समाप्त: 08:34 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 08:34 AM समाप्त: 10:54 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 10:54 AM समाप्त: 01:12 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 01:12 PM समाप्त: 03:28 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 03:28 PM समाप्त: 05:47 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 05:47 PM समाप्त: 08:06 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 08:06 PM समाप्त: 10:10 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 10:10 PM समाप्त: 11:53 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 11:53 PM समाप्त: 01:21 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 01:21 AM समाप्त: 02:47 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 02:47 AM समाप्त: 04:24 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺

गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।

गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यन्त फलदाई है।

🌼 विश्व पर्यावरण दिवस
🌼 गंगा दशहरा
गंगा दशहरा का दिन बहुत पुण्यदायक माना जाता है । वराह पुराण के अनुसार इसी दिन हस्त नक्षत्र में माँ गंगा श्री ब्रम्हा जी के कमंडल से निकालकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थी, इसी दिन भगीरथ माँ गंगा को पृथ्वी पर लाये थे इसीलिए इस को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है बहुत लम्बे समय के बाद गंगा दशहरा हस्त नक्षत्र में पड़ा है, इसलिए इस पर्व का और भी महत्व बढ़ जाता है। इस दिन लोग गंगा में नहाते है और दान पुण्य करते हैं।
वराह पुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी बुधवारी में हस्त नक्षत्र में श्रेष्ठ नदी स्वर्ग से अवतीर्ण हुई थी वह दस पापों को नष्ट करती है। इस कारण उस तिथि को दशहरा कहते हैं।
मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन अगर कोई मनुष्य माँ गंगा के जल में स्नान करता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
गंगा दशहरा के दिन जो माँ गंगा नदी तक नहीं पहुँच सकते, वह पास के किसी तालाब, नदी या जलाशय माँ गंगा का ध्यान करते हुये, अथवा घर पर ही जल में गंगा जल डालकर “ॐ नम: शिवाय , नारायणाय, दशहराये गंगाये नम:” मन्त्र का दस बार जाप करते हुए स्नान करे इससे समस्त शारीरिक, मानसिक और भौतिक पाप नष्ट होते है
इतना ही नहीं जो मनुष्य सौ योजन दूर से भी गंगाजी का स्मरण करता है, उसके सभी पाप दूर हो जाते हैं और वह अंत में विष्णुलोक को जाता है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026