






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 7 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।
माहौल अनुकुल तो सिद्धांत चरम पर, फौज डटी मोर्चे पर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। भारत के इतिहास का एक उज्ज्वल पन्ना सिद्धांतो की राजनीति का रहा है। यह आदर्श कथन तो सभी पार्टियां, सभी नेता अक्सर जनता के सामने कहते रहते है लेकिन सब कोई जानते है कि इस कथन में हमेशा बैंकों की ऋण योजनाओं की तरह छिपे हुए टर्म एंड कंडीशन भी लागू होती है। इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ में भी इस आदर्शवाद का बोलबाला देखा जा रहा है। गत चुनाव में क्षेत्र में सबसे ज्यादा लक्ष्मी विसर्जन करने के बाद भी परिणाम उल्टा सहने वाले एक प्रत्याशी ने इन पांच सालों में इतना सबक तो ले लिया कि चुनाव खर्च से नहीं कार्यकर्ताओं की फौज से लड़े जाते है। पांच सालों तक लगातार अपनी फौज तैयार की एवं इस बार जब एकजुटता के साथ पूरी फौज ने चुनावी रण का मोर्चा संभाल रखा है तो उन्हें माहौल बड़ा अनुकुल महसूस हो रहा है। अब जब माहौल अनुकुल हो तो सिद्धांत चरम पर होना भी स्वाभाविक है। सुनने में आया है की अनुकुल माहौल भांप कर अब लक्ष्मी विसर्जन एवं सोमरस का वितरण नहीं करने के सिद्धांत का कठोरता से पालन करने का संदेश सभी को दे दिया गया है। लेकिन टर्म एंड कंडिशन तो यहां भी लागू है क्योंकि माहौल तो माहौल है, जनाब कब बदल जाए क्या कहें कोई।
हंगामा क्यों है बरपा, प्रचार ही तो किया है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अकबर इलाहबादी के शब्दों एवं गुलाम अली के सुरों से सजी हुई गजल “हंगामा क्यों है बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है” तो सभी ने सुन रखी है ऐसे में शुक्रवार को यह गजल हंगामा क्यों है बरपा, प्रचार ही तो किया है के स्वर में गुंजा। हुआ कुछ यूं के विश्व की सबसे बड़ी पार्टी द्वारा अपने प्रचार में नुक्कड़ नाटकों के लिए टीमें भेजी गई है। शुक्रवार से इन टीमों ने श्रीडूंगरगढ़ शहर में बाजार सहित कई जगहों पर नुक्कड़ नाटक भी किए लेकिन इस दौरान कुछ ज्यादा ही जोश में आए संघर्षों वाली पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंच कर हंगामा कर दिया। हंगामा होते देख बाजार के व्यापारी एकत्र हो गए एवं हंगामे पर अपना विरोध दर्ज करवाया। मामला उल्टा पड़ता देख जोशीले कार्यकर्ता लौट तो गए लेकिन शहर में ऐसे हंगामे से उल्टा संदेश सीधे सीधे शहरवासियों तक पहुंच गया। अब शहरवासियों का यही सवाल है कि श्रीडूंगरगढ़ के स्वच्छ चुनाव के इतिहास में अब ऐसे प्रचार पर “हंगामा क्यों है बरपा”।
घर मजबूत तो जग मजबूत।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जो व्यक्ति अपने घर में मजबूत है वही तो अपने घर के सहयोग से जग में मजबूत हो पाएगा। “घर मजबूत तो जग मजबूत” कहावत इन दिनों खूब वायरल हो रही है और श्रीडूंगरगढ़ के चुनाव में अपने अपने घर में सभी मुख्य प्रत्याशी मजबूत दिख रहे है। अपने पैतृक गांव में शुक्रवार को कांग्रेस प्रत्याशी मंगलाराम गोदारा द्वारा दिखाई गई मजबूती ने भी नई चर्चा छेड़ दी है। इसी प्रकार भाजपा प्रत्याशी ताराचंद सारस्वत के पैतृक गांव गुंसाईसर बड़ा में वह भी खासे मजबूत दिखाई दिए। अब लोगों की निगाहें शनिवार को माकपा प्रत्याशी गिरधारीलाल महिया के पैतृक गांव में होने वाली उनकी सभा पर टिकी हुई है। और तो और शहर के मोमासर बास से प्रत्याशी प्रीति शर्मा के सर्मथन में भी हुई सभाओं में भी सर्वाधिक भीड़ उनके मोहल्ले में हुई सभा में ही दिखी थी। ऐसे में चर्चा यही है कि घर मजबूत तो जग मजबूत और श्रीडूंगरगढ़ में चुनावी घमासान भी मजबूती के साथ लड़ा जा रहा है।



