May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 जून 2024, डाइबिटीज (Diabetes) के मरीजों के साथ सिर्फ शुगर लेवल बढ़ने की ही नहीं, बल्कि शुगर लेवल कम होने की समस्या (Low Blood Sugar) भी हो सकती है। इस कंडिशन को हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। यह कंडिशन काफी गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। वैसे तो, शरीर में फास्टिंग शुगर लेवल 60 mg /dL से 100mg/dL नॉर्मल होता है और खाने के दो घंटे बाद का ब्लड शुगर लेवल 120mg/dL से 140mg/dL के बीच नॉर्मल होता है।

लेकिन यही शुगर लेवल अगर 70mg/dL के आस पास या नीचे जाने लगता है, तो इसे लो ब्लड शुगर लेवल की श्रेणी में गिना जाता है। हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षणों को पहचानकर व्यक्ति को तुरंत कुछ मीठा खिलाना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि स्थिति ज्यादा गंभीर न हो। कई बार यह समस्या सुबह उठने के बाद भी देखने को मिलती है, जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं, लो ब्लड शुगर लेवल (Low Blood Suagr Symptoms) के इन्हीं कारणों और लक्षणों के बारे में।

लो ब्लड शुगर लेवल के कारण

  • आहार में कमी होना, यानी जरूरत से कम खाना खाना
  • शारीरिक गतिविधियों में अचानक से वृद्धि होना
  • दवाओं के खुराक में वृद्धि होना
  • किसी अन्य बीमारी के कारण शुगर का होना

सुबह के वक्त दिखाई देने वाले लो ब्लड शुगर के लक्षण

ब्लड शुगर लेवल कम होने के लक्षण सिर्फ सुबह के समय ही नहीं, बल्कि अन्य किसी समय भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी होता है।

  • सुबह उठते ही सिर में भयंकर दर्द होना।
  • बहुत ज्यादा पसीना आना।
  • सोकर उठने पर मुंह का सूखा हुआ महसूस होना।
  • मतली और चक्कर आना।
  • आंखो से धुंधला दिखाई देना। इस समस्या का पूरे दिन बने रहना।
  • सुबह उठने पर बहुत अधिक पसीना आना।
  • सुबह के वक्त या पूरे दिन बेवजह शरीर में खुजली का होना।
  • रातभर सोकर उठने के बाद भी हर वक्त थकान महसूस होना।
  • किसी भी साधारण काम को करने पर कमजोरी महसूस होना।
  • बहुत अधिक भूख और प्यास महसूस होना। ये समस्या रात को भी हो सकती है।
  • प्राइवेट पार्ट में अचानक से खुजली होना।
  • शरीर पर हुए घावों का जल्दी ठीक न होना।
  • अचानक से वजन का कम होना।
डाइबिटीज एक साइलेंट किलर बीमारी है, जो अपने गिरफ्त में लेने के बाद धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाने लगती है। इसलिए इसके लक्षणों की समय रहते पहचान और उसका उपचार जरूरी है।