






कोरोना से दुनिया में अनगिनत लोग मरे। भारत में भी इस महामारी ने कईयों को अपना शिकार बनाया। हरेक भयभीत था। न इलाज, न संसाधन, न सार संभाल। भगवान भरोसे रहे कोरोना से संक्रमित। बस, डॉक्टर और उनके सहयोगी लक्षण के आधार पर मरीज को बचाने के लिए अपने को झोंके रहे। उनकी मदद समाज ने की, सरकारें तो अपने को बचाने में ज्यादा रही।
भारतीय लोकतंत्र में न्यायपालिका की मजबूत उपस्थिति न हो तो कोरोना से किसी के भी न मरने का दावा हो जाये। माननीय न्यायालय के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने कोरोना से मौत की गाइड लाइन जारी की है। महामारी के डेढ़ साल बाद। ये तो सांप निकलने के बाद लकीर पीटने का काम हुआ। वो भी जन दबाव और माननीय न्यायालय की कड़ाई के बाद। सरकार ने अब गाइड लाइन जारी कर कहा है कि कोरोना से मरने वाले के डेथ सर्टिफिकेट पर इस महामारी से मरने का जिक्र होगा। लोक लुभावन घोषणाएं तो सरकारों ने कर दी मगर महामारी से मरने वालों को लाभ डेथ सर्टिफिकेट पर कोरोना का जिक्र न होने से नहीं मिल पा रहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ये गाइड लाइन पहले भी जारी कर सकता था। मगर हमारे यहां तो प्यास लगने पर कुआं खोदने का रिवाज है।
कोरोना ने सत्ताओं की, जो अब तक केंद्र और राज्यों में रही है, उनकी पोल खोल दी। आजादी की 75 वीं वर्षगांठ देश मना रहा है मगर गांवों का सच ये है कि वहां न तो ऑक्सीजन है, न वेंटिलेटर और न मुक्कमल चिकित्सा का स्टाफ। ये चिंतनीय है। इस पर भी विचार होना चाहिए। देश ऑक्सीजन की कमी का तांडव भोग चुका है। अब तो सत्ताओं को जागना चाहिए।
सरकार ने सब गलत किया, ये भी नहीं है, कम किया ये मलाल है। पहले जब भी महामारी आई है तब दुनिया में उसकी वैक्सीन बनने में लंबा यानी सालों का समय लगा था, मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ। भारत ने इस मामले में अपनी दक्षता दुनिया को दिखाई और अपना लोहा मनवाया। इसे बड़ी उपलब्धि मानना चाहिए। वैक्सीन को लेकर देश में हुई राजनीति कोई अच्छी बात नहीं थी। हमें अपने वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, संस्थानों और इस काम को करने वाले सभी लोगों को सेल्यूट करना चाहिए। जो कमियां रही, उनको दूर करने के गंभीर प्रयास जरूर होने चाहिए। अतीत को साथ रख वर्तमान में वो काम करना चाहिए जो भविष्य को सुखद बना सके।
जो हुआ सो हुआ। जब जागें तभी सवेरा। किसी को कोसने से हल नहीं निकलेगा। देश और राज्यों को इस विपदा के बाद स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। एक दीर्घकालीन योजना पर काम करना चाहिए। इलाज और संसाधन के अभाव में तो देश का एक भी नागरिक न मरे। ये ही तो लोक कल्याणकारी राज्य का धर्म है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



