






रेलवे, हवाई सेवा, एलआईसी, पेट्रोल, डीजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अनगिनत क्षेत्रों में निजीकरण प्रभावी होना इस बात का द्योतक है कि भारतीय अर्थ व्यवस्था अब अपना मूल मिश्रित समाजवादी रूप बदल रही है। जिसे अर्थ शास्त्री तो सही नहीं मानते। पर राजनीतिक निर्णय कभी अर्थ शास्त्रियों से पूछ के नहीं लिए जाते, ये तो इतिहास बताता है। तभी तो देश बेरोजगारी, जीडीपी गिरना, विकास दर घटना, महंगाई दर बढ़ना जैसी समस्याओं से सदा घिरा रहता है।
इस हालत में भी राजनीति लोक लुभावन नारे देकर आम आदमी को भ्रमित करती रहती है और वो संकट में घिरता जाता है। समाजवाद और पूंजीवाद, सदा आमने सामने रहे ही है। वर्तमान में भी ये स्थिति बनी हुई है।
दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया तो भारत ही नहीं दुनिया ने इसका स्वागत किया था और इसे क्रांतिकारी आर्थिक निर्णय की संज्ञा दी थी। जनता को इसका लाभ भी हुआ, सेवाओं का विस्तार हुआ जो लाभदायी साबित हुआ। मगर बैंककर्मी दो दिन की हड़ताल कर चुके हैं, वजह बैंकों के निजीकरण के प्रयास हैं। अर्थ शास्त्रियों की भविष्यवाणी है कि बैंकों का निजीकरण हो सकता है। इससे जनता को अधिक सेवा शुल्क देना पड़ेगा और रिस्क भी बढ़ेगा। ये जनता की जेब पर भार ही बनेगा। किसान तो अभी आंदोलन करके हटे ही हैं, वजह निजीकरण का प्रयास ही तो था।
आज अखबार की एक खबर चकित करने वाली है। इस खबर में ये आशंका जताई गई है कि केंद्र सरकार ने वर्क फ्रॉम होम करने वाले कर्मचारियों के सेलरी स्ट्रेक्चर में बदलाव करने की छूट कम्पनियों को दी है। जबकि सब जानते है कोविड 19 ने ही वर्क फ्रॉम होम की कल्चर को डवलप किया था, मजबूरी में।
खबर के अनुसार अब कर्मचारियों के हाउस रेंट एलाउंस में कटौती हो सकती है। जबकि बिजली, इंटरनेट, मोबाइल रिचार्ज रिम्बर्समेंट में बढ़ोतरी होगी। मगर ये बढ़ोतरी कर्मचारी के लिए नुकसान वाली होगी, क्योंकि टैक्स अधिक चुकाना पड़ेगा।
इस खबर में ये भी आशंका जताई गई है कि श्रम मंत्रालय कर्मचारियों व कंपनियों की सेवा शर्तों को फिर से परिभाषित करने के लिए आदेश जारी कर सकता है। ये होता है तो निजीकरण को ही मजबूती मिलेगी। निजीकरण को आम आदमी फायदेमंद नहीं मानता। आने वाला समय आर्थिक बदलावों का होगा, ये तो सरकार की गतिविधियों से लगने लग गया है। अर्थ शास्त्री इसी को लेकर चिंतित भी नजर आ रहे हैं।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



