May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 जुलाई 2020। राजस्थान के जैसलमेर में एक चमत्कारी पत्थर है जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ बिना जावन के दही जमा देता है। यह भी बताया जाता है कि इस पत्थर को पीने के पानी वाले बर्तन में रखने से व उस पानी के सेवन से भी कई शारिरिक बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

दही जमाने के लिए लोग अक्सर जामन ढूंढ़ते नजर आते हैं। वहीं जैसलमेर जिले में स्थित हाबूर गांव में जामन की जरूरत नहीं पड़ती है। यहां हाबूर पत्थर है जिसके संपर्क में आते ही दूध जम जाता है। इस पत्थर पर विदेशों में भी कई बार रिसर्च हो चुकी है। और फॉरेनर यहां से इस पत्थर के बने बर्तन ले जाते है।
हाबूर गांव का पत्थर अपने आप में विशिष्ट खूबियां समेटे हुए है। इसके चलते इसकी डिमांड निरंतर बढ़ती जा रही है। हाबूर का पत्थर दिखने में तो खूबसूरत है ही, साथ ही उसमें दही जमाने की भी खूबी है। इस पत्थर का उपयोग आज भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध को जमाने के लिए किया जाता है। कहा जाता है कि जैसलमेर पहले अथाह समुद्र हुआ करता था और कई समुद्री जीव समुद्र सूखने के बाद यहां जीवाश्म बन गए व पहाड़ों का निर्माण हुआ। विदेशों में हुए रिसर्च में ये पाया गया है कि इस पत्थर में एमिनो एसिड, फिनायल एलिनिया, रिफ्टाफेन टायरोसिन हैं और ये कैमिकल दूध से दही जमाने में सहायक होते हैं। इसलिए इस पत्थर से बने कटोरे में दूध डालकर छोड़ देने पर दही जम जाता है। तैयार दही शानदार होता है जो स्वाद में मीठा और सौंधी खुशबू वाला व स्वास्थ्यवर्धक होता है। इस गांव में मिलने वाले इस स्टोन से बर्तन, मूर्ति और खिलौने बनाए जाते हैं। ये हल्का सुनहरा और चमकीला होता है। इससे बनी मूर्तियां लोगों को खूब अट्रैक्ट करती है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यह पत्थर कई आकार में मिलता है जिसे आजकल लोग उपयोग में ला रहे है।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। हाबूर पत्थर के बर्तन में जमा बिना जावन के दही।