






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 मार्च 2024। विश्नोई समाज के अराध्य देव जंभेश्वर महाराज ने प्रति गृहस्थी के लिए वर्ष भर में एक बार जागरण का आयोजन रखने का संदेश दिया। स्वयं जांभोजी ने जसरासर के बाजोजी जाट के घर 508 वर्ष पूर्व जागरण कर जागरण परंपरा की स्थापना की। इसी परंपरा को अनवरत आगे बढ़ाने का संकल्प समाज का हर व्यक्ति करें। ये आह्वान मुकाम धाम के पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद जी ने गांव सांवतसर में किया। गांव के श्रीजंभेश्वर मंदिर से गुरूवार रात घर घर जागरण अभियान का शुभारंभ किया गया। आज सुबह मंदिर प्रांगण में हवन पाहल का आयोजन हुआ। जागरण में बड़ी संख्या में विश्नोई समाज के लोगों ने भाग लिया। श्रीजंभेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्थान, राजस्थान के तत्वाधान में अभियान की मुहिम प्रारंभ की गई है। संस्थान के अध्यक्ष नागौर के रामरतन सिंगड़ ने बताया कि 9 मार्च शिवरात्रि को अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के मंच से मुकाम में इस मुहिम के लिए समाज से आह्वान किया गया जिसे समाज के लोगों का खासा समर्थन मिल रहा है। जागरण के नियम भी परंपरा के अनुसार ही रखे गए है। आज के समय में जागरण करवाना इतना महंगा हो गया कि आम गृहस्थी इसे करवाने से बचने लगा है। हमने विश्नोई समाज के हर एक परिवार के लिए नियम बनाया कि जांभोजी के वचनानुसार जागरण में निमंत्रण देकर किसी रिश्तेदार को नहीं बुलाना, चाय या भोजन की व्यवस्था नहीं करनी है, केवल लोक वाद्य यंत्र हारमोनियम, ढोलक व मजीरा की ताल के साथ ही भजन गाने होंगे। किसी भी तरह के इलेक्ट्रानिक यंत्रो का प्रयोग नहीं किया जाएगा। साउंड सिस्टम भी परिसर में सुनने लायक क्षमता का ही लगाना होगा जिससे ध्वनि प्रदूषण ना हो और पर्यावरण संरक्षण हो। जागरण के पश्चात केवल पांच या सात कन्याओं को ही भोजन करवाना होगा। जागरण में समराथल धोरा के संत विष्णुदासजी, संगठन के प्रदेश सांस्कृतिक मंत्री रामगोपाल, भजन मंडली सांवतसर ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। संगठन के तहसील अध्यक्ष शिवकैलाश विश्नोई ने बताया कि आगामी एक वर्ष में जागरण के नियमावली के तहत समाज के हर घर में जागरण के आयोजन किए जाएंगे। जिससे प्रति परिवार मे जागरण हो सकें। इस दौरान विभिन्न समाजों के लोगों ने जागरण की आचार संहिता बनाने की इस सकारात्मक पहल का स्वागत किया व डीजे व तेज आवाजों के बीच भजन का महत्व खो जाने की बात कहते हुए हर समाज के लिए इसे प्रेरणीय बताया। इस दौरान सांवतसर के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहें।




