May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 मार्च 2024। होली भारतीय संस्कृति का प्रमुख पर्व है। लौकिक पर्वों में मनोरजन भी एक प्रमुख तत्व होता है। इसे हंसी-खुशी, मोज-मस्ती से मनाया जाता है। अध्यात्म की दृष्टि से यह हर्ष और आनन्द का पर्व है, चित्त शोधन का पर्व है। हम दृढ़ संकल्पों के साथ रंगो का ध्यान करें। हर व्यक्ति का अपना एक आभा मण्डल होता है। रंगों के ध्यान से आभामंडल तेजस्वी होता है। यह दु:खों को मिटाने वाला पर्व है। शुभ भाव शुभ लेश्या का ध्यान करें। आज आपने सुना होगा अनेक प्रकार की कलर थेरेपी के प्रयोग चल रहें है। रंगो के ध्यान से व्यक्ति प्रतिदिन प्रसन्न रहें, शांत रहें, आनन्दित रहें। आज होली के दिन मन में संकल्प करें, हम कभी दु:खी नहीं बनेंगे, शोक नहीं करेंगे, संताप नहीं करेंगे, तनाव में नहीं जीएंगे, हमारी प्रसन्नता अखण्ड रहे। इस होली आवेश व आवेग की होली जलाएं, नकारात्मक भावों की होली जलाएं, भीतर के अवगुणों का दहन करें और सबसे जरूरी जीवन में शान्ति के रंगों को अंगीकार करें। यह ऋतु वसंत है। इस ऋतु में जिस प्रकार प्रकृति का रूप बदलता है, रंग बिरंगे फूल खिलते हैं, नई उमंग, नई तरंग, नया उल्लास छा जाता है। उसी प्रकार हमारे भीतर में शुभ भावों के फूल खिलें, सद्भावना, सदाचार, प्रेम, स्नेह के साथ मैत्री व विश्वास की वसंत खिलें।
होली पर आमोद प्रमोद इतना की कोई कुछ भी कहे तो भी बुरा न मानो होली है, कहकर उपेक्षित कर देने की परंपरा है। लोक परम्परा में होली का महत्त्वपूर्ण स्थान है। लोक परंपरा में होली का महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय संस्कृति की सुरक्षा हेतु लौकिक पर्वों की परंपरा चली आ रही है। जन जन में इसके प्रति पूर्ण आकर्षण है। ये रंगो को त्योहार है और विभिन्न रंगो के साथ खेला जाता है। खेलने वाले एक दूसरे पर रंग गुलाल पानी आदि डालते है। रंग अनेक प्रकार के होते है कईयों में घातक रसायन भी मिले हुए आते है। जो शरीर के लिए हानिप्रद असर भी डालते है। अब सबसे अधिक ध्यान दिए जाने वाली बात ये है कि जल है तो कल है। जैन संस्कृति में जल के दुरूपयोग के लिए सर्वथा मनाही है। परंतु आज के समय व घटते भूजल को देखते हुए आमजन को जल के दुरुपयोग से बचना चाहिए। व्यक्ति को विचार व विवेक शल होकर चिंतन करना चाहिए कि जल का अपव्यय ना हो अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ीयां भी हमें ही कोसेगी। आज हमें उनके लिए आदर्श प्रस्तुत करने की आवश्यकता है जिससे वे जीवन के सही मूल्यों को समझ सकें। दुरूपयोग से कीचड़ होता है जिसमें मच्छर आदि जीवों की उत्पत्ति होती है, ये हिंसा है। हर व्यक्ति के जीवन में पानी का संयम होना चाहिए।
“खुशियों की सौगात लेकर यह पर्व आया है, रंगों का त्योहार रंगीला नया उल्लास छाया है, केवल हंसी खुशी, मोज मस्ती ही नहीं शान्ति सुख आनन्द की नई बहार लाया है।“