May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 मई 2024। स्वर्णकार समाज में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा आज भी जीवन का अधूरा स्वप्न बन कर रह जाता है। ऐसे में इस समाज की दिव्या सोनी ने 2021 आरएएस परीक्षा में पूरे राजस्थान में 16वां स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र को, हर एक महिला को गौरवान्वित किया है। दिव्या को श्रीडूंगरगढ़ की पहली महिला एसडीएम बनने का गौरव मिला है। दिव्या को शुक्रवार शाम ओटीएस, जयपुर में ट्रेनिंग के लिए पत्र मिल गया है। क्षेत्र वासियों का अनुमान है कि दिव्या पहली महिला एसडीएम ही नहीं वरन पूरे क्षेत्र में पुरूष व महिला दोनों वर्गों में ही प्रथम एसडीएम बनी है। जानकारों ने बधाई का तांता लगा दिया है और परिवार में उत्सव का माहौल है। दिव्या ने टाइम्स को बताया कि शुरू से ही उन्होंने यही लक्ष्य बनाया था और आखिर उसे हासिल कर ही लिया है। दिव्या ने अपनी इस स्वर्णिम सफलता का श्रेय अपने पिता राजेन्द्रप्रसाद सोनी व माता निर्मला सोनी सहित अपने दादा हनुमानप्रसाद सोनी व नाना माणकचंद सोनी बीकानेर को दिया है। बता देवें उन्होंने 2019 की आरएएस परीक्षा में 401 रैंक हासिल कर आबकारी अधिकारी की पोस्ट पाई थी। इस बार उन्होंने 16वीं रैंक लाकर प्रापर उपखंड अधिकारी पोस्ट हासिल कर ली है।

लक्ष्य के प्रति अडिग, परिवार की पहली स्नातक, क्षेत्र की पहली एसडीएम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स।
दिव्या के पिता राजेन्द्र ने बताया कि वे अपने लक्ष्य के प्रति अडिग है और उसके लिए चाहे कितनी ही मेहनत करनी पड़े वे पीछे नहीं हटती है। दिव्या ने बताया कि पढ़ाई के दौरान अनेक उतार-चढ़ाव आए परंतु परिवार ने सदैव उनका साथ दिया। उनकी माता निर्मला सोनी ने बेटी पर गर्व जताते हुए कहा कि बेटी ने जी-जान लगाकर मेहनत की है और सैंकड़ो बालिकाओं के लिए उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। दिव्या ने मुस्कुराते हुए बताया कि उनके पिता परिवार के पहले स्नातक थे और रेलवे के बीकानेर मंडल में यातायात निरीक्षक पद पर कार्यरत है और मैं भी परिवार में पहली स्नातक बालिका थी और मैंने भी अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है।

गांव में ही स्कूली पढ़ाई, लगातार अध्ययन ने दिलवाई सफलता।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स।
दिव्या ने टाइम्स को बताया कि नियमित अध्ययन की आदत के साथ रिवीजन ने उन्हें सफलता दिलवाई है। उनकी स्कूली शिक्षा 10वीं तक हिंदी माध्यम स्कूल में हुई और 12वीं ब्राइट फ्यूचर सीनियर सैंकडरी अंग्रेजी माध्यम स्कूल से की जिससे हिंदी व अंग्रेजी दोनों विषय अच्छे हो गए। जैन कन्या कॉलेज बीकानेर से बीसीए व एमएसी किया परंतु लक्ष्य सदैव प्रशासनिक सेवा का ही रहा। दिव्या ने बताया कि उनके सामाजिक ताने-बाने में जहां लड़कियों का पढ़ना मुश्किल मार्ग है। वहीं उनके दादा हनुमानमल सोनी ने उनका सपना पूरा करने की अनुमति देकर इस मुकाम पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बताया कि उनके नाना माणकचंद सोनी, बीकानेर शिक्षा के प्रति बड़े जागरूक थे। बीकानेर में शिक्षा के दौरान उन्होंने लगातार पढ़ने के लिए प्रेरित किया। तीन भाई-बहनों में बड़ी दिव्या के भाई बहन उन्हें ही अपनी प्रेरणा मानते है।