May 20, 2026
26-feb

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 फरवरी 2025। पढें आज का पंचांग।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का ​ पंचांग 📜

☀ 26-Feb-2025
☀ Sri Dungargarh, India

☀ आज का पंचांग
🔅 तिथि त्रयोदशी 11:11 AM
🔅 नक्षत्र श्रवण 05:24 PM
🔅 करण वणिज, विष्टि 11:11 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग परिघ 02:57 AM
🔅 वार बुधवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:02 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:34 AM
🔅 चन्द्र राशि मकर 04:38 AM
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 06:32 PM
🔅 चन्द्रास्त 04:48 PM
🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 काली सम्वत 5125
🔅 दिन काल 11:29:38
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत माघ
🔅 मास पूर्णिमांत फाल्गुन
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:24 PM 01:10 PM
🔅 कंटक 05:00 PM 05:46 PM
🔅 यमघण्ट 09:20 AM 10:06 AM
🔅 राहु काल 12:47 PM 02:13 PM
🔅 कुलिक 12:24 PM 01:10 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 07:48 AM 08:34 AM
🔅 यमगण्ड 08:28 AM 09:54 AM
🔅 गुलिक काल 11:20 AM 12:47 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 लाभ 07:01 AM – 08:27 AM
🔅 अमृत 08:27 AM – 09:54 AM
🔅 काल 09:54 AM – 11:20 AM
🔅 शुभ 11:20 AM – 12:46 PM
🔅 रोग 12:46 PM – 02:13 PM
🔅 उद्वेग 02:13 PM – 03:39 PM
🔅 चल 03:39 PM – 05:05 PM
🔅 लाभ 05:05 PM – 06:32 PM
🔅 उद्वेग 06:32 PM – 08:05 PM
🔅 शुभ 08:05 PM – 09:39 PM
🔅 अमृत 09:39 PM – 11:13 PM
🔅 चल 11:13 PM – 00:46 AM
🔅 रोग 00:46 AM – 02:20 AM
🔅 काल 02:20 AM – 03:54 AM
🔅 लाभ 03:54 AM – 05:27 AM
🔅 उद्वेग 05:27 AM – 07:01 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 06:23 AM समाप्त: 07:54 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:54 AM समाप्त: 09:17 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 09:17 AM समाप्त: 10:53 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:53 AM समाप्त: 12:50 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 12:50 PM समाप्त: 03:04 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 03:04 PM समाप्त: 05:25 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 05:25 PM समाप्त: 07:42 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 07:42 PM समाप्त: 09:58 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 09:58 PM समाप्त: 00:17 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 00:17 AM समाप्त: 02:36 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 02:36 AM समाप्त: 04:40 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 04:40 AM समाप्त: 06:23 AM

आप सभी को महाशिवरात्रि के महा पर्व की हार्दिक शुभकामनायें, 🚩हर हर महादेव

आज महाशिवरात्रि का महापर्व है, यह पर्व फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है ।

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के प्रारम्भ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान भोलेनाथ लिंग के रूप में प्रकट हुए थे , भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था ।

प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए पूरे ब्रह्मांड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से भस्म कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि भी कहा गया है । माना जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ सभी जातको को अवश्य ही करना / सुनना चाहिए। महाशिवरात्रि की रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ करने सुनने से जीवन के समस्त घोर से घोर संकट दूर होते है, सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती है ।
महाशिवरात्रि के दिन प्रात: स्नान करके सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें । उसके बाद मंदिर में उत्तर की तरफ मुँह करके भगवान भोलनाथ के शिवलिंग का पंचामृत, / दूध, दही, घी, गंगाजल, शहद, गन्ने का रस, अनार का रस आदि से अभिषेक करें ।
शिवलिंग पर बेल पत्र, शमी पत्र, भांग, धतूरा, काले तिल, अक्षत, सफ़ेद पुष्प, गन्ने के टुकड़े, नारियल, बेर, सफ़ेद मिठाई चढ़ाएं तत्पश्चात सफ़ेद चन्दन से त्रिपुण्ड बनायें, या शिवलिंग पर तिलक लगाएं ।

फिर वहीँ बैठकर शिवरक्षा स्त्रोत्र का पाठ करें, ॐ नम: शिवाये एवं श्री शिवाये नमस्तुभ्यम की माला का जाप करें । शिवरात्रि के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र का जाप घोर से घोर संकटो को दूर करने वाला माना गया है ।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ||

धार्मिक मान्यता है कि शिवरात्रि को शिव जगत् में विचरण करते है और जो जातक शिवरात्रि की रात्रि में जाग कर भगवान भोले नाथ की आराधना करते है उनपर शिव शम्भु की असीम कृपा बरसती है । शिवरात्रि समस्त मनुष्यो के लिए महान उपलब्धि प्राप्त करने का दिन भी है ।

चूँकि शिवरात्रि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है । इसी लिए मान्यता है कि जो लोग इस दिन भगवान शंकर की आराधना करते है, वह परम भाग्यशाली बनते है ।

वैसे तो प्रत्येक हिन्दू का शिवरात्रि का ब्रत अवश्य ही रखना चाहिए लेकिन अगर आप ब्रत ना भी रख पाएं तो शिवरात्रि के दिन फलाहार, सात्विक भोजन ही करना चाहिए । इस दिन माँस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि तामसी चीज़ो का भूल कर भी सेवन नहीं करना चाहिए ।

महाशिवरात्रि के दिन अपनी इन्द्रियों को अवश्य ही वश में रखें, इस दिन क्रोध, हिंसा, सहवास आदि से भी बिलकुल दूर रहना चाहिए ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026