






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स फरवरी 2021। श्रीडूंगरगढ़ में भाजपा के पास बहुमत के बाद भी यहां पालिकाध्यक्ष पद पर पेच फंसता नजर आ रहा है। कौन बनेगा पालिकाध्यक्ष की चर्चाओं के बीच अब यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि राज्य सरकार द्वारा पहली बार लागू किए गए पालिकाध्यक्ष के लिए हाईब्रिड नियम की मिसाल श्रीडूंगरगढ़ में ही देखने को मिल सकती है। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के सभी पाठको के बता दें कि हाईब्रिड नियम के तहत पालिकाध्यक्ष पद पर 40 पार्षदों के अलावा कोई भी सामान्य नागरिक भी पालिकाध्यक्ष बन सकता है। इसमें जरूरी केवल यही होगा कि वह व्यक्ति किसी लाभ के पद पर ना हो एवं वह पार्षद बनने की समस्त योग्यतांए पूरी करता हो। इन चुने हुए 40 पार्षदों में से कोई भी एक पार्षद उस व्यक्ति का प्रस्तावक बन सकता है एवं वह व्यक्ति पालिकाध्यक्ष चुनाव में योग्य माना जाएगा। इन 40 पार्षदों द्वारा वोटिंग की जाएगी एवं बहुमत मिले तो वह व्यक्ति पालिकाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित हो सकेगा। इस नियम के यह भी शामिल किया गया है कि पार्षद के अलावा सामान्य नागरिक के पालिकाध्यक्ष बनने की स्थिति में उसे पांच सालों में चुनाव लड़ना भी जरूरी नहीं होगा। यानी के बिना पार्षद बने पालिकाध्यक्ष पद पर ही पांच सालों के लिए रह सकता है। भाजपा के अंदर ही अंदर किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में सर्वमान्य बाहरी व्यक्ति को भी पालिकाध्यक्ष के रूप में मैदान में उतारा जा सकता है। और अब कस्बे में चारों और यही चर्चा चल पड़ी है। विदित रहे कि भाजपा के अंदर ही पालिकाध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार होने के कारण पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता एवं वोटर को यही डर सता रहा है कि कहीं इस चुनाव में भी वही ना हो जाए जो प्रधानी के चुनाव में हुआ था। उस समय भी बहुमत से दूर कांग्रेस ने भाजपा-माकपा के बहुमत में सेंध लगा ली थी एवं इस बार भी कांग्रेस अपनी पूरी तैयारी के साथ बहुमत से काफी दूर होने के बाद भी अपने 14 पार्षदों की बाडेबंदी किए हुए बैठी है। ऐसे में सेंधमारी के डर से यह भी संभव हो सकता है कि पार्टी सर्व सम्मति से हाईब्रिड नियम को अपना कर किसी अन्य नेता को पालिकाध्यक्ष पद के लिए उतार देवें।



