






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 मार्च 2021। कंप्यूटर विजन सिंड्रोम- नाम सुनकर ऐसा लग रहा होगा कि यह कंप्यूटर पर अधिक देर तक काम करने की वजह से आंख या दृष्टि से जुड़ी समस्या है. लेकिन इसमें आपके शरीर और सेहत से जुड़ी और भी कई दिक्कतें शामिल हैं और समय पर इलाज न कराने पर परेशानी बढ़ भी सकती है. इन दिनों कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) की वजह से बच्चों का स्कूल, बड़ों का ऑफिस सब कुछ घर से ही चल रहा है और इस वजह से लोगों के स्क्रीन टाइम (Screen Time) में काफी इजाफा हुआ है. साल 2020 के आंकड़ों की मानें तो भारत में औसतन हर व्यक्ति रोजाना कम से कम 7 घंटे स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर या टैबलेट जैसे गैजेट्स का इस्तेमाल (Gadgets Use) करता है.
डिजिटल स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल करने से CVS का खतरा
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (CVS) को डिजिटल आई स्ट्रेन भी कहा जाता है क्योंकि इसमें आंखों पर बहुत अधिक जोर पड़ता है. इसके अलावा सिर दर्द (Headache), गर्दन में दर्द (Pain in neck) और कंधे में दर्द (Pain in shoulder) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन (AOA) की मानें तो अगर कोई व्यक्ति रोजाना 2 घंटे या इससे अधिक समय तक लगातार कंप्यूटर या किसी अन्य डिजीटल स्क्रीन का इस्तेमाल करता है तो उसे डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूर विजन सिंड्रोम होने का खतरा अधिक होता है.
कंप्यूर विजन सिंड्रोम के लक्षण
– आंखों पर जोर पड़ना, किसी चीज को देखने के लिए बहुत जोर लगाना
– आंखों में खुजली होना
– आंखों में सूखापन महसूस होना (Dry Eyes)
– धुंधला दिखायी देना
– डबल विजन (हर चीज दोहरी दिखना)
– फोकस करने में दिक्कत होना
– निकट दृष्टि दोष या मायोपिया
– सिर में दर्द
– गर्दन में दर्द या अकड़न महसूस होना
– कंधे में दर्द होना
– पीठ में दर्द
इन कारणों से होती है यह समस्या
– डिजिटल स्क्रीन यूज करते वक्त लाइट सही न होना, कम रोशनी में स्क्रीन देखना
– स्क्रीन पर बहुत अधिक रोशनी पड़ने के कारण स्क्रीन का चमकना
– स्क्रीन को आंखों से जितनी दूर होना चाहिए उससे कम दूरी पर रखना
– गैजेट्स या डिजिटल स्क्रीन का उपयोग करते वक्त बैठने का पॉस्चर सही न होना
– स्क्रीन के बहुत नजदीक या बहुत दूर होना
– लगातार बिना ब्रेक लिए स्क्रीन की ओर देखते रहना




