






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 अप्रैल 2022। शनिवार को गांव कल्याणसर में 250 से ज्यादा किसान उत्साह के साथ मदद के मेले में भागीदार बने। ज्यादा से ज्यादा मेहनत करने की आवाजे लगाते युवा, गीत गाते गाते श्रमदान करती महिलाएं, आपसी सहयोग से भोजन बना कर प्रसाद लेकर पूरे खेत की फसल कटाई एक ही दिन में कर देने का इतिहास बनाते ग्रामीण। यही प्रेरणीय दृश्य सब देखने को मिला गांव कल्याणसर में। जहां दो दिन पहले हुए बड़े अग्निकांड ने मौत का तांडव मचाते हुए 18 से अधिक अनबोल पशुओं की जान ली थी और व्यापक तबाही मचाई थी। गांव कल्याणसर के किसान कोजूराम के खेत मे अग्निकांड की बड़ी घटना के बाद पूरे गांव की सहानुभूति उसके साथ रही और उसी दिन सड़क जाम कर मुआवजे की मांग भी प्रशासन से की थी। लेकिन ग्रामीण यह भी जानते है कि सरकारी सहायता तो मिलेगी जैसे ही मिलेगी, तो ग्रामीण शनिवार को खुद आगे आये और सहकारिता का अनुपम उदाहरण देते हुए बड़ी संख्या में शनिवार को कोजूराम के खेत मे पहुंचे। ग्रामीणों ने कोजूराम के कुंए पर करीब 30 बीघा में गेंहू, सरसों, चने ओर इसबगोल की पकी हुई फसल की कटाई एक दिन में ही कर डाली। एक सबके लिए ओर सब एक के लिए, इस सहकारिता का सजीव उदाहरण नववर्ष के दिन क्षेत्र के लिए नई प्ररेणा है। कोजाराम ने नम आंखो से ग्रामीणों का आभार जता रहा है। कोजूराम के खेत मे श्रमदान करने वाले 250 से अधिक लोगो मे ग्रामीण, पड़ौसी, मित्र, रिश्तेदार शामिल हुए। कुछ तो जाखासर सहित आसपास के गांवो से इस मदद के मेले में शामिल होने कोजूराम के खेत पहुंचे। इस मदद मेले में शामिल होने के इच्छुक श्रमदानियों को गांव से कोजूराम के खेत तक आने जाने की सेवा भी गांव के गाड़ी वाले किसानों ने दी। ऐसा विरला सहयोग कोजाराम जीवनभर नहीं भूल सकेंगे।
ग्रामीणों ने निभाई जिम्मेदारी, अब शासन, प्रशासन और भामाशाहों की बारी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। एक दूसरे के सुखः दुःख में शरीक रह कर सामूहिकता की भावना ही गांव की आत्मा है और शहर के लोग इस भावना से शून्य होने के कारण ही एकाकी जीवन जीते है। इस सामूहिकता की भावना का सजीव उदाहरण गांव कल्याणसर के ग्रामीणों ने तो दे दिया है और अब क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और भामाशाहों की बारी है। विदित रहे कि कोजूराम के खेत मे लगी आग ने गायो, भैंसों ओर भेड़ो सहित 18 पशुओं की जान ले ली थी और लाखों रुपये का समस्त घरेलू सामान, अनाज, चारा सभी जल कर खाख हो गया था। अब आवश्यकता है कि जनप्रतिनिधि अपना फर्ज निभाते हुए कोजूराम की मदद के लिए आगे आएं और प्रशासन भी उचित मुआवजा दिलवाए। साथ ही समय समय सहयोग के लिए आगे आने वाले भामाशाहों से भी अपेक्षा है कि कोजूराम का साथ दे।




