






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 अक्टूबर 2022। हमारे क्षेत्र में ऐसे हुनरमंद भी है जो राजस्थान के कल्चर को सहेजने के साथ नेकदिली से अपने हुनर को बांटने व लोगों का घर सजाने का काम कर रहें है। आप भी इस दिवाली के त्योहार पर अपने क्षेत्र के तीन हुनरमंदो को जाने जिनकी कला को हाल ही में अनेक सैलानियों ने सराहा है। गांव मोमासर के 60 वर्षीय बुजुर्ग गोपाल प्रजापत बैठने के लिए पीढ़े, लकड़ी के पलंग व छोटी कुर्सियां रंग बिरंगी डिजायन डाल कर सजाने का हुनर रखते है। मोमासर में लगे हाट बाजार में एक किनारे पर झोपड़ी बनाकर अपनी कारीगरी करते प्रजापत ने सैलानियों का ध्यान आकर्षित किया। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स से बातचीत में प्रजापत ने बताया कि ये उनका शौक है। वे बाजार से सूत लाकर कातते है और ये पीढीयां में जाल या अनेक प्रकार के डिजायन डाल कर बनाते है। उन्होंने बताया जब हम छोटे थे तो घर मे पीढियां होना संपन्नता का प्रतीक मानी जाती थी। उनका मत है कि आजकल डबलबेड व कुर्सियों ने बीमारियां बढ़ाई है जबकि लकड़ी के सूत से बने पलंग व पीढियां सोने व बैठने में नजे केवल आरामदायक होती है बल्कि आदमी को निरोग रखती है। प्रजापत 10 बच्चों के पिता है और उनका मुख्य व्यवसाय खेती बाड़ी है। इस हुनर से पैसा कमाने में उनकी रूचि कम ही है। वे गांव में करीब 300 बेटियों के विवाह में पलंग को सूत से सजा कर दे तोहफे में दे चुके है। प्रजापत ने मुस्कराते हुए कहा कि वे धर्म की कमाई कर रहें है। वे प्रेम चारे वाले सभी लोगों को ये बनाकर देने के साथ सीखने में रूचि रखने वाले युवाओं को सीखा भी रहें है। उनकी इस कला का गांव में बहुत मान है और लोग उनकी नेकदिली की सराहना भी करते है। अगर आप भी पीढ़ा या सूत का पलंग बनवाना चाहे या बनाना सीखना चाहे तो आप गोपाल प्रजापत से 9229691553 पर संपर्क कर सकते है।
सुमन सुथार गोटा किनारी की हुनरमंद, बनाती है साड़ियां, तकिया-गद्दी कवर के साथ शुभ चिन्ह।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इसी गांव की बेटी सुमन सुथार घरों में शुभ कार्यों की शुभकामनाओं के साथ गोटा किनारी का सुंदर काम हाथ से करती है। 50 वर्षीय सुमन सुथार मोमासर के अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त दिव्यांग चित्रकार बजरंग सुथार की बड़ी बहन है। सुमन ने बताया कि भाई चित्रकारी करतें है तो वे देखरेख में उनके पास बैठकर गोटा किनारी का कार्य करती है। हर घर में पूजन में काम आने वाले आसन हो या गद्दी के कलात्मक कवर, शुभ लाभ, शुभता का प्रतीक सुआ, साड़ियां पर कलाकारी करने का सुदंर कार्य करती है। उन्होंने बताया एक गद्दी का कवर पांच से छह दिन में पूरा होता है वहीं साड़ी का काम 10 से 15 दिन में पूरा हो पाता है। वे गोटा किनारी काट काट कर हाथ से उन्हें पेचवर्क की तरह कपड़े पर सजाती है। साधारण परिवार की सुमन होठों पर मुस्कान के साथ गर्व से बताती है कि घर का काम करने के बाद वे इसमें जुट जाती है और इससे उनकी हाथखर्ची निकल जाती है। आप सभी नीचे दी गई फोटो को ध्यान से देखें और अगर आपको अपने घर के शुभ कार्यों के लिए इन सामानों की जरूरत हो तो आप 9982116839 पर कॉल कर मंगवा सकते है। इसी गांव की दिव्यांग युवती राधा घर में पड़े वेस्ट मैटीरियल से सजावटी सामान बनाने का कार्य करती है। नारीयल की जटा से घोंसला ड्राइंगरूम के लिए सजाती है वहीं पुरानी छबड़ियों को सजाकर उनमें सुआ टांकने का कार्य करती है। वे बाल गोपाल को पहनाने के लिए रंग बिरंगे कपड़े भी सजाती है और उनकी कला को भी मोमासर उत्सव में आए देशी विदेशी मेहमानों ने सराहा।






