May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 जुलाई 2024। हर घर सहजन के लाभ को समझे और इसके उपयोग से सेहतमंद बने, इसी प्रयास के साथ पर्यावरण की सूरत भी सुधर सकें। ये प्रयास किया जा रहा है राजकीय आयुर्वेद औषधालय, दुलचासर के डॉ जेपी चौधरी की पहल व प्रेरणा से। चौधरी गांव दुलचासर, गोपालसर, सूडसर व टेऊ गांव के घर-घर में सहजन का पौधा लगवाने के प्रयास करते हुए इसके लाभ जन-जन को बता रहें है। बुधवार को गांव में 1100 पौधे सहजन के नि:शुल्क वितरित किए जाएंगे। ये कार्य दानदाता शिवरतन मोहता के सहयोग से होगा। चौधरी ने टाइम्स को बताया वितरण कार्य में श्रम सेवा देने में विभिन्न राजकीय कार्यालयों एवं निजी संस्थाओं का सहयोग रहेगा। चौधरी ने बताया कि घर-घर सहजन अभियान का ये लगातार दूसरा साल है और गत वर्ष चारों गांवो में 2100 पौधे लगावाए गए। वहीं इस वर्ष 1100 पौधे लगवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का कोई ग्रामीण व किसान सार्वजनिक स्थल, राजकीय कार्यालय, या किसी संस्था के प्रांगण में या अपने घर में सहजन का पौधा लगाना चाहे तो वह बुधवार सुबह 9 बजे से 2 बजे तक राजकीय आयुर्वेद औषधालय से निःशुल्क प्राप्त कर सकता है। बता देवें अनेक ग्रामीण डॉ चौधरी की इस पहल का स्वागत कर रहें है। अनेक ग्रामीणों ने सहजन का उपयोग भी प्रारंभ कर दिया है।

औषधीय गुणों एवं पोषक तत्त्वों का भंडार है सहजन- डॉ. जेपी चौधरी

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डॉ जेपी चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि सहजन का पौधा (ड्रम स्ट्रीक) औषधीय गुणों  से भरपूर एक हाई न्यूट्रिशन वैल्यू युक्त उच्च मात्रा में ऊर्जा प्रदान करने वाला पौधा है। सहजन की पत्तियाँ, पुष्प, फली, जड़, छाल, सभी प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर के साथ-साथ कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक, फास्फोरस, विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6, सहित अनेक सुक्ष्म मात्रिक तत्त्वों से भरपूर   औषधीय पौधा है। जो शरीर को पोषण प्रदान करने के साथ ही अनेक व्याधियों में बहुत ही प्रभावी औषधी के रूप में कार्य करता है।

सहजन के औषधीय गुण :- डॉ चौधरी ने बताया कि एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटी डायबिटिक, एंटी पायरेटिक एवं डाययूरेटिक के रूप में कार्य करते हुए गुर्दे की बीमारियों में उपयोगी सिरम यूरिक एसिड को कम करने एवं बीपी को कम करने में कारगर है। साथ ही फाइबररिच होने से विबंध सहित अन्य पाचन तंत्र सबंधित विकारों में लाभदायक होता है।

सहजन का उपयोग कैसे करे ?

सहजन की पत्तियाँ, पुष्प को ताजा या छाया में सुखाने के बाद उसे कच्चा भोज्य पदार्थों के साथ मिलाकर प्रयोग कर सकते है। पत्तियों के चूर्ण को ग्रीन टी के रूप में प्रयोग करते हुए वजन नियंत्रित करने में बहुत लाभदायक   है। फलियों का प्रयोग सब्जी बनाने में कर सकते है। यह सब्जी पाचन तंत्र को दुरस्त करने के साथ ही आवश्यक पोषक तत्त्वों की पूर्ति भी करती है।

विशेष:- जड़ एवं छाल का उपयोग आयुर्वेद चिकित्सक के निर्देशन में ही करे। गर्भवती महिलाएं एवं प्रसव के 45 दिन तक महिलाएं बिना आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के सहजन प्रयोग से बचे। लो बीपी के मरीज भी सहजन के प्रयोग से बचें।