






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 अप्रैल 2022। कांग्रेस का चिंतन शिविर हालांकि अगले महीने के दूसरे सप्ताह में है मगर पार्टी के भीतर गहरी उथल पुथल अभी से शुरू हो गई है। पार्टी नेतृत्त्व चाहता है कि ये दो दिन का चिंतन शिविर केवल चिंता शिविर न बन कर रह जाये, अपितु भविष्य के लिए ठोस निर्णय का आधार बने।
कुछ समय पहले पार्टी के भीतर बने जी 23 ग्रुप की बातें तो अब हवा हो गई। सोनिया गांधी ने इस ग्रुप के सभी नेताओं से बात कर उनके उपयोगी सुझावों पर काम करने की सहमति दे दी, तो इस ग्रुप के नेता भी अब विपरीत बोल बोलना बंद हो गए है। लगातार हार से परेशान कांग्रेस इस बार अभी से चुनावी रण की तैयारी करना चाहती है।
कांग्रेस में पीके की एंट्री ने बदलाव के संकेत दिए हैं। हालांकि पीके पार्टी में शामिल होंगे या नहीं, ये अभी तक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। मगर ये तय है कि पीके की रणनीति पर कांग्रेस जरूर काम करेगी। इसके संकेत सोनिया गांधी ने दिए भी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब कांग्रेस हार के बाद समझ गई है कि बिना गठबंधन भाजपा से मुकाबला सम्भव नहीं। गठबंधन के लिए कुछ त्यागना भी पड़ेगा। लगता है कांग्रेस नेतृत्त्व ने इसके लिए अपने को तैयार कर लिया है और उसी पर बड़ा विचार उदयपुर के चिंतन शिविर में मुख्य रूप से होगा।
आलाकमान जानता है कि हाल ही में पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में जो करारी हार पार्टी को मिली है उसकी एक बड़ी वजह पार्टी के सोशल समीकरण बिगड़ना है। इसी तरह किसानों का भी पूरा साथ कांग्रेस नहीं ले पाई है। यूपी में किसान कांग्रेस के साथ नहीं रहे, सपा के साथ चले गये।
चिंतन शिविर में आर्थिक मसलों का प्रस्ताव तैयार करने के लिए पी चिदम्बरम के नेतृत्त्व में एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें सचिन पायलट सदस्य है। ये बात भी राजस्थान की कांग्रेस राजनीति में हलचल मचाये हुए है। केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का कड़ा विरोध पार्टी नहीं कर पा रही। जबकि आम जरूरतों की चीजें, पेट्रोलियम पदार्थ आदि के दामों में बहुत वृद्धि हुई है। बेरोजगारी भी चिंताजनक है। ये सब होने के बाद भी कांग्रेस कोई बड़ा आंदोलन खड़ा कर लोगों को पार्टी से नहीं जोड़ पाई है। ये कमेटी आर्थिक प्रस्ताव तैयार करेगी।
आलाकमान ने कृषि पर प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी एक कमेटी बनाई है। उसका ध्येय कृषि नीति का विरोध और किसान हित के लिए बात करना है ताकि इस बड़े तबके को पार्टी के निकट लाया जा सके। इनके अलावा सामाजिक जुड़ाव के लिए भी एक प्रस्ताव चिंतन शिविर में आयेगा। उसकी रणनीति के लिए भी कमेटी बनाई गई है। जातिगत समीकरण के मामले में कांग्रेस बुरी तरह से पिछड़ गई है, जो एक समय में पार्टी की बड़ी ताकत थी। उसके लिए ये कमेटी सुझाव देगी। राजनीति प्रस्ताव तैयार करने के लिए भी एक कमेटी बनाई गई है। चिंतन शिविर के लिए कांग्रेस ने कुल 6 कमेटियां बनाई है मगर किसी भी कमेटी में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का न होना आश्चर्यजनक है। राजस्थान से केवल सचिन पायलट को ही एक कमेटी में स्थान मिला है। इसको लेकर भी राजनीतिक हलकों में कयासों का बाजार गर्म है। जबकि चिंतन शिविर आयोजित करने का पूरा जिम्मा ही गहलोत का है।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस जब तक जमीन से जुड़े नेताओं को कमान नहीं देगी और नये लोगों को आगे नहीं करेगी, तब तक उसे बड़े परिणाम की आशा नहीं करनी चाहिए। वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन भी बड़ी जरूरत है। एक तालमेल वरिष्ठ नेताओं और नये जोश में बिठाना जरुरी है। फिलहाल तो चिंतन शिविर ने पार्टी के जमे जमाये नेताओं में हलचल की हुई है। ये चिंतन शिविर ही तय करेगा कि पीके फार्मूले को पार्टी किस हद तक अपनायेगी।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



