May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 नवबंर 2023। आज नरक चतुर्दशी के पूजन के साथ दीपावली पूजन कैसे करें और गोर्वधन पूजन कब होगा, संबंधी पूरी जानकारी पढ़ें पंडित विष्णुदत्त शास्त्री के साथ।
❄️ नरक चतुर्दशी ❄️
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी शनिवार 11/11/23 को छोटी दीपावली मनाई जा रही है। छोटी दिवाली के दिन गणेश, लक्ष्मी, कुबेर जी के साथ हनुमान जी और माँ काली की आराधना भी विशेष फलदाई है। इस दिन कुछ उपायों को करने से नरक का भय नहीं होता है, घर से रोग दूर रहते है, सभी सदस्यो को आरोग्य मिलता है, दीर्घायु प्राप्त होती है, परिवार के सभी सदस्य रूपवान होते है। आज के दिन हनुमान मंदिर में जाकर हनुमानजी को इत्र, गुलाब के फुल और गुड़ चने चढ़ाकर 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी को अपनी मनोकामना कहें। आज शाम को घर के सबसे बड़े सदस्य को यम के नाम का एक बड़ा दीया जलाना चाहिए। इस दीपक को पूरे घर में घुमाएं। अब घर से बाहर जाकर दूर इस दीये को रख आएं। घर के दूसरे सदस्य घर के अंदर ही रहें और उन्हें यह दीपक नहीं देखना चाहिए। इसके अतिरिक्त दक्षिण दिशा में यम देवता को यादकर 14 दीपक घर की दक्षिण दीवार पर रखें। माना जाता है इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। चतुर्दशी तिथि 11 नवंबर 2023 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर प्रारंभ होगी और 12 नवंबर 2023 को दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
❄️ दीपावली ❄️
कार्तिक कृष्ण अमावस्या रविवार 12/11/23 को 02:45 से प्रारंभ होकर 13/11/23 को दोपहर 02:56 तक रहेगी। घर एवं व्यापारिक प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार के दोनों ओर दीवार पर शुभ – लाभ, स्वास्तिक, ॐ, आदि सौभाग्य चिन्हों को सिंदूर से अंकित करें तत्पश्चात उस पर पुष्प रोली चढाकर शुभ के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। सांयकाल लक्ष्मी पूजन के मुहुर्त के समय गृहस्वामी को अपने पूरे परिवार के साथ स्नान आदि करके पीले वस्त्र धारण करके पूजा के कमरे में प्रवेश करना चाहिए। प्रवेश करते समय माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर जी, इंद्र जी, माता सरस्वती का ध्यान करना चाहिए। प्रवेश करने से पूर्व तीन बार ताली बजानी चाहिए। लक्ष्मी गणेश, कुबेरजी की मूर्ति, स्फटिक श्रीयंत्र और जिन भी यंत्रों की पूजा करनी हो उन्हें जल से पवित्र करके लाल वस्त्र से आच्छादित चौकी पर स्थापित करें।
पूजन सामग्री को निम्नलिखित तरीके से रखना अति उत्तम होता है।
बायीं ओर: — घंटी, धूप, तेल का दीपक आदि।

दायीं ओर: — घी का दीपक, जल से भरा हुआ दक्षिणवर्ती शंख।
सामने : — चन्दन, मौली, रोली, पुष्प (अगर कमल का फूल भी हो तो ओर भी उत्तम है ) नैवेद्ध, खील बताशे, मिष्टान। चौकी पर थोड़े से चावल का ढेर बनाकर उस पर एक सुपारी को मोली से लपेटकर रख दें फिर भगवान गणेश जी का आह्वान करना चाहिए। दक्षिण वर्ती शंख को अक्षत डालकर उसपर स्थापित करना चाहिए। फिर दूर्वा, तुलसी एवं पुष्प की पंखुड़ी दल कर उसे जल से भर देना चाहिए। किसी पान के पत्ते के ऊपर नैवेद्ध (प्रसाद) रखें उस पर लौंग का जोड़ा अथवा इलायची रखकर तब वह सामग्री माँ लक्ष्मी जी, गणेश जी को अर्पित करनी चाहिए। पूजन के समय माँ लक्ष्मी के सामने अपनी तिजोरी से कुछ सोने चाँदी के सिक्के अथवा कोई भी आभूषण निकाल कर पूजन करना चाहिए। पूजन में कमल गट्टा, पीली सरसों, शहद, साबुत धनिया, पीली कौडिय़ां, गोमती चक्र, नाग केसर, साबुत हल्दी की गांठ, कमल का फूल आदि का अवश्य प्रयोग करें।
दीवाली के दिन बही खाता और कलम, तुला आदि की भी पूजा करनी चाहिए। दीपावली को दीपमालिका का पूजन करके दीपदान करना चाहिए। सबसे पहले एक थाली में कम से कम ग्यारह मिटटी के कोरे दीपक धोकर रख लें, फिर उस में बत्ती डालकर उस में तेल भर दें पूजा चौकी के बायीं ओर उस थाली में कुछ मुष्प ओर अक्षत डालकर उसे रख दें। पूजा के समय उन्हें भी प्रज्ज्वलित करके रोली से उनका पूजन करें। पूजन के बाद इन दीपकों को घर के मुख द्वार के दोनों ओर, तुलसी जी के समीप, रसोई, पूजास्थल, पेयजल रखने के स्थान पर, घर के आँगन अथवा चौकी पर, घर की छत आदि पर रखकर दीपदान करें, और भी अधिक दीपक लगाने पर उन्हें इन्हीं दीपको के साथ जलाएं।
🌸महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त 🌸
⭐!! चौघड़िया!!⭐
शुभ 05:46 से 07:25
अमृत 07:25 से 09:03
चर 09:03 से 10:42
⭐!!लग्न मुहूर्त!!⭐
गोधूली 05:46 से 06:12
वृषभ 05:56 से 07:52
मिथुन 07:52 से 10:06
सिंह 12:26 से 02:43
सभी मुहुर्त सांय काल से प्रारंभ होंगे।

❄️ गोवर्धन पूजा ❄️
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस बार दीपावली के दूसरे दिन भी दोपहर 02:56 तक अमावस्या रहेगी। इसलिए गोवर्धन पूजा 14/11/23 मंगलवार को प्रातः मनाई जाएगी।
❄️भैया दूज❄️

गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज या यम द्वितीया मनाई जाती है। इस बार गोवर्धन पूजा वाले दिन ही भाई दूज मनाई जायेगी। यह पांच दिवसीय दीपावली के पर्वो में अंतिम पर्व होता है। इस दिन भाई को यदि विवाहित है तो अपनी पत्नी सहित अपने बहन के यहाँ जाकर प्रेम से भोजन करना चाहिए व उसके बाद यथाशक्ति अपनी बहन को भेंट देकर तिलक कराएँ तो उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है।