






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 अगस्त 2021। सत्ताओं से किसानों का संघर्ष जस का तस बना रहता है और बिजली आपूर्ति की मांग फिर भी पूरी नहीं हो पाती है। आजादी के 75 वर्षों बाद भी किसान के घरों में बिजली के लिए बच्चे तरसते है और संघर्ष करते है पीढ़ी दर पीढ़ी का। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में 20 हजार के करीब किसान परिवार खेतों में घर बनाकर रहते है और सिंगल फेस बिजली बंद होने से उनके बच्चें पढ़ाई के लिए, महिलाऐं घरेलू कार्यों के लिए, बिना फोन चार्ज किए, अंधेरे में समय व्यतीत करते हुए अपनी ढाणियों में जुटाई सुविधाओं में इस भीषण गर्मी में भी कूलर पंखे चलाने को तरस रहें है। इस सिंगल फेस बिजली के लिए गत वसुंधरा सरकार की ईंट से ईंट बजा देने वाले किसान अब फिर से गहलोत सरकार के खिलाफ आंदोलन के मूड में है। गत आंदोलन की ही देन रही कि श्रीडूंगरगढ़ विधायक गिरधारीलाल महिया को किसानों ने सड़क के संघर्ष से विधानसभा में बिठा दिया था। क्षेत्र वासियों की स्मृति में वह आंदोलन है और आज क्षेत्र के किसान वापस उसी दोराहे पर खड़ें है जहां से उनकी सिंगल फेस बिजली बंद कर दी गई है और आपूर्ति घटा दी गई है। बता देवें किसानों ने सिंगल फेस बिजली आपूर्ति के लिए किए गए संघर्ष की गोद से किसान नेता महिया उभरे थे और आज जनता सवाल कर रही है कि कहाँ है उनके नेता जो उनके लिए संघर्ष कर सके और इस सरकार के निर्णय को बदलवा कर खेत में खड़ी फसलों के साथ, 20 हजार के करीब किसान परिवारों के साथ न्याय करवा सकें..??
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