






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 अक्टूबर 2025। सेसोमूं स्कूल का प्रांगण रविवार सुबह क्षात्र धर्म की जय हो के नारों से गूंज उठा, यहां आज सात जिलों से आई 150 बालिकाओं का चार दिवसीय मातृ शक्ति प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ। इस दौरान ध्वज पूजन किया गया और बालिकाओं द्वारा उत्साह के साथ सामूहिक जयघोष लगाया गया। समापन समारोह में शिविर प्रमुखा शायर कंवर ने शिविर से प्रेरणा लेकर यहां दिए संस्कारों को जीवन में उतारकर आत्मसात करने की बात कही। शिविर में मातृशक्ति विभाग प्रमुख जोरावरसिंह भादला का सान्निध्य रहा। सभी बालिकाओं को तिलक लगाकार विदाई दी गई। शिविर व्यवस्थाओं में संघ के प्रांत प्रमुख जेठूसिंह पुदंलसर, गणेशसिंह श्रीडूंगरगढ़, छोटूसिंह गुसांईसर, ओमपालसिंह जोधासर व करणीसिंह पुदंलसर की मुख्य भूमिका रही। समापन समारोह में क्षत्रिय समाज की महिला शक्ति भी शामिल हुई। श्रीक्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले आयोजित शिविर में बालिकाओं व शिक्षिकाओं ने व्यवस्थाओं की खूब सराहना की।
केसरिया गणवेश में दिखा गौरव, 15 घटों में विभाजित कर अनुशासित रहा शिविर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। केसरिया रंग भारतीय संस्कृति में ओज तेज व त्याग का रंग माना जाता है। शिविर में शामिल सभी बालिकाएं केसरिया गणवेश में पूर्ण अनुशासन के साथ शामिल हुई। चार दिवसीय शिविर दर्शनार्थियों ने अपने अनुभव में गणवेश का महत्व बताते हुए कहा कि इस रंग की महिमा व गौरव शिविर में झलक उठा। शिविर में बालिकाओं के 15 घट (दल) बनाए गए। इन दलों में विभिन्न स्थानों की बालिकाओं को शामिल किया गया। पूरी तरह से अनुशासित दिनचर्या के इस प्रारंभिक वर्ग व संगठन की रीति नीति व क्षात्र धर्म, समाज में नारी शक्ति के योगदान को बताया व समझाया गया। शिविर मे माध्यम से किशोरियों ने आपसी तालमेल का पाठ भी पढ़ा।
टाइम्स विशेष- संयमित दिनचर्या के बीच ली संस्कार व समन्व्य की सीख।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शिविर में संचालिका शायर कंवर अवाय (जैसलमेर) ने टाइम्स को बताया कि शिविर में चार दिन सुबह 4.30 बजे जागरण से दिनचर्या प्रारंभ हुई। योगासन, व्यायाम, ध्यान, प्रार्थना, बौद्धिक, विनोद सत्रों के माध्यम से बालिकाओं को क्षत्रिय कुल परंपरा, नारी शक्ति का महत्व, नारी शक्ति का उत्थान, वीरोचित्त गुणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विरांगनाओं की जीवनियों के बारे में बताया गया व चर्चा सत्र में उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। जिससे बालिकाएं रील नही रियल यानी वास्तविक जीवन का समझ सकें व वीरता की प्रेरणा ले सकें। शायर कंवर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी भी बालक की अद्वितीय क्षमताओं के उद्घाटन में उसकी माता का व उनके संस्कारों का सबसे अधिक प्रभाव होता है। ऐसे में आज संस्कृतियों के संक्रमण काल में हमें समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए वीर व संस्कारवान माताओं का निर्माण करना होगा। श्रीक्षत्रिय युवक संघ व पूज्य तनसिंहजी के विचारों से प्रेरित होकर शिविर में यही प्रयास किया गया। इन बालिकाओं ने शिविर में बिना मोबाइल व सोशल मिडिया के स्वयं पर, स्वाध्याय के माध्यम से ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास किया। बालिकाओं को समाज व देश की वर्तमान परिस्थितियों के साथ अपने यश गौरव का समन्व्य करने के बारे में बताया गया। उन्हें क्षात्र धर्म के निर्वहन की प्रेरणा दी गई। शिविर में बालिकाओं को स्वयं के बारे में तथा हमारी पूर्वज रही महान माताओं के बारे में जानने का अवसर बना। शिविरार्थी बालिकाओं ने शिविर से जीवन की दिशा का ज्ञान होने की बात कही।








