May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जनवरी 2025। नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत पर कार्य कर रही श्रीडूंगरगढ़ सरकारी खरीद केंद्र में इस चाल में कार्य हुआ तो खरीद पर संशय के बादल मंडराने लगे है। कृषि मंडी में सरकारी खरीद के मामले में लगातार आ रही समस्याओं के चलते किसानों के लिए खरीद जी का जंजाल बन गई है। किसानों की परेशानी का एक कारण समिति द्वारा कछुआ चाल से की जा रही खरीद भी है। हालांकि क्षेत्र में पहली बार 12 हजार के टोकन कट कर विशाल आंकड़े में किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। यहां समिति द्वारा कार्य की गति देखकर क्रय विक्रय सहकारी समिति के माणकचंद सिहाग ने कहा कि समिति के कार्य पर नाराजगी जताते हुए किसानों को परेशान किए जाने का आरोप लगाया है। विदित रहें यहां 18 नवंबर 2024 से 18 जनवरी 2025 तक दो माह में 2,994 किसानों की मूंगफली खरीद हो सकी है। वहीं अंतिम तिथि 18 फरवरी है। ऐसे में शेष एक माह के समय में करीब 9000 से अधिक किसानों की मूंगफली खरीद कैसे संभव हो सकेगी.? समिति के द्वार से सड़कों पर मूंगफली लेकर खड़ें किसानों की कतारें कम नहीं हो रही है। क्रय विक्रय सहकारी समिति के सदस्य नत्थूनाथ मंडा ने कहा कि 2024-25 की खरीद क्रमश: 13वीं खरीद है और 13 वर्षों में कभी इतना भारी भ्रष्टाचार इससे पूर्व कभी नहीं हुआ। मंडा ने कहा कि समिति सदस्य परेशान किसानों की स्थिति से नाराज है व सरकार से इस पर ध्यान दिए जाने की मांग कर रहें है। इसी बीच बता देवें क्यूआर कोड की समस्या के कारण भी किसान परेशान हो उठे है।

प्रतिदिन करीब 30 प्रतिशत हो रही है खरीद।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स।  बतौर प्रयोग बता देवें मंडी में 18 जनवरी के दिन 130 टोकन जारी किए गए और खरीद मात्र 42 ढेरी की हुई। लगातार खरीद का यही क्रम चल रहा है। जिससे मूंगफली लेकर कतारों में खड़े किसानों की लाइन टूटने का नाम नहीं ले रही है। किसान कड़कड़ाती ठंड में सात से दस दिन तक इंतजार कर रहें है। वहीं बता देवें एक दिन में करीब 30 प्रतिशत तुलवाई को देखते हुए एक माह में तुलवाई पूरी होना संभव ही नहीं हो सकेगा। ऐसे में किसान तुलवाई की गति को बढ़ाने की मांग कर रहें है। जिससे उनकी 40 क्विंटल मूंगफली का पूरा भाव मिल सकें।

2 केंद्र दोनों पर हो खरीद तो कार्य को मिले गति।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। किसानों ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में खरीद के लिए 2 केंद्र स्वीकृत है। परंतु दोनों पर एक ही ठेकेदार द्वारा संचालित किए जा रहें है। ऐसे में ठेकेदार के वही कार्मिक दोनों का कार्य देख रहें है। यदि दोनों केंद्रो पर अलग अलग संचालित किए जाए व दोनों पर अलग अलग कार्मिकों द्वारा खरीद हो तो कार्य को गति मिलने के साथ ही किसानों को भी शीघ्र तुलवाई हो जाने का लाभ मिल सके।