May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अक्टूबर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 का मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 24 दिन शेष है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत की जा रही है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है और इसी क्रम में पढ़ें आज की टिप्पणी।

एक पक्की, एक कच्ची, दो महिला नेत्रियों की चर्चा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के चुनाव में मंगलवार से दो महिला नेत्रियों की चर्चा खासी जोर पकड़ गई है। यहां एक भाजपा की नई नई फायर ब्रांड महिला नेता ने निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंच कर खुद के लिए नामांकन पत्र लिया। मजे की बात यह है कि इस नेता में नामांकन पत्र लेने के दौरान अपना पर्चा जेजेपी, आरएलपी और निर्दलीय किसी से भी भरने की बात कही। इस फायरब्रांड नेता द्वारा भाजपा के टिकट विरोधियों से भी गुप्त वार्ता होने के समाचार भी आ रहे हैं। वहीं दूसरी और गत नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को अपने पाले में करने वाली भाजपा की एक महिला नेत्री का नामांकन करने की चर्चा भी जोरो पर है। गत पालिका चुनावों में भाजपा के लिए चुनोती बनी इस महिला नेत्री और उनके समाजसेवी ससुर को स्थानीय भाजपा नेताओं ने उस समय तो निष्कासित करवा दिया था। लेकिन जनता और समर्थको के बीच उनकी मौजूदगी अभी भी अच्छी खासी है। भाजपा के लिए ही नुकसानदेह होने वाली इन दोनों महिला नेत्रियों की चर्चा जैसे जैसे फैल रही है भाजपा डेमेज कंट्रोल के प्रयास भी तेज कर रही है। हालांकि अभी तक प्रभावी नही हुए हैं। अब आम जन का मानस है कि जब भाजपा मान-मनवान के अपने पुरजोर प्रयास करेगी तो दोनों में से कच्चा कौन रहेगा और पक्का कौन रहेगा ये यह तो समय ही सामने लाएगा।

समर्थकों में जोश, नेताजी ठंडे, मूंछ वालो की अलग परेशानी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सोमवार रात से लेकर मंगलवार शाम तक भाजपा की टिकट से नाराज नेताओं की कई दौर की बैठकें हुई। सभी बैठकों में समर्थको में तो जोश दिखा लेकिन नेताजी खुद ठंडे दिखे। इन मीटिंगों में शहरी और गांवो से कार्यकर्ता शामिल हुए और दम दिखाने का जोश भरा। लेकिन निर्णय यही रहा कि 2 दिन ओर कांग्रेस, आरएलपी की टिकट का इंतजार करने के बाद ही अगला कदम उठाना तय किया गया। इसी दौर में कुछ दिन पहले तक लाल झंडे के नीचे दिखने वाले मूंछों वाले पूर्व सरपंच को सलाह देनी भारी पड़ गई। मूंछ वाले पूर्व सरपंच ने पार्टी के पक्ष में रहने की चर्चा छेड़ी तो वहां पहले से मौजूद अन्य लोग खासे आक्रोशित हो गए और कल तक वहां, आज यहां का ताना ऊंची आवाज में देने लगे। नई जगह में अब यह भी अलग समस्या सामने आ रही है।

ओ म्हारो, अगलो थारो, लालच री बिंटली।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आजादी के बाद सिर्फ एक बार ही श्रीडूंगरगढ़ विधायक पद पर आसीन रहने वाले विप्र समाज ने इस बार 46 सालो का वनवास हर हाल में खत्म करने का इदारा कर लिया है। इसके लिए जहां बगावत को रोकने की अलग टीम काम कर रही है वहीं टिकट के धणी गांवो में अकेले अकेले ही पहुंच कर मेन-टू-मेन प्रचार को अपना हथियार बनाये हुए हैं। इनसे मुलाकात के बाद गांवो में हर एक विप्र प्रत्याशी बन कर प्रयासो में जुट गया है। अब गांव की राजनीति में दबदबा रखने वाले गुटों से समझौता इसी तर्ज पर हो रहा है कि ओ वोट म्हारो (याने के विधायक चुनाव में आप हमारे पक्ष में वोट करे) और अगलो वोट थारो (याने के सरपंच चुनावो में हम आपके पक्ष में वोट करेंगे)। अब कौन किसके पक्ष में वोट करता है यह तो मतदान के बाद ही सामने आएगा लेकिन लालच की बिंटली इन दिनों हर कोई हर किसी को देने की कोशिशों में लगा हुआ है।