






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 मई 2022। राजस्थान में ऊंटों की घटती आबादी को देखते हुए पिछली सरकार ने इसे राज्य पशु का दर्जा दिया और गहलोत सरकार ने 2022-23 के राज्य बजट में “ऊंट संरक्षण और विकास नीति” का ऐलान किया है जिसके लिए अगले वित्तीय वर्ष 10 करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव रखा गया है। परंतु धरातल पर योजनाओं का क्रियान्वयन बमुश्किल ही नजर आए और राज्य पशु की दुर्दशा की ये बानगी कहीं और नहीं श्रीडूंगरगढ़ उपखंड कार्यालय परिसर में नजर आई है। यहां एक घायल ऊंट करीब एक हफ्ते से मदद की उम्मीद में पड़ा है। अधिकारियों से भरे इस परिसर में किसी की संवेदना ये अभी तक प्राप्त नहीं कर पाया है और इस कारण कोई सरकारी मदद ऊंट तक नहीं पहुंच पाई है। ये यहां कहां से पहुंचा इसकी जानकारी नहीं मिली परन्तु ये उठ नहीं सकता और भूख प्यास से संघर्ष करते हुए एक ही स्थान पर पड़ा ही। इसके शरीर में कीड़े लगने शुरू हो गए है। क्षेत्र में जीवों के प्रति संवेदनशील ढंग से कार्य कर रही आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति ने आज इस संबंध में जिलाकलेक्टर के नाम पत्र लिखकर इसकी मदद की गुहार करते हुए इसे इलाज व सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है। समिति के मदन सोनी ने बताया कि सरकार द्वारा किसी भी विभाग को ऊंट की देखरेख, संरक्षण व संवर्धन, उपचार के लिए उत्तरदायी नहीं बनाया गया है जिससे सभी विभाग इससे पल्ला झाड़ते है। तहसीलदार को पत्र सौंपने के दौरान विनोद तोलम्बिया, एड. प्रवीण पालीवाल भी साथ रहें।




