






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 अगस्त 2024। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए रिजर्वेशन के लिए एससी और एसटी वर्ग में उप वर्गीकरण की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि यह अनुच्छेद 14 के तहत पूरी तरह से संवैधानिक है। अब एससी एसटी का क्रीमीलेयर आरक्षण से बाहर होगा तथा कलेक्टर के बेटे को आरक्षण नहीं मिलेगा। आरक्षण अब जरूरतमंद को मिलेगा।
कोटा के भीतर कोटा मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। एससी एसटी आरक्षण के भीतर अब कोटा मान्य होगा, ये फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि जमीनी हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि एससी/एसटी के भीतर ऐसी श्रेणियां हैं जिन्हें सदियों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। उप-वर्गीकरण का आधार यह है कि एक बड़े समूह में से एक ग्रुप को अधिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 7 जजों की बेंच ने गुरुवार को अपना फैसला सुनाते हुए ये साफ कर दिया कि राज्यों के भीतर नौकरियों में आरक्षण देने के लिए कोटा के भीतर कोटा दिया जा सकता है। 2004 के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला बहुत ही अहम है।
अदालत ने क्या कहा?
• SC-ST आरक्षण में अधिक पिछड़ों को अलग कोटा देना मान्य.
• सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने 6:1 से ने दिया फैसला.
• अनुसूचित जातियां एक समरूप समूह नहीं, कैटिगरी में बांट सकते हैं.
• ऐसा करना अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं
• उपवर्गीकरण का आधार राज्य के सही आंकड़ों पर आधारित होना चाहिए.
• इस मामले में राज्य अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकते.
• जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि जमीनी हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता,
• एससी/एसटी के भीतर ऐसी श्रेणियां हैं, जिन्हें सदियों से उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
• SC/ST वर्ग के केवल कुछ लोग ही आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं.
• क्रीमीलेयर की पहचान कर आरक्षण के दायरे से बाहर लाने की नीति बने.
• SC/ST के क्रीमीलेयर और मैला ढोने वाले के बच्चों की तुलना सही नहीं.
• एससी/एसटी के सदस्य अक्सर प्रणालीगत भेदभाव की वजह से सीढ़ी पर चढ़ने में सक्षम नहीं होते हैं.
• अनुच्छेद 14 जाति के उप वर्गीकरण की अनुमति देता है.
• अदालत को यह जांचना चाहिए कि क्या वर्ग समरूप है और किसी उद्देश्य के लिए एकीकृत नहीं किए गए वर्ग को आगे वर्गीकृत किया जा सकता है.



