May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 अप्रैल 2022। श्री नेहरू शारदा पीठ(पीजी) महाविद्यालय एवं राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार मोहन आलोक की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को महाविद्यालय परिसर में “मोहन आलोक- व्यक्तित्व व कृतित्व” विषयक राजस्थानी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सचिव शरद केवलिया थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी ने की। इस अवसर पर राजेंद्र जोशी ने कहा कि मोहन आलोक ने ग-गीत पुस्तक के माध्यम से राजस्थानी में नवगीतों के साथ नए प्रयोग किए, इन गीतों की पृष्ठभूमि ग्रामीण जनजीवन है। उन्होंने “चित मारो दुख नै” कविता संग्रह में सामाजिक यथार्थ व विद्रूपताओं का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। मुख्य अतिथि शरद केवलिया ने कहा कि राजस्थानी भाषा अकादमी की ओर से मोहन आलोक पर मोनोग्राम का प्रकाशन करवाया गया था। उन्होंने “डांखळा” के माध्यम से राजस्थानी भाषा में एक नया प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि मोहन आलोक अत्यंत लोकप्रिय रचनाकार रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बिस्सा ने कहा कि मोहन आलोक ने अपनी कविताओं में पारंपरिक भावों के साथ-साथ नए भाव बोध का भी प्रयोग किया है। उन्होंने “सौ सोनेट” संग्रह के माध्यम से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर लेखनी चलाई । महाविद्यालय के राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ गौरी शंकर प्रजापत ने कहा कि मोहन आलोक ने अपनी राजस्थानी कहानियों के माध्यम से आमजन की समस्याओं को बखूबी चित्रित किया है। उन्हें राजस्थानी साहित्य सर्जन के लिए अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था । साहित्य अकादेमी नई दिल्ली में राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक मधु आचार्य “आशावादी” ने मोहन आलोक को प्रयोगधर्मी कवि बताते हुए कहा कि उन्होंने प्रकृति के माध्यम से मनुष्य की भावनाओं के विविध चित्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर रंगकर्मी अमित पारीक, कवि-संस्कृतिकर्मी चंद्रशेखर जोशी, एन डी रंगा , नागेश्वर जोशी सहित अनेक लोगों ने मोहन आलोक को श्रद्धासुमन अर्पित किए।