






कपिला स्वामी / श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स
विधान सभा में कल अशोक गहलोत ने अपना चौथा बजट वित्तमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया। तीन घंटे के लंबे बजट भाषण में उन्होंने घोषणाओं का अंबार लगा दिया। अपनी तरफ से समाज के हर वर्ग को कुछ न कुछ देकर खुश करने की कोशिश की है। आम जनता खुश तो है मगर उसे ये चिंता जरूर है कि घोषणाएं धरातल पर उतरेगी या नहीं, क्योंकि पिछले तीन बजट की कई घोषणाएं अभी तक अमलीजामा नहीं पहन सकी है।
50 यूनिट तक फ्री बिजली दी है और यूनिट का स्लैब बनाकर कुछ और राहत देने की कोशिश की गई है। ये घोषणा सभी राजस्थानियों को लाभ देगी, मगर बिजली के दाम घटाने पर वे कुछ नहीं बोले। वर्तमान में बिजली सबसे ज्यादा महंगी राजस्थान में ही है। दाम घटते तो असली राहत गरीब, मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग को मिलती।
कर्मचारियों के लिए गहलोत ने जरूर बड़ा काम किया है। 2004 के बाद लगे सभी कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन देना, एक रूका इंक्रीमेंट देना बड़ा काम है। इससे हर कर्मचारी को लाभ होगा। मगर प्रोबेशन समय खत्म करने, जीपीएफ कटौती पहले की तरह करने का लाभ कर्मचारी को नहीं दिया। इसका मलाल इस वर्ग को जरूर है।
एक लाख नई भर्ती करने की घोषणा बेरोजगारों के लिए आशा की किरण है। क्योंकि की राजस्थान भी देश की तरह बेरोजगारी का शिकार है। मगर रीट की तरह भ्र्ष्टाचार से अटकती भर्तियों की चिंता भी बेरोजगारों को है। उसको लेकर बताया गया उपाय उतना कारगर नहीं लगता।
बिजली, चिकित्सा, शिक्षा के लिए नई घोषणाएं हुई है, जिनका लाभ हर प्रदेशवासी को मिलेगा। मगर बिना पदों को भरे इनका महत्त्व क्या रहेगा। पहले से ही बड़ी संख्या में पद रिक्त है। घोषणा कारगर तभी होगी जब रिक्त पद भरने के साथ नवीन पदों का सृजन होगा। अंग्रेजी माध्यमों की स्कूलें खुले एक साल हो गया मगर पद तो भरे नहीं है। कॉलेज खोल दिये मगर न भवन है और न स्टाफ। यही हालत छोटी बड़ी अस्पतालों की है।
पहली बार कृषि बजट अलग से देना बड़ी बात है और राजस्थान में ये एक बड़ा काम है। मगर इसके लिए कुल बजट का 3 फीसदी ही देना, कम है। जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभागों को बहुत दिया है, मगर बीकानेर, अजमेर, भरतपुर, जयपुर पिछड़ गये।
बजट दिखने में सभी को आकर्षित कर रहा है। घोषणाओं का जमीन पर उतरना जरुरी है। इसी पर जनता की नजर रहेगी।



