






पद्मश्री देथा की जयंती जोधपुर में आयोजित समारोह में मुख्य वक्ता होंगे मधु आचार्य।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 28 अगस्त 2023। राजस्थान के गौरव व पद्मश्री विजयदान देथा की 97वीं जयंती पर राजस्थानी सभागार का उद्घाटन समारोह जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के न्यू कैम्पस स्थित भाषा प्रकोष्ठ में 1 सितंबर को आयोजित होगा। समारोह के संयोजक एवं राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ.गजेसिंह राजपुरोहित ने बताया कि जेएनवीयू के कुलपति प्रोफेसर के.एल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में राजस्थानी भाषा के ख्यातनाम कवि-आलोचक एवं साहित्य अकादमी नई दिल्ली में राजस्थानी भाषा के संयोजक प्रोफेसर डॉ अर्जुनदेव चारण मुख्य अतिथि होंगे। समारोह में कला शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर डॉ कल्पना पुरोहित विशिष्ट अतिथि होंगे। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रतिष्ठित कवि-कथाकार एवं समालोचक मधु आचार्य आशावादी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर पद्मश्री विजयदान देथा के कृतित्व पर प्रोफेसर कल्पना पुरोहित एवं गुंजन देथा द्वारा लिखित ‘ क्राफटिंग इटंरनिटी’ एक्सप्रलोरिंग विजयदान देथा फॉक पोटपोरी का लोकार्पण भी किया जायेगा। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, राजस्थानी भाषा-साहित्य के विद्वान, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भाग लेंगे।
विविध विधाओं के धनी सुदामा के जन्मशती वर्ष पर गोष्ठी का आयोजन, किया पुस्तक का लोकार्पण।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। विविध विधाओं के धनी व राजस्थानी के ख्यातनाम कथाकार अन्नाराम सुदामा के जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के सभागार में रविवार को चींत अर चितार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि सुदामाजी ने राजस्थानी भाषा की समृद्धि से आम पाठक को परिचित करवाया। राजस्थानी समाज में उनका बड़ा पाठक वर्ग रहा है। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि अन्नारामजी का बहुत सारा साहित्य उपलब्ध नहीं है, किसी संस्था या ट्रस्ट को आगे आकर उनकी रचनावली का प्रकाशित करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इतिहासकार भंवर भादानी ने कहा कि अन्नाराम सुदामा ने शोषित वंचित वर्ग को अपने साहित्य में वाणी दी है। विशिष्ट अतिथि हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ व डॉ मदन सैनी, डॉ चेतन स्वामी, तथा मोनिका गौड़ ने कृत्तित्व पर विचार व्यक्त किए। सुदामाजी के पुत्र डॉ मेघराज शर्मा ने उनके साहित्यिक जीवन के अनेक प्रसंग सुनाए। इस दौरान सुदामाजी के साहित्य पर केन्द्रित नंद भारद्वाज द्वारा संपादित ‘सिरजण री साख रा सौ बरस’ पुस्तक तथा डॉ चेतन स्वामी द्वारा रचित ‘राजस्थानी कहाणी : इतिहास अर आळोच’ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने आभार ज्ञापित किया। समारोह का संयोजन रवि पुरोहित ने किया। संगोष्ठी में रामचंद्र राठी, तुलसीराम चोरड़िया, डॉ गौरी शंकर प्रजापत, डॉ नमामीशंकर आचार्य, राज बिजारणिया, पुन्नू बीकानेरी, विजय महर्षि, बजरंग शर्मा, सत्यदीप, प्रशांत बिस्सा, सत्यनारायण योगी, सोहनलाल ओझा, लीलाधर सारस्वत, मनीष शर्मा, डॉ राधाकिशन सोनी, मोती सिंह राठौड़, मगन सिंह शेखावत, करणी सिंह बाना, सत्यनारायण स्वामी, राजेश शर्मा, नारायण सारस्वत सहित अनेक संभागियों ने हिस्सा लिया।




