






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 26 अक्टूबर 2023। कस्बे के आडसर बास माहेश्वरी भवन में गत कार्यकारिणी के समय हुए निर्माण कार्य में हुआ विवाद अब ओर गहरा गया है एवं समाज की रार अब कोर्ट कचहरी तक पहुंच गई है। यहां भवन निर्माण कार्य के लिए सामग्री सप्लाई करने वाली फर्म ने अपने 6,42,584 रुपये का बकाया बताते हुए वर्तमान पदाधिकारियों पर सिविल वाद दायर किया तो दूसरी ओर वर्तमान पदाधिकारियों ने पूर्व पदाधिकारियों एवं फर्म के खिलाफ गबन एवं धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए श्रीडूंगरगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। पूरे मामले में मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में भवन के खुले मैदान में तीन शैड लगाए गए थे एवं उसके सामान की खरीद फर्म रामगोपाल श्रीगोपाल राठी से की गई थी। खरीदे गए सामान का भुगतान भी समय समय पर किया गया। इसी क्रम में निर्माण पूर्ण होने के बाद फर्म द्वारा 4,82,050 रुपये के तीन बिल और दिए गए। जिनमें उल्लेखित सामान संस्था में आये ही नही होने की बात कहते हुए सम्पूर्ण भुगतान रोक लिया गया। बाद में संस्था की आंतरिक जांच कमेटी बनी एंव आंतरिक जांच कमेटी ने भी सामान नही आने की पुष्टि की। इस दौरान फर्म ने इन 4,82,050 के सहित कुल बकाया 6,42,584 रुपये का भुगतान करवाने के लिए संस्था पर सिविल वाद दायर कर दिया गया व पूरा भुगतान दिलवाने की मांग न्यायालय से की। इस पर बुधवार को संस्था पदाधिकारियों द्वारा थाने पहुंच कर लिखित रिपोर्ट से फर्म एवं तत्कालीन पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। मामले की जांच एसआई बलवीर सिंह करेंगे।
इन्होंने लगाए आरोप।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। माहेश्वरी भवन संस्था की ओर से वर्तमान अध्यक्ष हरिप्रसाद तापड़िया, मंत्री नारायण कलानी, पूर्व अध्यक्ष रामेश्वरलाल बाहेती, बजरंगलाल सोमाणी ने हाजिर थाना होकर रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में संस्था की आंतरिक जांच कमेटी सदस्य सुशील कुमार डागा, शिव भगवान मूंधड़ा, मनोज कुमार झालरिया, मनोज दरख एंव सेवानिवृत्त अभियंता रामगोपाल सोनी द्वारा वर्णित बिलों में आया सामान मौके पर लगा हुवा नही पाये जाने का उल्लेख भी कियाया गया है। इन पदाधिकारियों की रिपोर्ट पर थाने में तत्कालीन पदाधिकारी एंव निर्माण कमेटी के सदस्य श्रीगोपाल राठी, ओमप्रकाश कलानी एंव फर्म मालिक मनमोहन राठी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
फर्म का बकाया ज्यादा, विवाद कम राशि का।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। माहेश्वरी समाज की इस रार में एक तथ्य निकल कर सामने आया है कि फर्म द्वारा संस्था के खिलाफ जो सिविल वाद दायर किया गया है उसमें 642584 रुपये का बकाया बताते हुए भुगतान मांगा गया है। वहीं दूसरी और संस्था द्वारा दर्ज मुकदमे में 482050 रुपये का सामान संस्था में आने ही नही की बात कहते हुए गबन का आरोप लगाया गया है। ऐसे में आरोपित गबन की राशि 482050, फर्म द्वारा बकाया बताए जा रहे 642584 रुपये से करीब 1.60 लाख से कम ही सामने आई है। वर्तमान मंत्री नारायण कलानी ने बताया कि गबन राशि के पश्चात की राशि का भुगतान संस्था द्वारा मामले के पटाक्षेप पश्चात सामाजिक सहमति से किया जा सकेगा।



