May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 अप्रैल 2024। क्षेत्र का गांव “बाडेला” गुरूवार को 916 साल का हो गया है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि बाडेला की स्थापना विक्रम संवत 1165 में चैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया को गणगौर पूजन के दिन हुई। गुरूवार को गांव के युवाओं ने एक दूसरे को बधाई देते हुए सोशल मीडिया पर भी ग्रामीणों को शुभकामनाएं दी। गांव के बुजुर्गों व युवाओं ने एक गोष्ठी का आयोजन किया और गांव के विकास को लेकर लंबी चर्चा की। 80 वर्षीय बुजुर्ग रामरखा ज्याणी ने बताया कि उनके दिवंगत बड़े भाई नेताराम ज्याणी को बड़े बुजुर्गों से सुनी हुई गांव के इतिहास की सभी बातों का स्मरण था। वे बताते थे कि ज्याणी जाट ने शुक्रवार के दिन खेजड़ी का वृक्ष लगाकर बाडेला की स्थापना की थी। और तात्कालीन समय में कांगसिया खाती, बया तिवाड़ी, टोपसिया नाई व जाटोड़ा मेघवाल ही जातियां थी। आज भी यहां के लोग ऐसा मानते है कि इन पांचों जातियों के लोगों की शाखाएं जहां भी है वे बाडेला से ही निकलकर गई है।
रियासत काल में सबसे बड़ी पंचायत थी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव के मेघाराम खिलेरी ने बताया कि रियासत काल में 16 गांवो की सबसे बड़ी पंचायत हुआ करती थी बाडेला। उन दिनों में धनेरू, बरजांगसर, नोसरिया, मिंगसरिया, इंदपालसर के सातों गांव, धर्मास सहित अनेक गांव बाडेला में शामिल थे। जैसे जैसे अन्य गांव बड़े होते गए व अलग होते गए। 2015 में बाडेला से अंतिम गांव धनेरू अलग हुआ तब बीकानेर जिले की 1750 वोट वाली सबसे छोटी पंचायत बाडेला बन गया था। आज यहां करीब 2500 वोट है। अधिकांश ग्रामीण विधानसभा व लोकसभा चुनाव से पहले गांव स्तर पर बैठक का आयोजन करते है और वोट किसे देना पर चर्चा करते हुए मतदान की रणनीति बनाते है।
गौरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले भोमियाजी को पूजता है पूरा गांव।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव में स्थित मंदिर के भोमियाजी को गांव खेड़े के धणी कहा जाता है। गांव के जीवनराम राइका ने बताया कि भोमियाजी ने गौरक्षा के लिए लड़ते लड़ते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ग्रामीणों में उनके प्रति बहुत आस्था है व आज भी हर शुभ काम से पहले भोमियाजी को धोक लगाई जाती है। जीवनराम ने बताया कि दादाजी बताया करते थे कि हरासर का राजपूत परिवार बाडेला आकर बसा और एक जना गांव व गाय की रक्षा का कार्य करता था। उनका नाम ग्रामीणों को स्मरण नहीं परंतु एक बार गांव मे कुछ चोर घुसे और गायों को लेकर भाग गए थे। उसी वीर ने पीछा करते हुए चोरों को मार गिराया और गायों को छुड़वाकर गांव ले आए। युद्ध में वे घायल हुए व गांव पहुंचकर उन्होंने प्राण त्याग दिए। तभी से गांव के लोग उनकी पूजा अर्चना करने लगे है और आज भी श्रद्धा से पूरा गांव धोक लगाता है।
बड़ी गलियां है विशेषता।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव के चुन्नीलाल गोदारा ने बताया कि बाडेला गांव की बसावट की विशेष बात यहां की चौड़ी गलियां ही है। यहां आने वाले लोग गलियों की प्रशंसा करते है और अभी तक ग्रामीणों ने गलियों पर अतिक्रमण जैसे घटिया हथकंडे नहीं अपनाकर अपने गांव के सौंदर्य को बरकरार रखा है। एक दूसरे को काटते हुए लंबी व चौड़ी आर पास गलियां पूरे गांव को अत्याधुनिक बसावट प्रदान करती है।
गांव में ही हो रोजगार के साधन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सुरजाराम ज्याणी ने बताया कि गांव के बुजुर्ग नहीं चाहते की गांव के युवा और बच्चे गांव छोड़कर कहीं बाहर जाएं। वे चाहते है कि गांव में ही रोजगार के सुअवसर प्राप्त हो। फिलहाल गांव में कृषि व पशुपालन ही मुख्य व्यवसाय वर्षों से बना हुआ है। आज भी अधिकांश युवा गांव में ही अपने रोजगार के साधन जुटाने में लगे है। सरकारी नौकरियों में बहुत अधिक युवा शामिल नहीं है। गांव में कारखाने या किसी बड़े व्यवसाय का आगमन नहीं हुआ है।
पद्माराम ने पेश की मिसाल, अनिता बनी यूथ आइकन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव में पद्माराम खिलेरी का नाम पर्यावरण प्रेमी के रूप में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। पद्माराम ने गांव के श्मशान में करीब 300 पीपल के पोधों को पाल पोस कर वृक्ष बनाकर गांव को हरियाला तोहफा दिया है। गांव के युवा बाबूलाल ज्याणी ने बताया कि जब श्मशान में पानी की सुविधा भी नहीं थी तब पद्माराम ने बाल्टियों से पानी सिंच सिंच कर पीपल के पेड़ो को बड़ा किया है। ज्याणी ने बताया कि गांव में कहीं पीपल का पेड़ उगा हुआ नजर आता उसका गट्टा बनाकर निकालते और श्मशान में लगाकर उसे सिंच कर बड़ा वृक्ष बना देते। आज भी पद्माराम इस अभियान में जुटे है और लगातार पीपल के वृक्ष लगाकर वे हरियाली के प्रतिबद्ध है। पद्माराम ने कहा कि शुद्ध ऑक्सीजन, पर्यावरण संतुलन के लिए वृक्षों के महत्व को जानते हुए वे प्राथमिकता से पेड़ लगाते है। खिलेरी ने कहा कि अब गांव के अनेक जागरूक युवा भी उनका साथ देते है। वहीं गांव की बालिका अनिता ज्याणी ने राष्ट्रीय स्तर पर सब जूनियर महिला कबड्डी खेलकर गांव का नाम रोशन किया है। गांव भर में उत्साह का माहौल रहा वहीं अनिता गांव में यूथ आइकन बन गई है। वे आगे भी गांव का नाम रोशन करना चाहती है और अनेक बालिकाएं ही नहीं बालक भी उनसे प्रेरणा ले रहें है।
गोष्ठी में शामिल हुए मौजिज लोग।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गुरूवार को गांव में संत समाधि के पास पार्क में बुजुर्गों ने एकत्र होकर गांव के विकास के बारे में चर्चाएं की। ग्रामीणों ने बेटों बेटियों को पढ़ने व खेलने के लिए हौसला बढ़ाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने गांव के आधारभूत विकास कार्यों के लिए चर्चा करते विकास को गति देने के प्रयास करने की बात कही। अनेक ग्रामीणों ने बिजली, पानी सड़क व स्वास्थ्य सहित सेवा कार्य में ध्यान दिए जाने के लिए कर्मठ युवाओं की टोली बनाने पर विचार किया। बैठक में मेघाराम खिलेरी, गोरधनराम ज्याणी, पद्माराम खिलेरी सहित अनेक बुजुर्ग व युवा शामिल हुए।
गांव में दर्शनीय स्थल, जरूरत है खेल मैदान की।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव में मुक्तिधाम पीपल के वृक्षों की हरियाली के लिए और संतों की छतरी व पार्क दो दर्शनीय स्थल है। गांव से बाहर रहने वाले लोग जब गांव आते है तो दोनों को देखकर शांति का अनुभव करते है। गोष्ठी में शामिल ग्रामीण युवाओं ने बताया कि गांव में बीएसएनएल का टावर 10 साल से बंद पड़ा है। अन्य सभी गांवो में बीएसएनएल की सेवाएं चालू है परंतु उनके गांव में नहीं है ऐसे में सभी ग्रामीण चाहते है कि बीएसएनल टावर काम करें जिससे ग्रामीणों को सस्ती दरों पर सुविधा मिल सकें। वहीं युवाओं की मांग है कि गांव में खेल मैदान होना चाहिए। युवाओं ने बताया कि गांव में युवाओं का रूझाान बेल्ट सर्विस की ओर बढ़ रहा है ऐसे में एक खेल मैदान की गांव में सर्वाधिक जरूरत है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव बाडेला में ग्रामीणों ने स्थापना दिवस पर आयोजित की गोष्ठी, गांव के विकास पर चर्चा की।