






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 4 अगस्त 2024। हरियाली अमावस्या पर डाबला तालाब में पारिवारिक वानिकी दिवस का आयोजन किया गया। “सुदृढ़ भविष्य के लिए स्थानीय वनस्पति को अंगीकार करें“ की थीम पर आयोजित समारोह में कतरियासर महंत मोहननाथ सिद्ध व लिखमादेसर महंत भँवरनाथ सिद्ध के सानिध्य में प्रदेश के अनेक ज़िलों से जसनाथी संप्रदाय के गणमान्य लोगों और देश-विदेश के पर्यावरण प्रेमियों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। देव जसनाथ संस्थागत वन मंडल अध्यक्ष बहादुरमल सिद्ध ने बताया कि यहां संस्था द्वारा निर्मित 11 तलाईयों के चारों ओर स्थानीय क़िस्मों के पौधों का रोपण किया गया और पर्यावरण पंचायत का आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत जसनाथजी के शब्द गायन से हुई। उसके बाद डाबला तालाब की मुहिम व स्थानीय वनस्पतियों के महत्व और जसनाथ जी की पर्यावरणीय शिक्षाओं की वर्तमान में प्रासंगिकता के बारे में पर्यावरणविद्ध प्रोफ़ेसर श्यामसुन्दर ज्याणी ने विस्तृत जानकारी दी। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अखिल भारतीय बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी ने डाबला तालाब की मुहिम को ऐतिहासिक पहल की संज्ञा देते हुए स्थानीय वनस्पति, देसज बीजों, ज़हर मुक्त खेती की ज़रूरत पर प्रकाश डाला। भारतीय किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष दलाराम ने अलग-अलग क्षेत्रों में डाबला तालाब जैसी मुहिम शुरू करने की ज़रूरत पर जोर दिया और इस मुहिम को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। के.आर. ज्याणी ने जसनाथी समुदाय के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह मुहिम राजस्थान और भारत सरकार के अलावा संयुक्त राष्ट्र के संज्ञान में भी है। अमेरिका से कार्यक्रम में शामिल होने आई प्राणदा संगठन की संस्थापक अनुपमा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सामुदायिक भागीदारी की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए पारिवारिक वानिकी को सामुदायिक भागीदारी का बेहतरीन मॉडल बताया। समाजसेवी श्यामसुन्दर आर्य ने ओरण-गोचर को अतिक्रमण मुक्त करने व उन्हें फिर से विकसित करने में सामुदायिक भागीदारी का आह्वान किया। वन मंडल समन्वय हंसराज मोटसरा व उपाध्यक्ष बीरबनाथ जाखड़ ने बताया कि खेजड़ी, बेरी, इमली, कुमट, करौंदा के क़रीब एक हज़ार पौधों का रोपण किया गया। जिज्ञासु सिद्ध ने जानकारी दी की पुनरासर के नौरंगनाथ सिद्ध की तरफ़ से सभी के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में बीकानेर के एग्री पॉइंट, लूनकरणसर के ग्रामोत्थान विद्यालय, बम्बलू की हरोज़ी एकेडमी, कतरियासर के सरस्वती शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने संस्थान निदेशक हरदीप रंधावा, मनोज शर्मा, रामचंद्र , श्रवण कुकना के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई। श्रीदेव जसनाथ सिद्ध धर्मार्थ ट्रस्ट बीकानेर के अध्यक्ष धन्नानाथ हुड्डा, कुशलनाथ डांगा, सुखराम नाथ गोदारा, पूर्व जिला परिषद सदस्य हेमनाथ जाखड़, अखिल भारतीय जसनाथी महासभा पूर्व महामंत्री सादुल नाथ भाम्भू, हड़मानाराम भामू, महर्षि दयानंद सरस्वती छात्रावास के अध्यक्ष श्यामसुंदर आर्य, अधीक्षक श्रवण कुमार भामू, एफईएस की डिम्पल शर्मा, मालासर सरपंच कौशल्या सिद्ध, रुस्तम धोरा ओरण ट्रस्ट के मंत्री ओशो जिज्ञासु, कोषाध्यक्ष काननाथ मूंड, उपाध्यक्ष मोहननाथ जाखड़, सिद्ध युवा महासभा के अध्यक्ष भगवाननाथ कलवानिया, बुद्धनाथ महिया, सरदारशहर संस्था अध्यक्ष माननाथ महिया, लूणकरणसर जाट समाज के अध्यक्ष मोटाराम महिया, पर्यावरण प्रेमी शांति देगी, कविता ज्याणी, भागीरथ मोटसरा, रवींद्र बेनीवाल, दौलत राम गोदारा, गांव मोमासर से मोहनलाल भाम्भू, बजरंग भामू, रामकरण भामू, सुभाष भामू, श्याम साईं, लिखमादेसर से जगदीश ज्याणी, नरेश ज्याणी, पुखराज ज्याणी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी निभाई।







