May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 सितंबर 2021।  🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 03 – Sep – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि  एकादशी  07:46:23
🔅 नक्षत्र  पुनर्वसु  16:42:12
🔅 करण :
बालव  07:46:23
कौलव  20:11:49
🔅 पक्ष  कृष्ण
🔅 योग  व्यतीपात  10:08:33
🔅 वार  शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय  06:13:03
🔅 चन्द्रोदय  27:12:59
🔅 चन्द्र राशि  मिथुन – 10:19:49 तक
🔅 चन्द्र वास पश्चिम 10:19 AM तक
🔅 सूर्यास्त  18:53:24
🔅 चन्द्रास्त  16:40:00
🔅 ऋतु  शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत  1943  प्लव
🔅 कलि सम्वत  5123
🔅 दिन काल  12:40:21
🔅 विक्रम सम्वत  2078
🔅 मास अमांत  श्रावण
🔅 मास पूर्णिमांत  भाद्रपद

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित  12:07:53 – 12:58:34
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
08:45:07 – 09:35:48
12:58:34 – 13:49:16
🔅 कंटक  13:49:16 – 14:39:57
🔅 यमघण्ट  17:12:02 – 18:02:43
🔅 राहु काल  10:58:11 – 12:33:13
🔅 कुलिक  08:45:07 – 09:35:48
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  15:30:39 – 16:21:20
🔅 यमगण्ड  15:43:19 – 17:18:22
🔅 गुलिक काल  07:48:05 – 09:23:08
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल  पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅चल  06:13:03 –   07:48:05
🔅लाभ  07:48:05 –   09:23:08
🔅अमृत  09:23:08 –   10:58:11
🔅काल  10:58:11 –   12:33:13
🔅शुभ  12:33:13 –   14:08:16
🔅रोग  14:08:16 –   15:43:19
🔅उद्वेग  15:43:19 –   17:18:22
🔅चल  17:18:22 –   18:53:25
🔅रोग  18:53:24 –   20:18:25
🔅काल  20:18:25 –   21:43:26
🔅लाभ  21:43:26 –   23:08:27
🔅उद्वेग  23:08:27 –   24:33:28
🔅शुभ  24:33:28 –   25:58:28
🔅अमृत  25:58:28 –   27:23:29
🔅चल  27:23:29 –   28:48:30
🔅रोग  28:48:30 –   30:13:31

❄️लग्न तालिका ❄️

🔅 सिंह  स्थिर
शुरू: 04:59 AM  समाप्त: 07:17 AM

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव
शुरू: 07:17 AM  समाप्त: 09:33 AM

🔅 तुला  चर
शुरू: 09:33 AM  समाप्त: 11:52 AM

🔅 वृश्चिक  स्थिर
शुरू: 11:52 AM  समाप्त: 02:11 PM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव
शुरू: 02:11 PM  समाप्त: 04:15 PM

🔅 मकर  चर
शुरू: 04:15 PM  समाप्त: 05:58 PM

🔅 कुम्भ  स्थिर
शुरू: 05:58 PM  समाप्त: 07:27 PM

🔅 मीन  द्विस्वाभाव
शुरू: 07:27 PM  समाप्त: 08:52 PM

🔅 मेष  चर
शुरू: 08:52 PM  समाप्त: 10:28 PM

🔅 वृषभ  स्थिर
शुरू: 10:28 PM  समाप्त: अगले दिन 00:24 AM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:24 AM  समाप्त: अगले दिन 02:39 AM

🔅 कर्क  चर
शुरू: अगले दिन 02:39 AM  समाप्त: अगले दिन 04:59 AM

❇️अजा एकादशी व्रत कथा❇️

अजा एकादशी व्रत की कथा सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र से जुड़ी है। अपने सत्य वचनों के लिए राजा हरिश्चंद्र आज भी इतिहास के पन्नों में जीवित हैं। एक बार देवताओं ने मिलकर इनकी सत्यता की परीक्षा लेने की योजना बनाई। राजा को एक स्वप्न आया, जिसमें उन्होंने देखा कि अपना सारा राजपाट उन्होंने ऋषि विश्वामित्र को दान कर दिया है। अगले दिन राजा हरिश्चन्द्र ने विश्वामित्र को अपना सारा राज-पाठ सौंप दिया और राजमहल छोड़कर जाने लगे, तब विश्वामित्र ने राजा हरिश्चन्द्र से दक्षिणा के रुप 500 सोने की मुद्राएं मांगी।

राजा हरिश्चन्द्र ने विश्वामित्र से कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजपाट के साथ-साथ राज्यकोष भी दान में उन्हें में दे दिया और अब उनके पास अपनी पत्नी और बेटे के अलावा कुछ नहीं बचा। राजा ने विश्वामित्र की मांग को पूरा करने के लिए अपनी पत्नी, पुत्र और स्वयं को एक चांडाल को बेच दिया और बदले में मिली स्वर्ण मुद्राएं विश्वामित्र को दान में दे दीं। वे अपनी पत्नी और बेटे से बिछड़ गए और उस चांडाल के यहाँ काम करने लगे। चांडाल ने राजा को श्मशान भूमि पर होने वाले दाह संस्कार की वसूली का काम दे दिया।

एक दिन राजा आधी रात के समय श्मशान के द्वार पर पहरा दे रहे थे। तभी वहां एक स्त्री बिलखते हुए अपने पुत्र का शव हाथ में लिए पहुंची। वो महिला कोई और नहीं बल्कि राजा हरिश्चन्द्र की पत्नी थी, जो अपने पुत्र के मृत्य शरीर का दाह-संस्कार करने वहां आयी थी। अपने धर्म का पालन करते हुए राजा ने अपनी पत्नी से दाह संस्कार के लिए पैसे माँगे। राजा राजा की पत्नी के पास उन्हें देने के लिए धन नहीं था, इसलिए उसने अपनी साड़ी का आधा हिस्सा फाड़कर कर के रूप में राजा का दे दिया।

राजा हरिश्चंद्र की कर्त्तव्य निष्ठा देख भगवान वहां प्रकट हुए और उनका राज पाठ उन्हें लौटा दिया और साथ ही राजा के पुत्र को भी जीवित कर दिया। कहा जाता है कि जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन अजा एकदशी व्रत था। राजा हरिश्चंद्र के साथ ही उनकी पत्नी ने भी सुबह से अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था। दोनों को ही इस एकदशी व्रत का फल मिला।

पं. विष्णुदत्त शास्त्री {8290814026}