May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 मई 2026। बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के कारण जिले भर में लू और तापघात का खतरा बना हुआ है। सीएमएचओ पुखराज साध ने जिले के प्रत्येक अस्पताल को हीट वेव के विरुद्ध अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए है।

डॉ. साध ने बताया कि लू तापघात से बचाव के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा एडवाइजरी जारी की गई है कि आमजन दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच खुले में निकलने से बचें। विशेषकर वृद्धों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। सूती एवं हल्के रंग के कपड़े, टोपी, चश्मा व छाते का प्रयोग करें। दोपहर के समय भारी व ज्यादा मेहनत का कार्य न करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और समय-समय पर पेयजल, छाछ लस्सी, आम का पना, नींबू पानी, ओआरएस व अन्य तरल पदार्थ लेते रहें। ज्यादा चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड ड्रिंक तथा अल्कोहल से बचें। खाली पेट न रहें और संतुलित भोजन करें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को पार्किंग की हुई गाड़ी में ना छोड़े। सड़े-गले या बासी भोजन से दूर रहें। लू के लक्षण महसूस होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार के साथ नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।

लू लगने पर तत्काल उपचार के चरण
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ लोकेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी के अनुसार जब किसी व्यक्ति को लू लग जाए या तापघात (हीट स्ट्रोक) हो जाए, तो इन तीन मुख्य लक्ष्यों पर ध्यान दें:-
शरीर का तापमान कम करें:- व्यक्ति को तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं। उसके शरीर को गीले कपड़े से पोंछें या बार-बार ठंडे पानी से शरीर को धोएं। सिर पर सामान्य तापमान का पानी डालें। मुख्य उद्देश्य शरीर की गर्मी को तुरंत बाहर निकालना है।
शरीर में पानी की कमी को पूरा करें:- प्रभावित व्यक्ति को ओआरएस घोल पीने के लिए दें। यदि ORS उपलब्ध न हो, तो नींबू पानी, तोरानी (चावल का पानी), या छाछ जैसे तरल पदार्थ दें जो शरीर को फिर से हाइड्रेट करने में मदद करें।
चिकित्सकीय सहायता लें:- लू जानलेवा हो सकती है, इसलिए प्राथमिक उपचार के साथ-साथ व्यक्ति को तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक हो सकता है।
कुछ अतिरिक्त सावधानियां:- यदि संभव हो, तो व्यक्ति के तंग कपड़ों को ढीला कर दें ताकि हवा का संचार बेहतर हो सके। यदि व्यक्ति बेहोश है, तो उसे कुछ भी पिलाने की कोशिश न करें, इससे सांस नली में रुकावट आ सकती है। ऐसे में मरीज को सीधे डॉक्टर के पास ले जावें।