May 20, 2026
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कर्नाटक विधानसभा के चुनाव 10 मई को है। इस बार भी वहां के चुनाव रोचक स्थिति में है। कांग्रेस जहां इमोशनल कार्ड पर मैदान में उतरी है वहीं भाजपा ने 80 – 20 फार्मूले में विकास का तड़का लगाया है। देवेगौड़ा की जेडीएस अपने परंपरागत वोट के साथ ताल ठोक रही है। इसी कारण चुनाव रोचक हो गया है। हालांकि अब तक के सर्वे कांग्रेस की बढ़त बता रहे हैं और जेडीएस को भी बेहतर साबित कर रहे हैं। मगर मुख्य मुकाबला तो कांग्रेस व भाजपा के मध्य ही है। भाजपा अपनों से घिरी है और उससे उबरने के लिए उसने पूरी ताकत झोंकी है। इसी कारण मुकाबला रोचक जरूर बन गया है।
पहले बात कांग्रेस की। कर्नाटक के कोलार में राहुल गांधी के दिए भाषण पर ही उनकी लोकसभा की सदस्यता गई। उसे ही भुनाने के लिए कांग्रेस ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत कोलार से की और राहुल ने वहां जमकर पीएम और केंद्र सरकार पर आरोप लगाये। सदस्यता जाने के बाद राहुल का रुख ज्यादा आक्रामक है और तेवर भी तीखे है।
दूसरा इमोशनल कार्ड कांग्रेस के पिछले सीएम सिद्धारमैया ने खेला है। उनकी कर्नाटक में अच्छी पकड़ है। उन्होंने कल कह दिया कि ये मेरा अंतिम चुनाव है। उनकी इस बात का बड़ा असर भी है।
तीसरा इमोशनल कार्ड है कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। वे कर्नाटक से आते है और अजा वर्ग के हैं। कांग्रेस इस चुनाव को उनकी प्रतिष्ठा का सवाल बता रही है। खड़गे की 25 रैलियां कर्नाटक में होगी। कुल 40 रैलियों में बड़ा हिस्सा खड़गे का है और बाकी रैलियां राहुल और प्रियंका की है। ये भी एक तरह का इमोशनल कार्ड ही है।
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने इस बार चुनाव के लिए खासी मेहनत की है। पिछले एक दशक से चुनाव के समय नेता कांग्रेस व अन्य पार्टियां छोड़कर भाजपा में जाते रहे हैं मगर इस बार कर्नाटक में उलटा है। भाजपा छोड़कर नेता कांग्रेस में जा रहे हैं।
भाजपा इसी कारण अपनों से घिरी है। टिकट वितरण के बाद गुस्सा फूटा और पूर्व सीएम, डिप्टी सीएम, मंत्री, विधायक आदि ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। जेडीएस के भी कई नेता कांग्रेस में शामिल हुए है। भाजपा का पूरा जोर तो अब डेमेज कंट्रोल में ही लगा हुआ है इसीलिए उसे परेशानी हो रही है। भाजपा ने पीएम की वहां ताबड़तोड़ रैलियां करने की योजना बना वोटर को जोड़ने की योजना बनाई है। मगर निर्णायक लिंगायत वोट की चुप्पी भाजपा को परेशान किये हुए है। इस समुदाय के बड़े नेताओं ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है, वहीं येदुरप्पा भी खास सक्रिय नहीं दिखते। उनको सीएम हटाया गया और उनके पुत्र को सीएम बनाया नहीं गया, उसका असर लिंगायत समुदाय पर है। वहीं कांग्रेस भाजपा के लिंगायत नेताओं को आपने साथ लाने में कामयाब रही है। ये भी भाजपा के लिए चिंता की बात है।
मगर भाजपा आसानी से मैदान छोड़ने वाली नहीं। उसने पीएम, गृह मंत्री, अध्यक्ष जे पी नड्डा के अलावा यूपी के सीएम योगी को भी मैदान में उतारा है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके। इसीलिए चुनावी टक्कर रोचक हुई है।
वहीं तेलंगाना में भी चुनावी बिसात बिछ चुकी है और कांग्रेस ने कमान हिमाचल की तरह प्रियंका के हाथ मे दी है। राहुल भारत जोड़ो यात्रा के समय काफी दिन इस राज्य में दे चुके हैं। ये राज्य केसीआर का अभेद किला है, उसमें सेंध लगाना आसान नहीं। इसी कारण अभी से प्रियंका को वहां सक्रिय किया गया है। कर्नाटक के चुनाव खास है,उसके परिणाम का असर पूरे दक्षिण भारत में पड़ेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार