






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 जनवरी 2023। आज मकर संक्रांति का पर्व घरों में धूमधाम से मनाया जा रहा है। पंडित विष्णुदत्त शास्त्री ने इसे ज्योतिषिय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताते हुए पाठकों के लिए विशेष जानकारी साझा की है। आप भी पढ़ें व अन्य श्रद्धालुओं तक पहुंचाए।
चूँकि भगवान सूर्य 14 जनवरी को मकर राशि में रात्रि 08:43 बजे प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पुण्य काल रविवार 15 जनवरी को मनाया जाएगा
संक्रांति पर जप, तप, दान आदि का विशेष समय 15 जनवरी को सूर्यादय से दोपहर 12.49 बजे तक रहेगा।
वैसे तो 15 जनवरी को पूरे दिन ही मकर संक्रांति के पर्व का मान रहेगा। प्रात: से मध्याह्न तक का समय स्नान व दान, जप, तप, आदि के लिए विशेष पुण्य फलदायक रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति को सभी जातकों को चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरुष सूर्योदय से पूर्व अवश्य ही अपनी शय्या का त्याग करना चाहिए । हर मनुष्य को मकर संक्रांति के दिन तीर्थ स्नान अवश्य ही करना चाहिए । संक्रांति पर्व पर स्नान के संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि
रवि संक्रमणे प्रासेन स्नानाद्यस्तु मानवः।
सप्तजन्मनि रोगो स्द्यान्निर्धनश्चैव जायतेः।
अर्थात् सूर्य की संक्रांति के दिन जो मनुष्य स्नान नहीं करता है। वो सात जन्मों तक रोगी रहता है। देवी पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता है। वह रोगी और निर्धन बना रहता है।
तीर्थ स्थल पर नहीं पहुंच सके तो घर में ही स्नान के पात्र में गंगाजल भर लेवे।
इस दिन घर में खिचड़ी बना कर पहले घर के मंदिर में भगवान को भोग लगाएं फिर सभी सदस्यों के एक साथ प्रेम पूर्वक खाने से परिवार बढ़ता है ।
शिव पुराण के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन नए वस्त्रों का दान करना बहुत शुभ होता है।
मकर संक्रांति के दिन गुड़ का दान करने से कुंडली में सूर्य देव बलवान होते है ।
मकर संक्रांति के दिन घी, और अनाज दान करने से भी बहुत पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति के दिन नमक का दान करने से समस्त अनिष्ट दूर होते है ।
मकर संक्रांति के दिन काले तिल को तांबे के पात्र में भरकर दान करने से शनि देव प्रसन्न होते है, शनि की साढ़े साती तथा शनि की ढैय्या के अशुभ प्रभाव दूर होते है ।



