






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 सितंबर 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 06 – Sep – 2021
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि चतुर्दशी 07:40:31
🔅 नक्षत्र मघा 17:51:51
🔅 करण :
शकुन 07:40:31
चतुष्पाद 19:05:47
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग :
शिव 06:52:56
सिद्ध 28:47:36
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:14:28
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि सिंह
🔅 चन्द्र वास पुर्व
🔅 सूर्यास्त 18:50:00
🔅 चन्द्रास्त 18:45:00
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 12:35:32
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत श्रावण
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:07:02 – 12:57:25
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
12:57:25 – 13:47:47
15:28:31 – 16:18:53
🔅 कंटक 08:45:34 – 09:35:56
🔅 यमघण्ट 12:07:02 – 12:57:25
🔅 राहु काल 07:48:54 – 09:23:21
🔅 कुलिक 15:28:31 – 16:18:53
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:26:18 – 11:16:40
🔅 यमगण्ड 10:57:47 – 12:32:14
🔅 गुलिक काल 14:06:40 – 15:41:06
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅अमृत 06:14:28 – 07:48:54
🔅काल 07:48:54 – 09:23:21
🔅शुभ 09:23:21 – 10:57:47
🔅रोग 10:57:47 – 12:32:14
🔅उद्वेग 12:32:14 – 14:06:40
🔅चल 14:06:40 – 15:41:06
🔅लाभ 15:41:06 – 17:15:33
🔅अमृत 17:15:33 – 18:50:00
🔅चल 18:50:00 – 20:15:37
🔅रोग 20:15:37 – 21:41:14
🔅काल 21:41:14 – 23:06:51
🔅लाभ 23:06:51 – 24:32:28
🔅उद्वेग 24:32:28 – 25:58:05
🔅शुभ 25:58:05 – 27:23:42
🔅अमृत 27:23:42 – 28:49:19
🔅चल 28:49:19 – 30:14:56
❄️लग्न तालिका ❄️
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 04:48 AM समाप्त: 07:05 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 07:05 AM समाप्त: 09:21 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 09:21 AM समाप्त: 11:40 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 11:40 AM समाप्त: 01:59 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:59 PM समाप्त: 04:03 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 04:03 PM समाप्त: 05:46 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 05:46 PM समाप्त: 07:15 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:15 PM समाप्त: 08:40 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 08:40 PM समाप्त: 10:16 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:16 PM समाप्त: अगले दिन 00:13 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:13 AM समाप्त: अगले दिन 02:27 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: अगले दिन 02:27 AM समाप्त: अगले दिन 04:48 AM
भाद्रपद अमावस्या का महत्व
प्रत्येक महीने की अमावस्या तिथि का अपना अलग और विशेष महत्व होता है। भाद्रपद माह की अमावस्या, कुशग्रहणी अमावस्या भी कहते हैं इस दिन धार्मिक कार्यों के लिए कुशा(घास) एकत्रित की जाती है। पौराणिक ग्रंथों में इस दिन को कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि मान्यता है कि इस दिन एकत्रित की जाने वाली घास यदि धार्मिक कार्यों आदि में इस्तेमाल करें तो वह साल भर तक पुण्य फलदायी होती है। यदि भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन पड़ रहा हो तो इस घास का प्रयोग बारह सालों तक किया जा सकता है।
शास्त्रों में दस तरह की कुशों के बारे में ज़िक्र किया गया है। कुशग्रहणी अमावस्या के दिन इन दस प्रकार की घास में से जो भी आसानी से मिल जाए, उसे एकत्रित कर लेनी चाहिए। लेकिन इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि घास को केवल हाथ से ही एकत्रित निकाले और उसकी पत्तियां पूरी होनी चाहिए यानि आगे का भाग टूटा हुआ ना हो। सूर्योदय का समय और उत्तर दिशा की ओर मुख कुशा एकत्रित करने के उचित रहता है।
भाद्रपद अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिदक्षिणा की जाती है। साथ ही पितरों की आत्मा की शांति के लिए कच्चे दूध में काले तिल और गंगाजल को मिलाकर चढ़ाया जाता है।
शास्त्रों में इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का खास महत्व बताया गया है।
कुशग्रहिणी अमावस्या के दिन सुबह के समय दाहिने हाथ से कुशा को उखाड़कर पूजा में प्रयोग करना चाहिए।
पुत्रवती स्त्रियां अपने बच्चों की ख़ुशी, अच्छी सेहत, और लम्बे उम्र के लिए इस दिन माँ दुर्गा की पूजा अवश्य करें। कई जगहों पर महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना से भाद्रपद अमावस्या को व्रत भी रखती हैं।
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि और राहु-केतु ग्रहों का बुरा प्रभाव है, तो उसे खत्म करने के लिए जातक को पितरों के नाम से दान और तर्पण करना चाहिए।
इस दिन जिन लोगों पर कालसर्प दोष है, उसके निवारण के लिए पूजा-अर्चना भी की जा सकती है।
इस दिन ज़रूरतमंद और गरीब लोगों को अपने सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य दें।
घर में किसी व्यक्ति की सेहत खराब रहती हो, तो भाद्रपद अमावस्या के दिन उसके नाम से गरीबों को भोजन ज़रूर कराएं।
पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनके नाम से इस दिन गाय को चारा खिलाएं और नदी के तट पर पिंडदान करें।
पं. विष्णुदत्त शास्त्री {8290814026}



