






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 27 अगस्त 2020। किसानों, मजदूरों, व्यापारियों से आबाद रहने वाली कृषि मंडी तीन दिन से सूनसान पड़ी है और यहां कार्यरत श्रमिकों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है और इन तीन दिनों में श्रीडूंगरगढ़ कृषि मंडी में करीब 90 लाख का घाटा हो गया है। राजस्थान में प्रमुख तीन मंडियों में स्थान पाने वाली श्रीडूंगरगढ कृषि मंडी को कोरोना रूपी नाग ने डस लिया है। कोरोना के प्रारम्भ से अभी तक मंडी में सुचारू कार्य हो ही नहीं पाया है। सरकारी नीतियों के विरोध में व्यापारी और किसान तो आक्रोशित है ही श्रमिकों के भी रोजगार का प्रश्न खड़ा हो गया है। पहले राज्य सरकार के कृषक कल्याण शुल्क का विरोध अब केन्द्र सरकार के फार्मर प्रोड्यूसर ट्रेड एडं कॉमर्स-2020 के विरोध में मंडी व्यापारी लगातार सरकारों से अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे है। श्रीडूंगरगढ व्यापार संघ अध्यक्ष श्याम सुंदर पारीक ने व्यापारियों का दर्द बताते हुए कहा कि 50-60 सालों में करोड़ों रूपए का इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है उसे अब सरकारें तबाह करने पर तुली है। मंडी में किसान कृषि उपज खुली निलामी में नकद भुगतान व कृषि उपज मंडी के कर्मचारियों की उपस्थिति में विक्रय होतीं थी। किसान भी इस पारदर्शी व प्रतिस्पर्धात्मक, तथा भुगतान निश्चित, संतुष्टी के साथ विक्रय करते है। लेकिन सरकार ने कृषि उपज मंडी परिसर के बाहर व्यापार करने वाले व्यापारी को सभी तरह के टैक्स से छूट प्रदान कर वहीं दूसरी ओर परिसर के अंदर व्यापार करने वाले व्यापारी फर्म कुल 7.60 प्रतिशत अतरिक्त शुल्क कायम रख कर एक ही तरह के व्यापार में दो तरह की टैक्स व्यवस्था लागू कर दी है जिसके कारण कृषि उपज मंडी व कृषि उपज मंडी के व्यापारी दोनों का अस्तित्व ही पूरी तरह समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा। कृषि उपज मंडी में किसानों की उपज के भुगतान की पूरी गारंटी रहती है। लेकिन सीधी खरीद के कारण हवाई व्यापारी कभी भी किसानों का बड़ा भुगतना रोक कर फरार हो सकता है। बड़ी बड़ी कम्पनीयां आकर बिना प्रतिस्पर्धा व बिना पारदर्शिता किसानों का माल खरीद कर अंग्रेजों वाली नीति अपना कर किसान को बन्दुआ मजदूर बना देगी। ऐसी स्थिति में कृषि किसानों के घाटे का सौदा साबित होगा। इन सब विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए व्यापार संघ श्रीडूंगररगढ़ के सभी व्यापारियों ने सरकार से पूरजोर शब्दों में यह मांग की कि इस एक ही तरह के व्यापार में दो तरह का कानून को पुरी तरह समाप्त कर कृषि उपज मंडी के व्यापारीयों हितों को ध्यान में रखते हुए इस अधिनियम में पूरी तरह संशोधन करें।







