






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 31 अक्टूबर 2025। कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की नवमी को आवंला नवमी मनाई जाती है और महिलाएं आवंले के वृक्ष का पूजन करती है। आड़सर बास के मूंधड़ा मंदिर के पुजारी जगदीश शर्मा ने बताया कि आंवला आयुर्वेद में अद्भूत महत्व रखने वाला पौधा है। मानव शरीर में छह रस होते है जिनमें से पांच रस आंवले में मिल जाते है। आंवला भगवान विष्णुजी व शिवजी का प्रिय माना जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है, कि आंवले के पूजन से भगवान की कृपा के साथ जीवन में सुख, समृद्धि व शांति की प्राप्ति होती है। शुक्रवार सुबह महिलाओं ने सामूहिक पूजन के आयोजन संपन्न किए। आंवले के वृक्ष का जल, धूप दीप, फूल व तुलसी दल अर्पित कर पूजन संपन्न किया। महिलाओं ने व्रत कथा सुनकर परिक्रमा दी। अनेक श्रद्धालु महिलाओं ने मंत्र जप के साथ 108 परिक्रमाएं पूर्ण की। विभिन्न मंदिरों में वृक्ष पूजन के लिए महिलाएं पहुंची व पूजन संपन्न किया।






