May 20, 2026
17-jan

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 जनवरी 2025। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩 शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 17 – Jan – 2025
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि चतुर्थी +05:33 AM
🔅 नक्षत्र मघा 12:46 PM
🔅 करण :
बव 04:46 PM
बालव 04:46 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग सौभाग्य +00:56 AM
🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:26 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:22 PM
🔅 चन्द्र राशि सिंह
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 06:01 PM
🔅 चन्द्रास्त 09:43 AM
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:34 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत पौष
🔅 मास पूर्णिमांत माघ

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:22:57 – 13:05:16
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 09:33 AM – 10:15 AM
🔅 कंटक 01:47 PM – 02:29 PM
🔅 यमघण्ट 04:36 PM – 05:19 PM
🔅 राहु काल 11:24 AM – 12:44 PM
🔅 कुलिक 09:33 AM – 10:15 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 03:12 PM – 03:54 PM
🔅 यमगण्ड 03:22 PM – 04:42 PM
🔅 गुलिक काल 08:46 AM – 10:05 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅चल 07:26:41 – 08:46:02
🔅लाभ 08:46:02 – 10:05:23
🔅अमृत 10:05:23 – 11:24:45
🔅काल 11:24:45 – 12:44:07
🔅शुभ 12:44:07 – 14:03:28
🔅रोग 14:03:28 – 15:22:50
🔅उद्वेग 15:22:50 – 16:42:11
🔅चल 16:42:11 – 18:01:33
🔅रोग 18:01:32 – 19:42:10
🔅काल 19:42:10 – 21:22:47
🔅लाभ 21:22:47 – 23:03:25
🔅उद्वेग 23:03:25 – 24:44:02
🔅शुभ 24:44:02 – 26:24:39
🔅अमृत 26:24:39 – 28:05:17
🔅चल 28:05:17 – 29:45:54
🔅रोग 29:45:54 – 31:26:31

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 मकर चर
शुरू: 07:18 AM समाप्त: 08:59 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 08:59 AM समाप्त: 10:29 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:29 AM समाप्त: 11:55 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 11:55 AM समाप्त: 01:31 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 01:31 PM समाप्त: 03:27 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:27 PM समाप्त: 05:42 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 05:42 PM समाप्त: 08:02 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 08:02 PM समाप्त: 10:20 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 10:20 PM समाप्त: अगले दिन 00:36 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 00:36 AM समाप्त: अगले दिन 02:55 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 02:55 AM समाप्त: अगले दिन 05:14 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 05:14 AM समाप्त: अगले दिन 07:18 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।

आज संकट चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी है । प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकट चतुर्थी कहते है।

इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना, संकट चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के संकटो से रक्षा होती है।

अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित किया जाता है। जिस चतुर्थी तिथि के दिन चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी उसी दिन रखा जाता है।

संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम को चंद्रोदय के बाद गणेश जी और चंद्र देव जी की पूजा की जाती है । यदि उस दिन बादल के कारण चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के समय में पूजा कर लेना चाहिए ।

आज गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गं गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।

चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है ।

चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है

किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026